अपाचे हेलीकॉप्टर: भारतीय सेना की ताकत में इजाफा, जानें ताज़ा घटनाक्रम और खासियतें

अमेरिका से मिले अत्याधुनिक अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर भारतीय सेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में इनकी तैनाती, अमेरिका के साथ हुए नए रक्षा समझौतों और संयुक्त युद्धाभ्यास में इनकी भागीदारी ने इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पश्चिमी मोर्चे पर इनकी मौजूदगी सैन्य विशेषज्ञों के लिए खासतौर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

अपाचे हेलीकॉप्टर

भारतीय सेना को कैसे मिले अपाचे हेलीकॉप्टर?

गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना पहले से ही अपाचे हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है। सितंबर 2015 में अमेरिकी सरकार और बोइंग के साथ हुए एक बड़े समझौते के तहत वायुसेना के लिए 22 अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टरों की खरीद की गई थी। इसके बाद सरकार ने फैसला किया कि आगे की खरीद थलसेना के लिए की जाएगी, और इसी क्रम में थलसेना के लिए छह अपाचे हेलीकॉप्टरों का अलग सौदा हुआ।

जुलाई 2025 में थलसेना को इनमें से पहले तीन अपाचे हेलीकॉप्टर मिले, जो हिंडन एयरबेस पहुंचे। इसके कुछ महीने बाद दिसंबर 2025 में बोइंग ने बाकी तीन हेलीकॉप्टर भी सौंप दिए, जिससे थलसेना को कुल छह अपाचे हेलीकॉप्टरों की पूरी खेप मिल गई। इन सभी हेलीकॉप्टरों को राजस्थान के जोधपुर में तैनात किया गया है, जहां सेना एविएशन कोर की एक स्क्वाड्रन पहले से मौजूद है। पश्चिमी सीमा पर इनकी तैनाती से भारतीय सेना की मारक क्षमता और युद्धक्षेत्र में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अपाचे की खासियतें

अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर को अक्सर “आसमान में उड़ता टैंक” कहा जाता है। यह हेलीकॉप्टर उन्नत एविओनिक्स, अगली पीढ़ी के डिफेंसिव सिस्टम और 30 मिलीमीटर की चेन गन से लैस है। इसमें हेलफायर लॉन्गबो एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, स्टिंगर एयर-टू-एयर मिसाइल, 70 मिलीमीटर की हाइड्रा रॉकेट और स्वचालित तोपें लगी हैं। हेलीकॉप्टर में 360 डिग्री कवरेज देने वाला फायर कंट्रोल रडार, नोज़ माउंटेड सेंसर सूट और नाइट विजन क्षमता भी दी गई है, जिससे यह हर मौसम में और रात के समय भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।

अमेरिका के साथ नया रक्षा सहयोग

इस साल जून 2026 में अमेरिका ने भारत के लिए एक बड़े रक्षा सहायता पैकेज को मंजूरी दी, जिसकी कीमत करीब 482.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,555 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पैकेज के तहत भारत के अपाचे हेलीकॉप्टरों और एम777ए2 होवित्जर तोपों के लिए दीर्घकालिक तकनीकी सहायता सेवाएं दी जाएंगी। किसी भी लड़ाकू हेलीकॉप्टर की असली ताकत सिर्फ उसके हथियारों से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कितने हेलीकॉप्टर किसी भी समय उड़ान भरने की स्थिति में मौजूद हैं। इंजन, रोटर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण, सेंसर और फायर कंट्रोल सिस्टम जैसे जटिल पुर्जों में तकनीकी खराबी आने पर उड़ान से पहले जांच जरूरी होती है, और जरूरी स्पेयर पार्ट्स समय पर न मिलने पर हेलीकॉप्टर लंबे समय तक ग्राउंडेड रह सकते हैं। यही वजह है कि यह नया सहायता समझौता अपाचे बेड़े की परिचालन तैयारी बनाए रखने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

युद्ध अभ्यास में पहली बार शामिल हुए अपाचे

भारत और अमेरिका के बीच होने वाले सालाना संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास के 22वें संस्करण में इस बार पहली बार अपाचे हेलीकॉप्टरों को शामिल किया गया है। सितंबर के पहले हफ्ते में शुरू हुए इस तीन हफ्ते के अभ्यास में करीब 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें दोनों देशों के करीब 350-350 सैनिक शामिल हैं। इस अभ्यास का एक चरण राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हो रहा है, जो देश के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में गिना जाता है। यहां सैनिक लाइव-फायर अभ्यास, मशीनीकृत अभियान और तोपखाने-हवाई सहयोग से जुड़ी ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं, ताकि रेगिस्तानी इलाके में पारंपरिक युद्ध जैसी स्थितियों का अभ्यास किया जा सके। अपाचे हेलीकॉप्टरों और अन्य उन्नत प्लेटफॉर्म को शामिल करने से सटीक हमले, युद्धक्षेत्र में सहयोग और हवाई-जमीनी समन्वय के प्रशिक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आगे की राह

थलसेना लंबे समय से 11 और अपाचे हेलीकॉप्टरों की मांग करती रही है, हालांकि रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेनाओं के लिए जरूरी बख्तरबंद हेलीकॉप्टरों की संख्या को लेकर एक अलग अध्ययन का आदेश दिया था। इसके साथ ही सेना स्वदेशी प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर को भी अपने बेड़े में शामिल कर रही है, और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या 90 तक ले जाने की योजना है। कुल मिलाकर, अमेरिका से मिला तकनीकी सहयोग और युद्धाभ्यासों में बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि अपाचे हेलीकॉप्टर आने वाले समय में भारतीय सेना की हवाई ताकत का एक अहम स्तंभ बने रहेंगे।

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By Kanchan

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