पद्मश्री न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का निधन, जगा-कालिया को अलग करने वाली ऐतिहासिक सर्जरी का किया था नेतृत्व

देश के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का निधन हो गया है। उन्होंने 2 नवंबर 2026 की शाम नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वह देश के जाने-माने मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के विशेषज्ञ थे। वर्ष 2017 में ओडिशा के सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों जग्गा और कालिया को अलग करने वाली जटिल सर्जरी में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन से चिकित्सा जगत और ओडिशा में शोक की लहर है।

डॉ. अशोक कुमार महापात्रा कौन थे?

डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का जन्म 29 दिसंबर 1952 को ओडिशा के पुरी में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1975 में एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज, बेरहामपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित एम्स से सर्जरी में एमएस और न्यूरोसर्जरी में एमसीएच की डिग्री हासिल की।

उन्होंने अपने चिकित्सा करियर में एम्स दिल्ली में लंबे समय तक सेवाएं दीं। यहां उन्होंने न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख, न्यूरोसाइंसेज सेंटर के प्रमुख और डीन (रिसर्च) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनकी विशेषज्ञता मस्तिष्क की जटिल सर्जरी, बाल न्यूरोसर्जरी और न्यूरो ट्रॉमा के क्षेत्र में थी।

जग्गा और कालिया की ऐतिहासिक सर्जरी में निभाई थी अहम भूमिका

डॉ. महापात्रा के करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में वर्ष 2017 में की गई जुड़वां बच्चों की सर्जरी शामिल है। ओडिशा के जग्गा और कालिया नाम के दोनों बच्चे सिर से जुड़े हुए पैदा हुए थे। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को क्रेनियोपेगस (Craniopagus) कहा जाता है।

एम्स दिल्ली में दोनों बच्चों को अलग करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक बड़ी टीम बनाई गई थी। इस जटिल अभियान का नेतृत्व डॉ. अशोक कुमार महापात्रा और डॉ. दीपक गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया था। यह सर्जरी दो चरणों में पूरी की गई। पहला चरण 28 अगस्त 2017 और अंतिम अलगाव की प्रक्रिया 25 अक्टूबर 2017 को हुई।

करीब 125 डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में हिस्सा लिया। दोनों बच्चों का सफलतापूर्वक अलग होना भारतीय चिकित्सा इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हुआ।

AIIMS भुवनेश्वर के पहले निदेशक भी रहे

डॉ. महापात्रा ने चिकित्सा सेवा के साथ संस्थानों के विकास में भी अहम योगदान दिया। वर्ष 2006 से 2009 तक उन्होंने लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के निदेशक के रूप में काम किया।

इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें AIIMS भुवनेश्वर का पहला निदेशक नियुक्त किया गया। उन्होंने संस्थान में चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग, स्नातकोत्तर और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वह बाद में सिक्शा ‘ओ’ अनुसंधान विश्वविद्यालय (SOA) के कुलपति भी रहे। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य विज्ञान के प्रमुख सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं।

2025 में मिला था पद्मश्री सम्मान

चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य सेवाओं में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था।

उनके आधिकारिक पद्म पुरस्कार परिचय के अनुसार, उन्होंने अपने करियर में लगभग 870 शोध पत्र प्रकाशित किए, 16 पुस्तकें लिखीं और 140 से अधिक पुस्तक अध्यायों में योगदान दिया।

उन्होंने कई शोध परियोजनाओं का संचालन भी किया और चिकित्सा क्षेत्र के अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने जताया शोक

डॉ. महापात्रा के निधन पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें देश का प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र की अग्रणी हस्ती बताया।

एम्स भुवनेश्वर ने भी अपने संस्थापक निदेशक के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्थान ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थान के निर्माण में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

डॉ. अशोक कुमार महापात्रा का निधन भारतीय चिकित्सा जगत के लिए बड़ी क्षति है। जटिल न्यूरोसर्जरी, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों के विकास में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों को प्रेरित करता रहेगा।

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By Kanchan

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