NHAI New Toll Rule 2026: टोल प्लाजा पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां, चार लेन और उससे बड़े हाईवे पर लागू होगी नई व्यवस्था
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है। अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में गाड़ी रोककर टोल कटवाने की परेशानी धीरे-धीरे खत्म होने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देशभर में बाधा-मुक्त टोल वसूली व्यवस्था लागू करने की दिशा में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत चार लेन और उससे अधिक चौड़ाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के आगामी और निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में ऐसी तकनीक और बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे वाहन बिना रुके टोल प्लाजा पार कर सकेंगे।
NHAI ने 30 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में नीति परिपत्र जारी किया था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 नवंबर को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाली कतारों और प्रतीक्षा समय को कम करना, ईंधन की बचत करना तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
NHAI New Toll Rule 2026: क्या है मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम?
NHAI की नई व्यवस्था को मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम कहा जाता है। इसमें पारंपरिक टोल प्लाजा की तरह वाहनों को रोकने के लिए बैरियर नहीं लगाए जाएंगे। इसके बजाय सड़क के ऊपर विशेष ढांचे यानी गैन्ट्री पर आधुनिक कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जाएंगे।
इस प्रणाली में मुख्य रूप से दो तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
1. ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR): इस तकनीक में विशेष कैमरे चलते हुए वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़कर उनकी पहचान करेंगे।
2. रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID): इसके माध्यम से वाहन पर लगे फास्टैग (FASTag) की पहचान की जाएगी और उससे संबंधित टोल राशि काट ली जाएगी।
दोनों तकनीकों की मदद से वाहन की पहचान और टोल भुगतान की प्रक्रिया स्वचालित होगी। वाहन चालक को टोल भुगतान के लिए गाड़ी रोकने या नकद राशि देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
किन राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे नए दिशा-निर्देश?
NHAI के नए दिशा-निर्देश चार लेन और उससे अधिक चौड़ाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा के लिए हैं। इनका पालन आगामी और निर्माणाधीन परियोजनाओं में किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा के डिजाइन और लेन की संख्या को भी व्यवस्थित किया गया है। उपलब्ध दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग-अलग राजमार्गों के लिए टोल लेन की संख्या इस प्रकार निर्धारित की गई है:
| राजमार्ग की चौड़ाई | टोल प्लाजा की लेन |
|---|---|
| चार लेन | 8 |
| छह लेन | 10 |
| आठ लेन | 12 |
इनमें आपातकालीन स्थिति के लिए अतिरिक्त लेन भी शामिल हैं। इसके अलावा टोल प्लाजा पर प्रकाश व्यवस्था, दिशा बताने वाले संकेतक, सड़क सुरक्षा और निगरानी के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
FASTag नहीं हुआ तो क्या होगा?
बाधा-मुक्त टोलिंग व्यवस्था में फास्टैग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसलिए वाहन चालकों को अपने फास्टैग में पर्याप्त राशि रखने की सलाह दी गई है।
यदि किसी वाहन का फास्टैग निष्क्रिय है, उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है या वह काम नहीं कर रहा है, तो कैमरों और अन्य उपकरणों के माध्यम से वाहन की पहचान करके इलेक्ट्रॉनिक नोटिस (E-Notice) जारी किया जा सकता है।
नियमों के अनुसार, नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क जमा करना होगा। ऐसा नहीं करने पर संबंधित वाहन श्रेणी के सामान्य शुल्क से दोगुना भुगतान करना पड़ सकता है। लगातार भुगतान नहीं करने पर फास्टैग को ब्लैकलिस्ट करने और वाहन संबंधी सेवाओं पर प्रतिबंध जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
क्या सभी पुराने टोल प्लाजा पर तुरंत लागू होगा नियम?
यहां वाहन चालकों के लिए एक जरूरी बात समझना आवश्यक है। NHAI के नए दिशा-निर्देश जारी होने का मतलब यह नहीं है कि देश के सभी मौजूदा टोल प्लाजा पर अगले दिन से बैरियर हट जाएंगे।
फिलहाल यह व्यवस्था आगामी और निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए निर्धारित की गई है। जिन परियोजनाओं के निर्माण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो रही है, उनमें नए डिजाइन को शामिल किया जाएगा। पहले से स्वीकृत या निर्माणाधीन परियोजनाओं में संबंधित अनुबंध प्रावधानों के माध्यम से बदलाव किए जाएंगे।
गौरतलब है कि देश में इस तकनीक की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। गुजरात के सूरत-भरूच राष्ट्रीय राजमार्ग पर चोरयासी टोल प्लाजा और दिल्ली-जयपुर राजमार्ग पर दौलतपुरा टोल प्लाजा सहित कुछ स्थानों पर मल्टी लेन फ्री फ्लो प्रणाली शुरू की जा चुकी है।
नई नीति के जरिए NHAI अब इस व्यवस्था के लिए देशभर में एक समान बुनियादी ढांचा विकसित करना चाहता है। आने वाले समय में इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली कतारें कम होने, ईंधन की बचत होने और हाईवे पर यात्रा का समय घटने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ अलग-अलग राजमार्गों पर तकनीक लागू होने के बाद ही पूरी तरह दिखाई देगा।


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