NSE IPO Listing: ₹22,569 करोड़ के IPO को मिला 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन, 24 सितंबर को BSE पर होगी लिस्टिंग
NSE IPO Listing: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के IPO के बाद अब शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग का इंतजार खत्म होने वाला है. NSE के शेयर 24 सितंबर 2026 को BSE पर लिस्ट होने वाले हैं. करीब ₹22,569 करोड़ का यह IPO निवेशकों के बीच चर्चा में रहा और अंतिम दिन तक इश्यू को करीब 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.
NSE IPO Listing की तारीख 24 सितंबर
NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसकी bidding बंद हुई. अब कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 24 सितंबर को होने वाली है. Reuters के अनुसार NSE IPO में कुल मांग 10 अरब डॉलर से ज्यादा रही और listing को लेकर बाजार में काफी चर्चा है.
यह IPO पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS था. इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाली रकम कंपनी को नए शेयर जारी करने के जरिए नहीं, बल्कि मौजूदा shareholders के शेयर बेचने से जुड़ी थी.
NSE IPO को मिला 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन
अंतिम दिन तक NSE के IPO को करीब 5.71 गुना subscription मिला. Economic Times के मुताबिक 88.6 million शेयरों के मुकाबले करीब 505.81 million शेयरों के लिए बोलियां आईं और कुल bid value ₹90,000 करोड़ से ऊपर चली गई.
Reuters के अनुसार institutional investors की हिस्सेदारी दूसरे दिन तक पूरी तरह subscribe हो चुकी थी. वहीं अंतिम subscription आंकड़ों ने दिखाया कि IPO में अलग-अलग investor categories की भागीदारी रही.
NSE IPO का प्राइस बैंड क्या था?
NSE ने IPO के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का price band तय किया था. ऊपरी price band के आधार पर कंपनी के IPO का कुल आकार करीब ₹22,569 करोड़ रहा.
IPO में एक बड़ा हिस्सा existing shareholders की हिस्सेदारी बेचने के लिए था. ऐसे में IPO से पहले से मौजूद shareholders को अपनी हिस्सेदारी को बाजार में monetise करने का मौका मिला.
NSE की बाजार में क्या भूमिका है?
National Stock Exchange भारत के प्रमुख stock exchanges में से एक है. NSE पर equity, derivatives और दूसरे financial instruments में बड़े पैमाने पर trading होती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके trading volumes और derivatives market में मौजूदगी को माना जाता है.
Financial Times के अनुसार NSE भारत के equity turnover में 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है और derivatives trading volume के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े exchanges में शामिल है.
हालांकि, NSE के business में derivatives का बड़ा योगदान होने के कारण regulatory changes भी कंपनी के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
NSE IPO में निवेशकों की नजर किन बातों पर?
NSE की listing के समय investors की नजर केवल listing price पर नहीं बल्कि कंपनी की future earnings, trading volumes और regulatory environment पर भी रहेगी.
NSE की revenue structure में transaction-related income की बड़ी भूमिका है. इसलिए trading volumes और market activity में बदलाव का असर कंपनी के financial performance पर पड़ सकता है.
वहीं derivatives trading से जुड़े regulatory बदलाव भी लंबे समय में exchange के कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए IPO के बाद NSE के financial results और business updates महत्वपूर्ण रहेंगे.
Listing के समय क्या होगा?
24 सितंबर को NSE के शेयर बाजार में कारोबार शुरू करेंगे. Listing price IPO price से ऊपर या नीचे हो सकती है और शुरुआती कारोबार में शेयर की कीमत में तेज बदलाव भी संभव है.
IPO का GMP एक unofficial market indicator होता है. इसलिए केवल GMP के आधार पर listing price का अनुमान लगाना निश्चित तरीका नहीं है. NSE की वास्तविक listing price stock exchange पर trading शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
NSE IPO क्यों बना बड़ा market event?
NSE का IPO लंबे समय से भारतीय capital market में चर्चा का विषय रहा है. कंपनी की listing से NSE पहली बार public markets में listed company के रूप में सामने आएगी. Reuters के अनुसार exchange की listing की दिशा में प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी और IPO ने इसे एक नए चरण में पहुंचाया है.
अब 24 सितंबर की listing के बाद NSE के शेयरों की market valuation, trading activity और quarterly financial performance पर बाजार की नजर रहेगी.
Summary
NSE IPO Listing 24 सितंबर 2026 को होने वाली है. करीब ₹22,569 करोड़ के IPO को अंतिम दिन 5.71 गुना subscription मिला और bids की कुल value ₹90,000 करोड़ से अधिक रही. NSE के शेयरों की listing के बाद निवेशकों की नजर valuation, trading volumes और regulatory developments पर रहेगी.

