नंदीग्राम उपचुनाव 2026: 6 अक्टूबर को वोटिंग, जानें कब आएगा नतीजा और कौन-कौन हैं मैदान में?

 

 

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर नंदीग्राम विधानसभा सीट चर्चा के केंद्र में है। चुनाव आयोग ने नंदीग्राम समेत बंगाल की रेजीनगर सीट पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया है, और अब सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार भी मैदान में उतार दिए हैं। यह उपचुनाव इस साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और फिर से एकजुट होने में जुटे टीएमसी विपक्ष, दोनों के लिए पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

नंदीग्राम सीट खाली क्यों हुई

इस साल की शुरुआत में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दो सीटों — नंदीग्राम और कोलकाता की भवानीपुर — से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया, जिसमें उन्हें 73,917 वोट मिले जबकि ममता बनर्जी के खाते में 58,812 वोट आए। दोनों सीटों पर जीत के बाद नियमानुसार एक विधायक को एक सीट छोड़नी पड़ती है। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया और नंदीग्राम विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराने की नौबत आई।

नंदीग्राम उपचुनाव 2026

वोटिंग और नतीजे की तारीख

चुनाव आयोग के अनुसार नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर 2026 को की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर तय की गई है, जबकि उम्मीदवार 19 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। पूरी चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर तक समाप्त कर ली जाएगी। गौरतलब है कि इसी दिन असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी की कुछ अन्य सीटों पर भी उपचुनाव कराए जा रहे हैं।

किस पार्टी से कौन उम्मीदवार

नंदीग्राम सीट पर इस बार मुकाबला बहुकोणीय होने वाला है। भाजपा ने यहां से दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हसिरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रह चुके थे, जिनकी मई 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान हत्या कर दी गई थी। पार्टी के इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान (डे) को टिकट दिया है। पार्टी ने बताया कि यह फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में लिया गया है। कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया है और यहां से मिलन प्रधान को चुनावी मैदान में भेजा है। वहीं वामदलों की तरफ से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शांति गोपाल गिरि को नंदीग्राम से प्रत्याशी बनाया है। गिरि इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में भी वामदल के टिकट पर नंदीग्राम से मैदान में उतरे थे, जहां उन्हें शुभेंदु अधिकारी के 1,27,301 वोटों के मुकाबले महज 2,997 वोट मिले थे।

नंदीग्राम की सियासी अहमियत

नंदीग्राम सीट पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे चर्चित सीटों में गिनी जाती रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार यहां जीत दर्ज की थी, जब शुभेंदु अधिकारी ने खुद ममता बनर्जी को हराया था। तब से यह सीट भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सियासी जंग का प्रतीक बन चुकी है। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से देखें तो 2016 में यहां कुल 2,31,866 मतदाता थे, जो 2019 में बढ़कर 2,46,434 और 2021 में 2,57,992 हो गए थे।

आगे क्या?

उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद अब सभी दलों के प्रचार अभियान में तेजी आने की उम्मीद है। स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य की व्यापक राजनीतिक परिस्थितियां भी इस उपचुनाव की बहस का हिस्सा बन सकती हैं। हालांकि चुनावी मैदान की पूरी तस्वीर नामांकन वापसी की समयसीमा यानी 19 सितंबर के बाद ही पूरी तरह साफ होगी। बंगाल की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखने वालों की निगाहें अब 6 अक्टूबर के मतदान और 9 अक्टूबर के नतीजों पर टिकी रहेंगी।

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By Kanchan

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