PM Modi Medicinal Plants: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के अलग-अलग एपिसोड में देश के विभिन्न हिस्सों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों और उन्हें संरक्षित करने वाले लोगों का जिक्र किया है। इनमें मोरिंगा, शतावरी, सर्पगंधा, भृंगराज, काली हल्दी और कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां शामिल हैं।

PM Modi Medicinal Plants: देश के पारंपरिक पौधों पर PM Modi का जोर, भारत में सदियों से कई पौधों और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समय-समय पर ‘मन की बात’ में ऐसे पौधों, किसानों और वैद्य परंपरा से जुड़े लोगों का उल्लेख करते रहे हैं।

2021 के एक Mann Ki Baat एपिसोड में पीएम मोदी ने ओडिशा के पटायत साहू का उदाहरण देते हुए बताया था कि उन्होंने बड़ी संख्या में औषधीय पौधों को उगाने और उनका दस्तावेजीकरण करने का काम किया है। पीएम ने औषधीय पौधों के संरक्षण और उनसे जुड़े स्थानीय ज्ञान को आगे बढ़ाने की बात भी कही थी।

इसी तरह 2021 में मध्य प्रदेश के सतना के रामलोटन कुशवाहा का जिक्र करते हुए पीएम ने उनके फार्म पर तैयार किए गए देशी पौधों के संग्रह और औषधीय पौधों के संरक्षण की सराहना की थी।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन पौधों का पारंपरिक रूप से किस तरह इस्तेमाल किया जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. मोरिंगा यानी सहजन: पोषक तत्वों से भरपूर पौधा

मोरिंगा, जिसे हिंदी में सहजन कहा जाता है, भारत में आमतौर पर सब्जी और पारंपरिक खान-पान का हिस्सा रहा है। इसकी फली के अलावा पत्तियों का भी इस्तेमाल भोजन में किया जाता है।

पीएम मोदी ने कोविड काल के दौरान अपनी डाइट का जिक्र करते हुए बताया था कि वह मोरिंगा के पत्तों का पराठा खाते हैं। इसके बाद मोरिंगा को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ी।

सहजन की पत्तियों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं और इन्हें दाल, सब्जी या दूसरे खाद्य पदार्थों में शामिल किया जा सकता है। हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए इसे दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

2. शतावरी: आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल

शतावरी आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख पौधों में शामिल है। भारत सरकार के आयुष से जुड़े दस्तावेजों में भी शतावरी को औषधीय पौधों की सूची में शामिल किया गया है।

पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग में शतावरी को खासतौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य और सामान्य पोषण से जुड़ी तैयारियों में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इसके सेवन का तरीका और मात्रा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

3. सर्पगंधा: खास सावधानी वाला औषधीय पौधा

सर्पगंधा यानी Rauvolfia serpentina भी भारत की पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों में शामिल है। आयुष मंत्रालय के औषधीय पौधों से जुड़े संसाधनों में इसका उल्लेख मिलता है।

पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल रक्तचाप और मानसिक शांति से जुड़ी कुछ स्थितियों के लिए किया जाता रहा है। लेकिन सर्पगंधा को अपनी मर्जी से लेना सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। खासकर यदि कोई व्यक्ति पहले से ब्लड प्रेशर की दवा ले रहा है, तो डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूरी है।

4. अशोक: पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण

अशोक का पौधा भी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी छाल और अन्य हिस्सों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक तैयारियों में किया जाता रहा है।

विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ पारंपरिक आयुर्वेदिक तैयारियों में अशोक का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसे किसी बीमारी का सीधा इलाज मानकर खुद से सेवन करना उचित नहीं है।

5. भृंगराज: बालों और सिर की देखभाल से जुड़ा नाम

भृंगराज का नाम भारतीय घरेलू और आयुर्वेदिक परंपरा में अक्सर बालों की देखभाल के संदर्भ में लिया जाता है। इसका इस्तेमाल तेल और दूसरी पारंपरिक तैयारियों में किया जाता है।

भृंगराज से बने तेल का उपयोग सिर की त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। हालांकि बाल झड़ने या किसी स्कैल्प समस्या का कारण अलग-अलग हो सकता है। इसलिए लगातार समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

