कैंसर से जंग जीती विवेक ओबेरॉय की गोद ली बेटी: मंच पर भावुक हुए एक्टर, ‘रामायण’ फिल्म की ₹6 करोड़ फीस भी की दान
कैंसर फ्री होकर पायलट बनीं 22 वर्षीय सहारा शाह ने विवेक के सामने साइन की पहली फिल्म; 50वें जन्मदिन पर 50 बच्चों के इलाज का उठाया खर्च।
बॉलीवुड अभिनेता और समाजसेवी विवेक ओबेरॉय (Vivek Oberoi) के लिए सितंबर 2026 खुशियों और भावुक क्षणों से भरा रहा। मुंबई में आयोजित ‘कैंसर पेशेंट्स ऐड एसोसिएशन’ (CPAA Cancer Rose Day 2026) कार्यक्रम के दौरान विवेक ओबेरॉय उस वक्त अपने आंसू नहीं रोक पाए, जब उनकी गोद ली हुई बेटी सहारा शाह ने कैंसर को पूरी तरह मात देकर अपनी पहली फिल्म साइन की। 2.5 साल की उम्र में कैंसर से जूझते वक्त विवेक द्वारा गोद ली गई सहारा अब न केवल कैंसर-मुक्त हैं, बल्कि कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग पूरी कर मुख्य अभिनेत्री के रूप में अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत करने जा रही हैं।
विवेक ओबेरॉय लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज और पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में अपने 50वें जन्मदिन के अवसर पर अभिनेता ने एक और मिसाल पेश करते हुए नितेश तिवारी की बहुचर्चित फिल्म ‘रामायण’ (Ramayana) में विभीषण का किरदार निभाने के लिए मिलने वाली अपनी पूरी ₹6 करोड़ की फीस त्याग दी। उन्होंने निर्माता नमित मल्होत्रा से यह पूरी राशि 50 गरीब बच्चों के कैंसर इलाज के लिए समर्पित करने का अनुरोध किया।
1. बेटी सहारा शाह की कैंसर से जीत और फिल्मी डेब्यू
मुंबई में कैंसर रोज डे कार्यक्रम के दौरान सहारा शाह ने विवेक ओबेरॉय को एक अनोखा सरप्राइज दिया:
- मंच पर कॉन्ट्रैक्ट साइन: 22 वर्षीय सहारा ने अपनी पहली फिल्म के निर्माता को मंच पर बुलाकर विवेक ओबेरॉय के सामने फिल्म का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया और पहला पोस्टर रिलीज किया।
- विवेक की भावुक प्रतिक्रिया: विवेक ओबेरॉय ने कहा, “जब मैंने ढाई साल की उम्र में सहारा को देखा था, तो उसकी आंखें लाल थीं और कीमोथेरेपी चल रही थी। लेकिन उसकी उंगली पकड़ते ही मुझे उसमें जीने की जिद दिखी। आज जब वह पायलट बनकर फिल्मों में कदम रख रही है, तो मेरी आंखें गर्व के आंसुओं से भरी हैं।”
2. ‘रामायण’ फिल्म की फीस दान और 50 बच्चों की जिम्मेदारी
अपनी मां से समाजसेवा की प्रेरणा लेने वाले विवेक ओबेरॉय ने अपनी दानशीलता पर बात करते हुए कहा कि विशेषाधिकार प्राप्त लोगों का कर्तव्य कमजोरों की मदद करना है:
- ‘सेवा’ के रूप में अभिनय: विवेक ने कहा कि ‘रामायण’ जैसी पौराणिक फिल्म में काम करना उनके लिए कोई नौकरी नहीं बल्कि ‘सेवा’ है। इसलिए उन्होंने एक भी रुपया अपने पास न रखकर ₹6 करोड़ का पूरा मेहनताना कैंसर केयर फंड को दे दिया।
- 50वें जन्मदिन का संकल्प: 50 साल के होने पर विवेक ने 50 नए कैंसर पीड़ित बच्चों के संपूर्ण इलाज और शिक्षा का जिम्मा उठाने का संकल्प लिया है।
3. ट्रोलिंग के खिलाफ सलमान खान के बयान का समर्थन
कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने विवेक ओबेरॉय से सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग (विशेषकर कैटरीना कैफ के पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी-शेमिंग पर सलमान खान के हालिया बयान) के बारे में पूछा, तो उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया:
- सकारात्मकता पर जोर: विवेक ने कहा, “जीवन में करने के लिए इतनी सकारात्मक चीजें हैं, तो फिर इंसान क्यों नकारात्मकता में पड़े? किसी को भी ट्रोल नहीं करना चाहिए।” पुराने मतभेदों से इतर विवेक के इस परिपक्व और सकारात्मक दृष्टिकोण की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है।
निष्कर्ष
विवेक ओबेरॉय न केवल अपने अभिनय के लिए बल्कि अपनी अगाध मानवीय संवेदनाओं और परोपकार के लिए जाने जाते हैं। अपनी गोद ली हुई बेटी की कैंसर पर जीत और 50 बच्चों के जीवन को बचाने के लिए ₹6 करोड़ का दान देना यह साबित करता है कि असली स्टारडम केवल पर्दे पर नहीं, बल्कि समाज के प्रति आपकी जिम्मेदारी और कार्यों में झलकता है।

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