ग्रामीण और शहरी भारत के पर्यटन रुझानों में बढ़ा अंतर: NSO के ‘घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण 2025–26’ में बड़ा खुलासा

शहरी नागरिक छुट्टियों और मनोरंजन के लिए बढ़ा रहे हैं यात्राएं, जबकि ग्रामीण भारत की यात्राएं तीर्थयात्रा और महंगे इलाज तक सीमित; मेडिकल यात्रा पर सबसे अधिक खर्च।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर के तहत ‘घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण 2025–26’ (DTES) की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच देश भर के 2,46,113 परिवारों पर किए गए इस व्यापक सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारतीय नागरिकों की घरेलू यात्राओं में धार्मिक आस्था (तीर्थयात्रा) और स्वास्थ्य (इलाज) का बोलबाला है। इसके साथ ही सर्वेक्षण ने ग्रामीण और शहरी परिवारों के बीच पर्यटन व्यय और यात्रा के उद्देश्यों में एक स्पष्ट विभाजन को भी उजागर किया है।

दशक भर बाद जारी इस सर्वेक्षण (पिछला सर्वेक्षण 2014-15 में हुआ था) के अनुसार, पिछले 365 दिनों के दौरान की गई सभी रात की घरेलू यात्राओं (Overnight Trips) में से लगभग 48 प्रतिशत यात्राएं तीर्थयात्रा व धार्मिक उद्देश्यों के लिए की गईं, जबकि 30 प्रतिशत यात्राएं स्वास्थ्य व इलाज के लिए हुईं। हालांकि, जब यात्रा के कारणों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया, तो सामने आया कि शहरी परिवार पहले से अधिक छुट्टियां (Leisure & Holidaying) मना रहे हैं, जबकि ग्रामीण परिवारों में मनोरंजन यात्राओं की संख्या घटी है और उनका अधिकांश यात्रा बजट इलाज व धार्मिक आयोजनों में खर्च हो रहा है।

1. ग्रामीण बनाम शहरी: छुट्टियों की यात्राओं में बढ़ता फासला

सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि जीवन स्तर और विवेकाधीन आय (Discretionary Income) में अंतर के कारण ग्रामीण और शहरी परिवारों की यात्रा प्राथमिकताओं में भिन्नता आई है:

  • ग्रामीण परिवारों में गिरावट: कम से कम एक ओवरनाइट ट्रिप करने वाले ग्रामीण परिवारों का प्रतिशत 2014-15 के 36.6% से घटकर 2025–26 में 35.2% रह गया है। प्रति 100 ग्रामीण परिवारों पर छुट्टियों/मनोरंजन के लिए की जाने वाली ओवरनाइट यात्राओं की संख्या 5 से घटकर 4 रह गई है।
  • शहरी परिवारों में बढ़ोतरी: इसके विपरीत, कम से कम एक ओवरनाइट ट्रिप करने वाले शहरी परिवारों का दायरा 35.7% से बढ़कर 37.7% हो गया है। प्रति 100 शहरी परिवारों पर मनोरंजन यात्राओं की संख्या 12.7 से बढ़कर 13.5 हो गई है।
  • यात्रा के प्राथमिक कारण: ग्रामीण क्षेत्रों में रात की यात्राओं का दूसरा सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य और इलाज (38.4%) रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में दूसरा सबसे बड़ा कारण छुट्टियां और मनोरंजन (36.4%) दर्ज किया गया।

 

2. इलाज की यात्राएं सबसे महंगी, यूपी और तमिलनाडु शीर्ष गंतव्य

सर्वेक्षण में घरेलू यात्रियों द्वारा किए जाने वाले खर्च और सबसे पसंदीदा राज्यों का ब्योरा भी दिया गया है:

  • मेडिकल यात्रा पर सर्वाधिक खर्च: पिछले 365 दिनों की ओवरनाइट यात्राओं में स्वास्थ्य व इलाज के लिए की गई यात्राएं सबसे महंगी साबित हुईं, जहां प्रति यात्रा औसतन ₹32,167 का खर्च आया। ग्रामीण परिवारों ने मेडिकल ट्रिप पर औसतन ₹29,454 और शहरी परिवारों ने ₹41,649 खर्च किए।
  • बिजनेस ट्रिप का खर्च: पिछले 30 दिनों के दौरान की गई यात्राओं में बिजनेस ट्रिप पर प्रति परिवार औसतन ₹5,949 का सर्वाधिक खर्च देखा गया।
  • शीर्ष गंतव्य राज्य: रात की यात्राओं के लिए पर्यटकों का सबसे पसंदीदा गंतव्य उत्तर प्रदेश (15.7%) रहा, इसके बाद तमिलनाडु (13.4%) और राजस्थान (8.0%) का स्थान रहा। वहीं, एक दिवसीय (Same-day) यात्राओं में 65.1% ग्रामीण और 46.2% शहरी परिवारों ने भाग लिया, जिसमें सबसे ज्यादा खर्च खरीदारी (Shopping) पर हुआ।

निष्कर्ष 

NSO का ‘घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण 2025–26’ यह दर्शाता है कि भारत में घरेलू पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मुख्य रूप से आस्था और अनिवार्य स्वास्थ्य आवश्यकताओं से संचालित होता है। नीति निर्माताओं के लिए यह रिपोर्ट एक आंख खोलने वाली है—जहाँ एक तरफ तटीय व पहाड़ी राज्यों को मनोरंजक पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है, वहीं ग्रामीण इलाकों में स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को इलाज के लिए दूरदराज के राज्यों में महंगा सफर न करना पड़े।

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By Kanchan

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