ब्रिक्स देशों में मानसिक स्वास्थ्य क्रांति: भारत के नेतृत्व में शुरू हुआ नया नेटवर्क, NIMHANS संभालेगा वैश्विक कमान
सांस्कृतिक रूप से अनुकूलित तकनीकों, 24×7 डिजिटल हेल्पलाइन, कॉमिक्स (Manga) और AI स्क्रीनिंग के जरिए ग्रामीण इलाकों व युवाओं तक पहुंचेगा इलाज; 85% इलाज के अंतर (Treatment Gap) को मिटाने की बड़ी तैयारी।
विकासशील देशों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के मंच पर एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल की शुरुआत की है। भारत सरकार के तत्वावधान में बंगलुरु स्थित देश के शीर्ष मनोरोग संस्थान राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) को ‘ब्रिक्स मानसिक स्वास्थ्य नेटवर्क’ (BRICS Network of Centres of Excellence in Mental Health) का प्रमुख समन्वय केंद्र (Nodal Coordinating Body) बनाया गया है। सितंबर 2026 में औपचारिक रूप से गति पकड़ने वाली इस परियोजना के तहत निमहंस (NIMHANS) बहु-राष्ट्रीय संचालन समितियों (Multi-Country Steering Committees) और तकनीकी कार्य समूहों का मार्गदर्शन कर रहा है।
ग्लोबल साउथ (Global South) के ब्रिक्स देशों में एक बड़ी चुनौती यह रही है कि विशेषज्ञ मनोरोग चिकित्सा सुविधाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित हैं, जबकि सबसे अधिक प्रभावित और वंचित आबादी ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में रहती है। सामाजिक कलंक (Stigma) और जागरूकता की कमी के कारण लगभग 85 प्रतिशत मानसिक रोगियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इस विशाल ‘ट्रीटमेंट गैप’ को भरने के लिए चंडीगढ़ में आयोजित ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में ‘ब्रिक्स मेंटल वेलनेस सेंटर्स’ की स्थापना को हरी झंडी दी गई थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) के स्तर पर मनोरोग पहचान, आत्महत्या रोकथाम और त्वरित संकट प्रबंधन (Crisis Intervention) के लिए साझा रणनीतियां बनाना है।
1. सांस्कृतिक रूप से अनुकूलित उपकरण: कॉमिक्स से लेकर 24×7 हेल्पलाइन तक
इस नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रत्येक देश की सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य मॉडल तैयार कर रहा है:
- चीन में ‘मांगा’ (Manga) कॉमिक्स: चीन में किशोरों और युवाओं के बीच मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए लोकप्रिय ‘मांगा’ कॉमिक्स और डिजिटल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है।
- इंडोनेशिया में 24×7 डिजिटल संकट सहायता: इंडोनेशिया में चौबीसों घंटे चालू रहने वाली डिजिटल संकट निवारण हेल्पलाइन और कम्युनिटी-बेस्ड सपोर्ट नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
- भारत व रूस में एआई और तकनीक-आधारित देखभाल: भारत के सफल ‘टेली-मानस’ (Tele-MANAS) मॉडल, गेटकीपर ट्रेनिंग (Gatekeeper Training) और रूस के टेक्नोलॉजी-असिस्टेड केयर सिस्टम को ब्रिक्स देशों में लागू करने के लिए साझा खाका (Blueprint) तैयार किया जा रहा है।
2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आत्महत्या रोकथाम पर संयुक्त शोध
निमहंस (NIMHANS) के मार्गदर्शन में ब्रिक्स देश मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का एकीकरण कर रहे हैं:
- AI-असिस्टेड स्क्रीनिंग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एल्गोरिदम और डिजिटल ऐप्स के जरिए डिप्रेशन और आत्महत्या के शुरुआती लक्षणों की पहचान की जाएगी।
- गेटकीपर ट्रेनिंग प्रोजेक्ट: प्राथमिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्थानीय स्वयंसेवकों को ‘गेटकीपर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे समुदाय में मानसिक रूप से व्यथित व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें तुरंत चिकित्सा केंद्र तक पहुंचा सकें।
- डाटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा: बहु-राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य डाटा के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए ब्रिक्स देश साइबर सुरक्षा और डाटा प्राइवेसी के लिए साझा नियम (Common Rules of the Road) बना रहे हैं।
3. प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली और ग्रामीण आबादी पर विशेष जोर
इस वैश्विक नेटवर्क का सीधा लाभ आम नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा:
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) का सशक्तीकरण: सामान्य डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मानसिक रोगों के प्राथमिक उपचार और परामर्श के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
- साझा क्लीनिकल प्रोटोकॉल: ब्रिक्स देशों के सर्वश्रेष्ठ मनोरोग विशेषज्ञों के अनुभव को मिलाकर एक ‘क्लीनिकल कंपेंडियम’ (Clinical Compendium) तैयार किया जा रहा है, जिससे कम आय वाले परिवारों को भी किफायती इलाज मिल सकेगा।
- नीतिगत संवाद और साझा मंच: यह नेटवर्क शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और चिकित्सकों को एक ऐसा मंच प्रदान करेगा जहां वे सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का आदान-प्रदान कर सकेंगे।
निष्कर्ष
भारत का ‘ब्रिक्स मानसिक स्वास्थ्य नेटवर्क’ केवल एक चिकित्सा अभियान नहीं है, बल्कि यह सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) की दिशा में एक मानवीय क्रांति है। बंगलुरु के NIMHANS के नेतृत्व में यह पहल न केवल मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को मिटाने का काम करेगी, बल्कि एआई तकनीक और मानवीय करुणा के समावेश से लाखों अनमोल जिंदगियों को आत्महत्या के मुहाने से वापस खींचने में मदद करेगी।


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