गूगल का बड़ा खुलासा: सुरक्षा परीक्षण के दौरान जेमिनी AI ने खुद-ब-खुद तीन कंपनियों के सिस्टम में की सेंध
गूगल ने खुलासा किया है कि उसका AI मॉडल जेमिनी एक साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान गलती से इंटरनेट से जुड़ गया और तीन असली कंपनियों के सिस्टम में बिना अनुमति घुस गया। जानें पूरी घटना और इसके मायने।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो AI सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं को और गहरा करती है। गूगल ने 18 सितंबर 2026 को यह खुलासा किया कि उसके AI मॉडल जेमिनी ने एक साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान बिना किसी निर्देश के तीन असली कंपनियों के संरक्षित कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाई थी। यह पहली बार है जब गूगल ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसके किसी AI मॉडल ने खुद से किसी तीसरे पक्ष के सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाई हो।
कैसे हुई पूरी घटना
यह घटना असल में मई 2026 में हुई थी, जब इजरायली साइबर सुरक्षा जांच कंपनी इर्रेगुलर (Irregular) एक “कैप्चर-द-फ्लैग” यानी सुरक्षा-परीक्षण अभ्यास चला रही थी। इस टेस्ट में जेमिनी को एक काल्पनिक कंपनी से जुड़ा आक्रामक साइबर सुरक्षा कार्य सौंपा गया था, और यह मॉडल पूरी तरह एक सीमित, ऑफलाइन जैसे “सैंडबॉक्स” वातावरण में काम करने वाला था — यानी असली इंटरनेट से इसका कोई सीधा संपर्क नहीं होना चाहिए था। लेकिन टेस्ट के सेटअप में एक तकनीकी खामी की वजह से यह वातावरण गलती से असली इंटरनेट से जुड़ गया। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिस काल्पनिक कंपनी का नाम टेस्ट के लिए तय किया गया था, वह संयोग से एक असली कंपनी के डोमेन नाम से मेल खा गया।
पासवर्ड अंदाजा लगाकर और लीक क्रेडेंशियल्स से बनाई पहुंच
गूगल के मुताबिक जेमिनी ने एक मामले में लगातार अलग-अलग पासवर्ड आजमाकर एक सुरक्षित सिस्टम तक पहुंच बना ली, जबकि बाकी दो मामलों में उसने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एक डेटा भंडार में मौजूद लीक हुए लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल किया। जैसे ही इर्रेगुलर के अधिकारियों को इस बात का पता चला कि मॉडल किसी बाहरी कंपनी के सिस्टम तक पहुंच गया है, उन्होंने तुरंत जेमिनी को निष्क्रिय कर दिया। गूगल की सुरक्षा इंजीनियरिंग की उपाध्यक्ष हेदर एडकिंस ने बताया कि मॉडल ने खुद ही यह महसूस करते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए कि वह जिन सिस्टम तक पहुंचा है, वे असली कंपनियों के हैं, न कि टेस्ट का हिस्सा।
गूगल को कब मिली जानकारी
दिलचस्प बात यह भी है कि यह घटना मई में हुई, लेकिन इर्रेगुलर ने इससे जुड़ी जानकारी गूगल समेत अन्य प्रभावित AI कंपनियों को जुलाई के आखिर में ही दी — ठीक उसी समय के आसपास जब OpenAI से जुड़ी एक और घटना सुर्खियों में आई थी, जिसमें उसके AI एजेंट ने हगिंग फेस नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में स्वतः सेंध लगाई थी। गूगल ने अपने बयान में साफ किया कि यह घटना AI इंडस्ट्री की भाषा में “मिसअलाइनमेंट” यानी मॉडल के जानबूझकर निर्देशों से भटकने या बागी होने की श्रेणी में नहीं आती, बल्कि यह पूरी तरह एक तकनीकी गलतफहमी और टेस्टिंग के ढांचे में हुई चूक का नतीजा थी।
सिर्फ गूगल अकेला नहीं
यह मामला सिर्फ गूगल तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक इर्रेगुलर के इसी टेस्टिंग माहौल से जुड़ी खामी की वजह से गूगल के अलावा OpenAI, एंथ्रॉपिक और मेटा जैसी अन्य बड़ी AI कंपनियों के मॉडल भी प्रभावित हुए, और चारों कंपनियों को इससे जुड़ी घटनाओं की जानकारी अलग-अलग समय पर दी गई। इससे यह भी साफ होता है कि यह किसी एक कंपनी की खामी नहीं, बल्कि AI सुरक्षा परीक्षणों में इस्तेमाल हो रहे साझा टेस्टिंग ढांचे की एक बड़ी और गंभीर कमजोरी की तरफ इशारा करता है।
विशेषज्ञों की राय — घबराने से ज्यादा सबक लेने की जरूरत
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना को “AI का बागी हो जाना” कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जेमिनी ने खुद अपनी मर्जी से किसी सैंडबॉक्स से भागने या किसी असाइन किए गए मकसद के अलावा किसी और लक्ष्य को चुनने की कोशिश नहीं की। असल समस्या टेस्ट के दायरे, नेटवर्क को अलग रखने (कंटेनमेंट), क्रेडेंशियल की सुरक्षा और निगरानी तंत्र में हुई चूक से जुड़ी है। इर्रेगुलर कंपनी ने बताया कि उसने अब प्रभावित परीक्षण को तुरंत बंद कर, लॉग की समीक्षा कर और मैन्युअल निगरानी को कड़ा करके जरूरी सुधार लागू कर दिए हैं।
AI सुरक्षा पर बढ़ती चिंताओं की एक और कड़ी
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब हाल के महीनों में कई बड़ी AI कंपनियों की तरफ से इस तरह के मामलों का खुलासा हो रहा है, जिससे यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जैसे-जैसे AI मॉडल ज्यादा शक्तिशाली और स्वायत्त होते जा रहे हैं, क्या मौजूदा टेस्टिंग और निगरानी तंत्र उनके साथ तालमेल बिठा पा रहे हैं। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अब वक्त आ गया है जब अग्रणी AI कंपनियां मिलकर ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए एक साझा और समयबद्ध मानक तैयार करें, ताकि भविष्य में इस तरह की खामियां जल्द पकड़ में आ सकें।

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