ज़हरीले सीवर में इंसानी प्रवेश का अंत: दिल्ली जल बोर्ड का ₹17,970 करोड़ का मेगा प्लान; 100% रोबोटिक सफाई और ‘वन ज़ोन, वन ऑपरेटर’ मॉडल से बदलेगी राजधानी की सूरत

11,212 किमी सीवर नेटवर्क और 6.68 लाख मैनहोल की कमान 8 ऑपरेटरों के हाथ; PEMSR एक्ट 2013 और ‘नमस्ते’ योजना के तहत सफाईकर्मियों का होगा सामाजिक व आर्थिक पुनर्वास।


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सीवर सफाई के दौरान होने वाले हादसों, ज़हरीली गैसों से मौतों और जलभराव की पुरानी समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने एक ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। 30 सितंबर 2026 को दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी के समूचे सीवर तंत्र के कायाकल्प के लिए ₹17,969.93 करोड़ के 10-वर्षीय ‘वन ज़ोन, वन ऑपरेटर’ (One Zone, One Operator) मास्टर प्लान को मंजूरी प्रदान की। इसके तहत पूरी दिल्ली को 8 प्रशासनिक ज़ोन में बांटकर 100% मैकेनिकल और रोबोटिक सीवर सफाई को अनिवार्य किया गया है, ताकि सीवर में इंसानी प्रवेश (Manual Scavenging) को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

दिल्ली जल बोर्ड का ऐतिहासिक फैसला, 17,970 करोड़ से होगा पानी और सीवर व्यवस्था का कायाकल्प - delhi jal board 17970 crore plan to revamp water and sewerage

दिल्ली जल बोर्ड वर्तमान में 68 विधानसभा क्षेत्रों में 11,212 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनों, 6.68 लाख मैनहोलों और 145 सीवर पंपिंग स्टेशनों का रखरखाव करता है। वैधानिक प्रतिबंधों (PEMSR एक्ट 2013) और केंद्र सरकार की ‘नमस्ते’ (NAMASTE – National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) योजना के बावजूद सीवर में इंसानी प्रवेश एक जानलेवा चुनौती बना हुआ था। जल बोर्ड का यह नया मॉडल शिकायतों के आधार पर होने वाली तात्कालिक मरम्मत (Reactive Repairs) के स्थान पर सुनियोजित निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance) पर केंद्रित है। हालांकि, विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों का मानना है कि इस यंत्रीकरण (Mechanisation) से सफाईकर्मियों का रोजगार छिनने नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें रोबोटिक उपकरण संचालित करने का प्रशिक्षण, औपचारिक अनुबंध, बीमा और सामाजिक सुरक्षा दी जानी चाहिए।

1. ‘वन ज़ोन, वन ऑपरेटर’ मॉडल: कैसे बदलेगी दिल्ली के सीवर की व्यवस्था?

दिल्ली जल बोर्ड की इस ₹17,970 करोड़ की योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • 8 ज़ोन में विभाजन: पूरी दिल्ली को बिजली वितरण कंपनियों की तर्ज पर 8 अलग-अलग ज़ोन में विभाजित किया जाएगा, जहाँ हर ज़ोन की पूरी जवाबदेही एक ही प्राइवेट ऑपरेटर की होगी।
  • केंद्रीय कमांड सेंटर व जियो-टैगिंग: सीवर लाइनों की स्थिति, मैनहोलों के निरीक्षण और शिकायतों के निस्तारण की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी केंद्रीय कमांड सेंटर और जियो-टैग इंस्पेक्शन से होगी।
  • परफॉर्मेंस-लिंक्ड पेमेंट: ऑपरेटरों को भुगतान उनके काम के प्रदर्शन और सीवर ओवरफ्लो को रोकने के आधार पर किया जाएगा, जिससे शिकायत निस्तारण की गति तेज होगी।

2. सीवर यंत्रीकरण और ‘नमस्ते’ योजना का तुलनात्मक खाका

सीवर सफाई व्यवस्था में पारंपरिक तरीकों और नए रोबोटिक मॉडल की तुलना:

