फंड के इंतजार में थमी ‘डीप-टेक’ क्रांति: ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड में नए आवेदनों पर लगी रोक; टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड का ₹2,000 करोड़ का शुरुआती बजट खत्म

DST से बजट रिलीज और नए फंड मैनेजर्स की नियुक्ति अटकी; पहले चरण में 22 कंपनियों को बांटे गए थे ₹2,192 करोड़ के सॉफ्ट लोन।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कम्प्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत को वैश्विक सुपरपावर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘डीप-टेक’ फाइनेंसिंग पहल को एक बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। बजट आवंटन और प्रशासनिक मंजूरियों में देरी के चलते ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के तहत नए आवेदनों की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है (Paused)। इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने अपना ₹2,000 करोड़ का शुरुआती फंड समाप्त होने के बाद “प्रशासनिक कारणों” का हवाला देते हुए नए आवेदनों की खिड़की बंद कर दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2025 में स्वीकृत और प्रधानमंत्री द्वारा औपचारिक रूप से शुरू किए गए इस ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड को ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (ANRF) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत संचालित किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राइवेट सेक्टर की शोध-आधारित कंपनियों को 50% तक की लागत के लिए बिना गारंटी (Collateral-Free), दीर्घकालिक और कम ब्याज वाले ‘सॉफ्ट लोन’ देना है। योजना को सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के जरिए लागू किया जाना था, जिसमें TDB और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) को प्राथमिक जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, पहले चरण में TDB को मिला ₹2,000 करोड़ का फंड 22 कंपनियों को आवंटित होने के बाद खत्म हो गया, जबकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से अगले चरण के लिए राशि जारी होना अभी बाकी है।

1. क्यों रुकीं अर्जियां? फंड की कमी और प्रशासनिक अड़चनें

डीप-टेक फंड के अचानक रुकने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आए हैं:

  • TDB का शुरुआती बजट समाप्त: टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट Board (TDB) ने पहले चरण में प्राप्त ₹2,000 करोड़ के आधार पर 22 डीप-टेक कंपनियों को ₹2,192 करोड़ के सॉफ्ट लोन स्वीकृत किए, जिसके बाद यह फंड पूरी तरह समाप्त हो गया।
  • DST से बजट रिलीज में देरी: इस योजना के लिए DST को बजट में बड़े फंड का प्रावधान किया गया था, लेकिन TDB को अगले चरण (Round 2) के लिए आवश्यक वित्तीय हस्तांतरण अभी तक नहीं हो सका है।
  • अतिरिक्त फंड मैनेजर्स (SLFMs) की नियुक्ति अटकी: योजना के अनुसार एआईएफ (AIFs), डीएफआई (DFIs) और एनबीएफसी (NBFCs) को भी सेकेंड-लेवल फंड मैनेजर के रूप में जोड़ना था, लेकिन उनकी औपचारिक चयन प्रक्रिया में देरी हो रही है।

2. क्या है ₹1 लाख करोड़ का ‘RDI फंड’ और इसकी संरचना?

भारत के डीप-टेक और हाई-रिस्क स्टार्टअप्स को सहारा देने वाले इस फंड का खाका इस प्रकार है:

योजना का पहलू (Key Aspect) विवरण व प्रावधान (Details & Provisions)
कुल कॉर्प्स (Total Outlay) ₹1 लाख करोड़ (6 वर्षों की अवधि के लिए)
संरक्षक एजेंसी (Custodian) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) व ANRF
लोन का प्रकार (Loan Nature) बिना गारंटी (Collateral-free), लंबी अवधि व बहुत कम ब्याज दर
परियोजना लागत कवरेज कुल प्रोजेक्ट लागत का 50% तक सॉफ्ट लोन, 50% निजी स्रोत से
प्राथमिकता वाले क्षेत्र (Sunrise Sectors) एआई, क्वांटम, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, स्पेस, क्लीन एनर्जी, बायोटेक
फंडिंग रूट (Funding Route) सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) जैसे TDB, BIRAC, AIFs

3. पहले चरण के आवंटन पर विवाद और ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की जांच

फंड की कमी के साथ-साथ पहले चरण में चयनित लाभार्थी कंपनियों पर भी सवाल उठे हैं:

  1. चयनित कंपनियों के संबंध: रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले चरण में सॉफ्ट लोन पाने वाली 22 कंपनियों में से 15 कंपनियों के तार चयन समिति के सदस्यों या सलाहकारों से जुड़े होने के आरोप लगे हैं, जिससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा गरमा गया है।
  2. सख्त जांच और पारदर्शिता की मांग: विशेषज्ञों का मानना है कि आवेदनों पर रोक का एक कारण चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और स्वतंत्र फंड मैनेजर्स की नियुक्ति करना भी हो सकता है।
  3. स्टार्टअप्स पर प्रभाव: स्पेस टेक, ड्रोन और एआई जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे दर्जनों भारतीय स्टार्टअप्स जो अगली फंडिंग राउंड का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अपनी आरएंडडी (R&D) गतिविधियों के लिए निजी निवेशकों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

निष्कर्ष 

भारत को क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ₹1 लाख करोड़ का ‘डीप-टेक RDI फंड’ एक गेम-चेंजर पहल है। हालांकि, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड का बजट समाप्त होना और DST द्वारा समय पर फंड जारी न होना यह दर्शाता है कि इतनी बड़ी योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए मजबूत प्रशासनिक तंत्र और वित्तीय निरंतरता कितनी आवश्यक है। यदि केंद्र सरकार शीघ्र ही नए फंड मैनेजर्स की नियुक्ति कर DST से फंड रिलीज करती है, तो भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को फिर से पंख मिल सकेंगे और वैश्विक बाजार में भारत की तकनीकी साख मजबूत होगी।

अन्य ख़बरें !

By Kanchan

Exit mobile version