Prathosh AP कौन हैं? IISc के प्रोफेसर ने बताया AI के दौर में IIT के छात्र क्यों पढ़ रहे हैं प्राचीन शास्त्र
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रथोष एपी (Prathosh AP) चर्चा में हैं। उन्होंने बताया है कि आईआईटी के कुछ विद्यार्थी आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत और प्राचीन भारतीय शास्त्रों का अध्ययन भी कर रहे हैं। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी और आर्थिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि तार्किक सोच, बौद्धिक क्षमता और जीवन को समझने की दृष्टि विकसित करना भी होना चाहिए।
उनका यह विचार ऐसे समय सामने आया है, जब AI के कारण शिक्षा, रोजगार और विश्वविद्यालयों की भविष्य की भूमिका पर बहस चल रही है। प्रथोष एपी का मानना है कि प्राचीन भारतीय दर्शन और आधुनिक तकनीक के बीच संवाद स्थापित करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार इस्तेमाल को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
Prathosh AP ने IIT के छात्रों को लेकर क्या कहा?
3 नवंबर 2026 को सामने आए एक वीडियो में प्रथोष एपी ने बताया कि आईआईटी के कुछ विद्यार्थी उनके मार्गदर्शन में शास्त्रों का अध्ययन कर रहे हैं। इनमें ऐसे विद्यार्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) में अच्छा प्रदर्शन किया है।
उन्होंने एक विद्यार्थी का उदाहरण देते हुए बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से उनके साथ न्यायशास्त्र का अध्ययन कर रहा है। विद्यार्थी ने उनसे कहा था कि वह उनके विचारों को गलत साबित करने के लिए भी लंबे समय तक अध्ययन करने को तैयार है। प्रथोष ने इस तरह के सवालों और असहमति का स्वागत किया।
उन्होंने चार्वाक दर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी अध्ययन और तर्क के आधार पर भौतिकवादी विचारधारा को भी स्वीकार करते हैं, तो इसमें कोई समस्या नहीं है। उनके लिए महत्वपूर्ण यह है कि विद्यार्थी किसी विचार को बिना जांचे स्वीकार करने के बजाय तर्क और विवेक के आधार पर उसका विश्लेषण करें।
AI और प्राचीन भारतीय शास्त्रों के बीच क्या है संबंध?
प्रथोष एपी के अनुसार, प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन केवल पुराने वैज्ञानिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इनका उद्देश्य मनुष्य की विचार क्षमता, तर्कशक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी को विकसित करना भी है।
उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के निर्माण में मानवीय कल्याण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उनका सवाल है कि यदि शक्तिशाली तकनीकी उपकरण ऐसे लोगों के हाथ में हों, जिन्हें धर्म और नैतिक जिम्मेदारी की समझ न हो, तो उनके परिणाम क्या हो सकते हैं?
उन्होंने न्यायशास्त्र, उपनिषद और भारतीय दर्शन की दूसरी परंपराओं के माध्यम से बौद्धिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास के महत्व को समझाया।
AI सीखने के लिए प्रथोष एपी ने दिया तीन सेमेस्टर का सुझाव
AI में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों को लेकर भी प्रथोष एपी ने अपनी राय रखी है। उनके अनुसार, केवल AI उपकरणों का इस्तेमाल करना और स्वयं AI तकनीक विकसित करना दोनों अलग-अलग बातें हैं।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को गहराई से समझने के लिए तीन सेमेस्टर की अध्ययन योजना सुझाई है:
- पहला सेमेस्टर: गणित की मजबूत बुनियाद तैयार करना।
- दूसरा सेमेस्टर: मशीन लर्निंग के मूल सिद्धांतों का अध्ययन करना।
- तीसरा सेमेस्टर: आधुनिक और उन्नत AI तकनीकों को समझना।
उनका मानना है कि AI के उपकरणों से काम करना अपेक्षाकृत आसान हुआ है, लेकिन नए एल्गोरिदम विकसित करने के लिए गणित, बुनियादी सिद्धांतों और गहन अध्ययन की आवश्यकता बनी रहेगी।
कौन हैं Prathosh AP? जानिए उनकी शिक्षा और करियर
प्रथोष एपी भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उनका शोध मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर केंद्रित है।
उनकी शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा के प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:
- 2011: बीटेक की पढ़ाई पूरी की।
- 2015: IISc बेंगलुरु से समय आधारित आंकड़ों के विश्लेषण के क्षेत्र में पीएचडी हासिल की।
- 2017: आईआईटी दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए।
- इसके बाद: चार वर्षों तक आईआईटी दिल्ली में अध्यापन और शोध किया।
- वर्तमान: IISc बेंगलुरु में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने अपने करियर में Xerox Research India और Philips Research जैसी संस्थाओं में भी काम किया है। स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण पर उनके औद्योगिक शोध से 15 अमेरिकी पेटेंट जुड़े हैं, जिनमें से 10 को मंजूरी मिली और छह का व्यावसायिक उपयोग हुआ है। वह Cogniable.Tech नामक स्टार्टअप के सह-संस्थापक भी हैं।
AI के दौर में शिक्षा का भविष्य क्या होगा?
प्रथोष एपी इससे पहले भी AI के कारण शिक्षा और रोजगार में होने वाले बदलावों पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। उनका मानना है कि जब मशीनें जानकारी याद रखने, लिखने, गणना करने और कई बौद्धिक कार्यों को तेजी से करने लगेंगी, तब शिक्षा संस्थानों को अपनी भूमिका पर दोबारा विचार करना होगा।
उनके अनुसार, भविष्य के विश्वविद्यालय केवल जानकारी देने वाले केंद्र नहीं होंगे, बल्कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, रचनात्मकता, संवाद और मानवीय संबंध विकसित करने के स्थान बन सकते हैं।
प्रथोष एपी के विचारों से यह बहस एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है कि AI के दौर में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या होना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीकी दक्षता के साथ तार्किक सोच, नैतिक समझ और मानवीय मूल्यों का विकास भी उतना ही आवश्यक है।


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