‘दबाव में है वैश्विक व्यवस्था’: 81वें यूएन सम्मेलन में एस. जयशंकर ने P4M समिट की सह-अध्यक्षता की, बहुपक्षवाद में तत्काल सुधार की उठाई मांग

न्यू यॉर्क में ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म’ (P4M) के उद्घाटन शिखर सम्मेलन को किया संबोधित; ‘4F’ संकट और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाने पर दिया जोर।

जयशंकर ने की पी4एम समिट की अध्यक्षता, कहा- वैश्विक व्यवस्था दबाव में, बहुपक्षीय सहयोग जरूरी - 81st Unga Updates India Jaishankar Partners For Multilateralism Summit European ...

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय 81वें सत्र (81st UNGA Session) के दौरान आयोजित ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (P4M) के पहले शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। 21 सितंबर 2026 को आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन की सह-अध्यक्षता यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा व केन्या के शीर्ष नेताओं ने संयुक्त रूप से की। भारत ने सम्मेलन में वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, अधिक जन-भागीदारी और वैश्विक संस्थानों में व्यापक सुधारों की पुरजोर वकालत की।

S Jaishankar UNGA 2026: 'वैश्विक संकटों से निपटने के लिए बहुपक्षवाद मजबूत करना जरूरी', बोले जयशंकर: सहयोग बढ़ाने पर हो जोर

बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों, वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा और चल रहे सैन्य संघर्षों के बीच बहुपक्षीय व्यवस्था (Multilateral System) पर अभूतपूर्व दबाव है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत और उसके साझेदार देशों ने P4M पहल का शुभारंभ किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यद्यपि पिछले कुछ दशकों में वैश्विक संतुलन (Global Rebalancing) एक स्वाभाविक प्रक्रिया रही है, लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्द्धा और संघर्षों ने इसे बेहद जटिल बना दिया है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मूल ढांचा ही कटघरे में खड़ा हो जाएगा।

 

1. ‘4F’ संकट और आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुरक्षा का आह्वान

विदेश मंत्री ने अपने भाषण में विकासशील और गरीब देशों के समक्ष उत्पन्न व्यावहारिक चुनौतियों को प्रमुखता से रेखांकित किया:

  • ‘4F’ संकट (Fuel, Food, Fertiliser & Finance): ईंधन (Fuel), भोजन (Food), उर्वरक (Fertiliser) और वित्त (Finance) के संकट को अनसुलझा नहीं छोड़ा जा सकता। इन पर त्वरित वैश्विक सहमति आवश्यक है।
  • सप्लाई चेन और डी-रिस्किंग: आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) में रुकावट और किसी एक देश के दबदबे (Chokepoint Dominance) के खतरों को कम करने के लिए विविधता (Diversification) और ‘डी-रिस्किंग’ को बढ़ावा देना होगा।
  • उभरती प्रौद्योगिकियां व एआई (Emerging Tech & AI): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नई प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम और ‘गार्डरेल्स’ (Guardrails) बनाने की आवश्यकता है।

Declaration of the Partners for Multilateralism (P4M) summit, 21 September 2026 - Consilium

2. पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और बहुपक्षवाद में सुधार (Reformed Multilateralism)

P4M घोषणापत्र (Joint Declaration) के माध्यम से प्रतिभागी देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई:

  • समावेशी संस्थाएं: जयशंकर ने कहा कि वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी देशों की सहभागिता होनी चाहिए, ताकि संस्थाएं अधिक न्यायसंगत, प्रतिनिधिमूलक और पारदर्शी बन सकें।
  • समान विचारधारा वाले देशों का एकजुट होना: जहां साझा हित और मजबूत कारण मौजूद हों, वहां समान विचारधारा वाले देशों को वैश्विक बेहतरी के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे आना चाहिए।

एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष - कॉन्सिलियम

निष्कर्ष 

यूएन में भारत द्वारा P4M पहल की सह-मेजबानी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संबोधन यह साबित करता है कि भारत केवल एक मूकदर्शक नहीं, बल्कि एक नए और निष्पक्ष वैश्विक दृष्टिकोण का नेतृत्वकर्ता है। ‘सुधारित बहुपक्षवाद’ (Reformed Multilateralism) के माध्यम से ही दुनिया में शांति, कानून का शासन और समावेशी समृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।

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By Kanchan

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