पैकेज्ड फूड पर लगेगा ‘लाल षट्कोण’ चेतावनी लेबल: FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया सिंगल-फेज लागू करने का नया प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बदला नियम; चीनी, नमक या वसा में से किसी एक की मात्रा अधिक होने पर भी पैकेट के सामने दिखेगा चेतावनी सिंबल।

भारत में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों (Packaged & Processed Foods) की बढ़ती खपत और डायबिटीज, मोटापे व दिल की बीमारियों के खतरों को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के कड़े रुख के बाद FSSAI ने पैक्ड खाद्य पदार्थों पर ‘फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग’ (FoPL) को सिंगल-फेज (एक ही चरण) में अनिवार्य रूप से लागू करने का नया अनुपालन हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया है। इसके तहत अब अगर किसी भी पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक या वसा (Fat) में से किसी एक की भी मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई, तो पैकेट के मुख्य हिस्से (टॉप-लेफ्ट) पर अनिवार्य रूप से लाल षट्कोण (Red Hexagon) का चेतावनी सिंबल लगाना होगा।

इससे पहले FSSAI ने चेतावनी लेबलिंग को दो अलग-अलग चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया था, जिस पर 10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई थी। केरल के एनजीओ ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने FSSAI से पूछा था कि आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर एक ही बार में स्पष्ट और अनिवार्य लेबलिंग क्यों लागू नहीं की जा सकती। अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए FSSAI ने अपने हलफनामे में दो-चरणीय व्यवस्था को समाप्त कर एकल-चरण (Single Phase) प्रणाली लागू करने और इसके लिए स्पष्ट समय-सारणी प्रस्तुत की है।

1. ‘लाल षट्कोण’ (Red Hexagon) लेबल: कनाडा के मॉडल पर आधारित

FSSAI द्वारा प्रस्तावित नई चेतावनी लेबलिंग व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से कनाडा के नियामक मॉडल पर आधारित है:

  • डिजाइन और स्थान: चेतावनी लेबल सफेद वर्गाकार पृष्ठभूमि पर लाल रंग का षट्कोण (Red Hexagon) होगा, जिसे पैकेट के सामने वाले मुख्य पैनल (Front Panel) के ऊपरी बाएँ (Top-Left) कोने में लगाना होगा।
  • पोषक तत्वों का स्पष्ट उल्लेख: यदि कोई उत्पाद निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उस हेक्सागोन के भीतर स्पष्ट शब्दों में ‘HIGH SUGAR’ (अधिक चीनी), ‘HIGH SALT’ (अधिक नमक) या ‘HIGH FAT’ (अधिक वसा) लिखा होगा। इसका फ़ॉन्ट साइज पीछे लिखे न्यूट्रिशन टेबल के फ़ॉन्ट से कम से कम एक प्वाइंट बड़ा होगा।
  • एक ही पोषक तत्व पर लागू: पुराने प्रस्ताव के विपरीत, अब यदि कोई उत्पाद केवल किसी एक घटक (जैसे केवल अत्यधिक नमक या केवल अत्यधिक चीनी) की सीमा पार करता है, तो भी उस पर यह चेतावनी अनिवार्य होगी।

2. ICMR-NIN 2024 दिशानिर्देशों पर आधारित मानक और समय-सीमा

खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की सीमा निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार किया गया है:

  • ICMR-NIN मानक: पोषाहार सीमाओं (Nutrient Thresholds) को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) के ‘डाइट्री गाइडलाइंस फॉर इंडियंस 2024’ के आधार पर तय किया गया है।
  • फिनालाइज करने की समय-सीमा: FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करने, 60 दिनों के सार्वजनिक व डब्ल्यूटीओ (WTO) परामर्श और अंतिम गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित करने के लिए उसे लगभग 4 महीने का समय लगेगा।
  • 1 साल का ट्रांजिशन विंडो: अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद खाद्य निर्माता कंपनियों (FBOs) को अपने पुराने मुद्रित पैकेटों के स्टॉक को खत्म करने और नई लेबलिंग अपनाने के लिए 365 दिनों (1 वर्ष) का समय दिया जाएगा।

निष्कर्ष 

FSSAI का यह नया कदम भारतीय उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जाने वाले पैकेज्ड फूड के बारे में पारदर्शी और त्वरित जानकारी देने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। ‘लाल षट्कोण’ लेबल से आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों का चयन करना आसान होगा, जिससे देश में लाइफस्टाइल बीमारियों (NCDs) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

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By Kanchan

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