6. काली हल्दी और मुसली: दुर्लभ पौधों का भी हुआ जिक्र

मध्य प्रदेश के सतना के रामलोटन कुशवाहा के पौधों के संग्रह का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कई देशी और पारंपरिक पौधों के संरक्षण की बात कही थी। उनके फार्म पर अलग-अलग क्षेत्रों से लाए गए सैकड़ों पौधे और बीज संरक्षित किए गए थे।

इनमें काली हल्दी और मुसली जैसी वनस्पतियों का भी उल्लेख किया जाता है। काली हल्दी सामान्य पीली हल्दी से अलग होती है, जबकि सफेद और काली मुसली का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में अलग-अलग तैयारियों में किया जाता रहा है।

7. लकाडोंग हल्दी: मेघालय की खास पहचान

लकाडोंग हल्दी मेघालय की प्रसिद्ध हल्दी किस्मों में से एक है। इसे अपनी उच्च करक्यूमिन सामग्री के लिए जाना जाता है। करक्यूमिन हल्दी में पाया जाने वाला प्रमुख सक्रिय घटक है, जिस पर इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर शोध हुआ है।

हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हल्दी या करक्यूमिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज कर सकता है। हल्दी को भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी में डॉक्टर की निर्धारित चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

8. करुनेच्ची और Cat’s Whiskers जैसे दुर्लभ पौधे

2024 में Mann Ki Baat के एक एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के मदुरै की शिक्षिका सुभाश्री और उनके दुर्लभ औषधीय पौधों वाले हर्बल गार्डन का जिक्र किया था। पीएम के अनुसार, उनके गार्डन में 500 से ज्यादा दुर्लभ औषधीय पौधे थे।

ऐसे स्थानीय पौधों से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान कई पीढ़ियों से आगे बढ़ता रहा है। इनका संरक्षण न केवल पारंपरिक ज्ञान के लिए बल्कि जैव विविधता और शोध के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

क्या हर औषधीय पौधा सभी के लिए सुरक्षित है?

यह सबसे जरूरी सवाल है। किसी पौधे का पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होना यह साबित नहीं करता कि वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है। उम्र, दूसरी बीमारियां, गर्भावस्था, एलर्जी और पहले से चल रही दवाओं के कारण किसी जड़ी-बूटी का असर अलग हो सकता है।

खासकर सर्पगंधा जैसी औषधीय वनस्पतियों का सेवन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। आयुष मंत्रालय से जुड़े Patient Safety संसाधन भी आयुष इंटरवेंशन के दौरान संभावित प्रतिकूल प्रभावों पर चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पर जोर देते हैं।

घर में इस्तेमाल से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप मोरिंगा, हल्दी या किसी दूसरी हर्बल चीज को अपने भोजन में शामिल करना चाहते हैं तो पहले उसके सामान्य खाद्य उपयोग और औषधीय सेवन में अंतर समझें।

  • सामान्य खाद्य पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल और औषधीय मात्रा अलग हो सकती है।
  • किसी बीमारी की दवा को हर्बल पौधे के भरोसे बंद न करें।
  • गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग किसी औषधीय सप्लीमेंट का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से करें।
  • ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दूसरी नियमित दवाएं लेने वाले लोग विशेष सावधानी रखें।
  • बाजार से खरीदे गए हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता और स्रोत की जानकारी जरूर देखें।
PM Modi Medicinal Plants

भारत सरकार का National Medicinal Plants Board देश के औषधीय पौधों के संरक्षण, खेती, व्यापार और उनसे जुड़ी नीतियों के लिए काम करता है। सरकारी संसाधनों में मोरिंगा, सर्पगंधा और कई अन्य पौधों को औषधीय पौधों की सूची में दर्ज किया गया है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में औषधीय पौधे केवल घरेलू परंपरा का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनके संरक्षण और खेती से जुड़े संस्थागत प्रयास भी किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष

PM Modi Medicinal Plants के संदर्भ में देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में अलग-अलग मौकों पर औषधीय पौधों और उनके संरक्षण से जुड़े लोगों का उल्लेख किया है। मोरिंगा, शतावरी, सर्पगंधा, अशोक, भृंगराज, हल्दी और कई दुर्लभ पौधे भारतीय पारंपरिक चिकित्सा और स्थानीय ज्ञान का हिस्सा रहे हैं।

हालांकि किसी भी जड़ी-बूटी को किसी गंभीर बीमारी का निश्चित इलाज मानना सही नहीं है। खासकर औषधीय मात्रा में सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

द्वारा Priyanshi Chaturvedi