UPI MDR : UPI पर नए Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राहुल गांधी ने इसे “UPI Tax” बताते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है।

 

UPI MDR : BJP की ओर से कहा गया है कि संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने UPI के लिए एक टियर-बेस्ड MDR/रेवेन्यू फ्रेमवर्क की सिफारिश की थी। समिति ने इस व्यवस्था को जल्द नोटिफाई और लागू करने की जरूरत बताई थी।

BJP ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल गांधी के मौजूदा विरोध पर सवाल उठाया है। पार्टी के मुताबिक समिति में कांग्रेस के कई सांसद शामिल थे और 12 अगस्त को रिपोर्ट को अपनाए जाने के समय ये सांसद मौजूद थे। प्रकाशित मिनट्स में किसी असहमति का रिकॉर्ड नहीं होने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि समिति की सिफारिश और सरकार द्वारा लागू किया गया मौजूदा MDR ढांचा एक ही चीज नहीं हैं। समिति ने UPI की वित्तीय स्थिरता के लिए रेवेन्यू मॉडल की जरूरत बताई थी, जबकि मौजूदा व्यवस्था को लेकर विपक्ष की आपत्ति उसके लागू होने के तरीके और संभावित प्रभाव को लेकर है।

समिति में कौन-कौन से कांग्रेस सांसद थे?

वित्त मामलों की स्थायी समिति में कांग्रेस के पांच सांसद शामिल थे। इनमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ के नाम सामने आए हैं।

समिति ने UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में सरकार की ओर से दिए जा रहे बजटीय समर्थन और पूरे सिस्टम की अनुमानित परिचालन लागत के बीच अंतर का भी उल्लेख किया गया था।

समिति का तर्क था कि UPI जैसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को लंबे समय तक केवल सरकारी सहायता पर निर्भर रखने के बजाय एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है।

UPI के लिए MDR की सिफारिश क्यों की गई?

संसदीय समिति ने UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े खर्चों को भी महत्वपूर्ण माना। रिपोर्ट में साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन, तकनीकी ढांचे और नेटवर्क में लगातार निवेश की जरूरत पर जोर दिया गया।

समिति ने एक टियर-बेस्ड MDR या रेवेन्यू मॉडल की बात की, जिससे अलग-अलग तरह के लेनदेन और कारोबारियों के हिसाब से शुल्क या प्रोत्साहन की व्यवस्था की जा सके। सरकार की ओर से भी समिति को बताया गया था कि UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता के लिए हाई-थ्रेशोल्ड ट्रांजैक्शन या मर्चेंट्स पर MDR बहाल करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

अभी UPI पर क्या बदला है?

मौजूदा नए ढांचे के तहत कुछ ₹2,000 से अधिक के merchant UPI transactions पर 0.4% MDR लागू किया जाना है। हालांकि सरकार का कहना है कि MDR सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है और सामान्य यूजर्स पर इसका सीधा शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

इसका मतलब यह है कि ग्राहक द्वारा किसी व्यापारी को UPI से भुगतान करने और व्यापारी से संबंधित MDR लगने के बीच अंतर है। MDR मुख्य रूप से भुगतान स्वीकार करने वाले merchant-side ecosystem से जुड़ा शुल्क है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को नए UPI शुल्क ढांचे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने इसे “UPI Tax” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे वापस लेने की मांग की।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपने वीडियो संदेश में सरकार पर अमेरिकी दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। उन्होंने इस मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी संदर्भ दिया।

राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्र सरकार ने कहा है कि UPI नीति से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं और विदेशी दबाव के कारण निर्णय लेने का दावा सही नहीं है।

UPI MDR पर अलग-अलग तर्क

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं। सरकार और MDR के समर्थक पक्ष का कहना है कि UPI इकोसिस्टम के बढ़ते खर्च और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल जरूरी है।

वहीं विपक्ष का तर्क है कि नए शुल्क से डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल और छोटे कारोबारियों पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने खास तौर पर इसे “UPI Tax” के रूप में पेश करते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है।

 

क्यों बढ़ा विवाद?

BJP अब कांग्रेस की मौजूदा आपत्ति की तुलना संसदीय समिति की अगस्त में पेश रिपोर्ट से कर रही है। BJP का कहना है कि कांग्रेस सांसदों वाली समिति ने ही UPI के लिए रेवेन्यू फ्रेमवर्क की जरूरत बताई थी।

दूसरी ओर, राहुल गांधी और कांग्रेस मौजूदा MDR व्यवस्था के खिलाफ हैं। ऐसे में विवाद का मुख्य बिंदु यह बन गया है कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए रेवेन्यू मॉडल की जरूरत और मौजूदा MDR व्यवस्था के स्वरूप को किस तरह देखा जाए।

 

द्वारा admin

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