पहलू (Parameter) पारंपरिक प्रणाली (Old System) नया ₹17,970 करोड़ मॉडल (New System)
सफाई का तरीका हाथ से या आंशिक मशीन से सफाई 100% मैकेनिकल व रोबोटिक सफाई
श्रमिक सुरक्षा ज़हरीली गैसों और मौतों का जोखिम जीरो मैनुअल एंट्री, रोबोटिक बैंडीकूट मशीनें
वैधानिक अनुपालन PEMSR एक्ट का उल्लंघन संभव था PEMSR एक्ट 2013 व ‘नमस्ते’ योजना का सख्त पालन
श्रमिकों की स्थिति असंगठित, बिना बीमा के मजदूर प्रशिक्षित ऑपरेटर, औपचारिक अनुबंध व स्वास्थ्य बीमा
निगरानी प्रणाली शिकायत मिलने पर मरम्मत जियो-टैग व केंद्रीय कमांड सेंटर द्वारा रीयल-टाइम ट्रैकिंग

3. सफाईकर्मियों का पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा: रोजगार नहीं, जोखिम खत्म होगा

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यंत्रीकरण का उद्देश्य केवल तकनीक लाना नहीं, बल्कि वंचित वर्ग के श्रमिकों का जीवन सुधारना है:

  1. तकनीकी प्रशिक्षण व प्रमाणन: सीवर सफाई का काम करने वाले पारंपरिक सफाईकर्मियों को रोबोटिक और मैकेनिकल उपकरण चलाने का मुफ्त प्रशिक्षण देकर ‘मशीन ऑपरेटर’ के रूप में प्रमाणित किया जाएगा।
  2. स्वास्थ्य बीमा व औपचारिक अनुबंध: असंगठित व्यवस्था को समाप्त कर श्रमिकों को आयुष्मान भारत/स्वास्थ्य बीमा और न्यूनतम मजदूरी गारंटी वाले औपचारिक रोजगार से जोड़ा जाएगा।
  3. आपातकालीन परिस्थितियां व सुरक्षा ऑडिट: अनिवार्य और अति-विषम आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर सीवर में मैनुअल प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऐसी आपात स्थितियों के लिए सख्त सुरक्षा मानक और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट (Independent Safety Audits) लागू होंगे।

4. आगे की राह : टिकाऊ सीवर प्रबंधन के उपाय

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राजधानी की सीवर व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय अनिवार्य हैं:

  • सख्त जीरो मैनुअल एंट्री का प्रवर्तन: PEMSR एक्ट 2013 के तहत सीवर में इंसानी प्रवेश कराने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
  • फैकल-स्लज मैनेजमेंट (FSM): अनधिकृत कॉलोनियों में सेप्टिक टैंकों की नियमित और वैज्ञानिक सफाई के लिए टैंकरों को जीपीएस-सक्षम बनाया जाए।
  • उपकरणों व ऑपरेटरों का प्रमाणन: सीवर सफाई में इस्तेमाल होने वाली सभी रोबोटिक मशीनों और सुरक्षा गियर का राष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणन (Certification) अनिवार्य हो।
  • जन-भागीदारी और मैपिंग: दिल्ली के सीवर नेटवर्क और मैनहोलों की सटीक डिजिटल मैपिंग (Geo-tagging) कर नागरिकों को पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

निष्कर्ष 

दिल्ली जल बोर्ड का ₹17,970 करोड़ का सीवर ओवरहॉल प्लान केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं है, बल्कि यह इंसानी गरिमा, सामाजिक न्याय और स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने वाली एक क्रांतिकारी पहल है। 100% रोबोटिक सफाई को अपनाकर और ‘नमस्ते’ योजना के तहत सफाईकर्मियों को आधुनिक तकनीशियन बनाकर दिल्ली न केवल सीवर मौतों के अभिशाप से मुक्त हो सकती है, बल्कि देश के अन्य महानगरों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल पेश कर सकती है।

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By Kanchan

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