उड्डयन क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: नागर विमानन मंत्रालय ने एयरपोर्ट सुरक्षा को सरल और तेज बनाने के लिए पेश किए 5 बड़े सुधार
बीकेस (BCAS) ने एरोड्रम एंट्री परमिट को बनाया पूरी तरह डिजिटल और बायोमीट्रिक; 5 साल के लिए मिलेगी यूनिफाइड सिक्योरिटी क्लीयरेंस।
तेजी से बढ़ते भारतीय विमानन क्षेत्र में यात्रियों और परिचालन की सुरक्षा को सुचारू, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक मील का पत्थर कदम उठाया है। 1 अक्टूबर 2026 को नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) और नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) ने राष्ट्रीय राजधानी में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एयरपोर्ट सुरक्षा प्रक्रियाओं को सरल, त्वरित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक व तकनीकी सुधारों (Aviation Security Reforms) का ऐलान किया। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य देश के 169 से अधिक परिचालनरत हवाई अड्डों पर कागजी प्रक्रियाओं को खत्म कर सुरक्षा और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को नई गति देना है।
नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा और बीकेस (BCAS) के महानिदेशक राजेश निरवान द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहाँ हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2026 में 165 से अधिक हो गई है। ऐसे में हर साल जारी होने वाले लगभग 15 लाख एरोड्रम एंट्री परमिट (AEP) को पूरी तरह डिजिटल और फेस-बायोमीट्रिक सत्यापन (Facial Biometric Verification) पर आधारित बनाया जा रहा है। इसके अलावा, विमानन संस्थाओं को अब बार-बार क्लीयरेंस लेने के बजाय 5 साल की एकीकृत सुरक्षा मंजूरी दी जाएगी। यह कदम ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण के तहत उड्डयन सुरक्षा को आधुनिक और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में उठाया गया है।
1. 15 लाख एंट्री परमिट होंगे डिजिटल: बिना दफ्तर चक्कर काटे मिलेगी मंजूरी
एयरपोर्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों और एयरलाइंस स्टाफ के लिए प्रवेश प्रक्रिया को संपर्क रहित (Contactless) बनाया गया है:
- एंड-टू-एंड डिजिटल प्लेटफॉर्म: एरोड्रम एंट्री परमिट (AEP) के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज जमा करना, डिजिटल सत्यापन और ऑनलाइन मंजूरी का एक साझा मंच तैयार किया गया है।
- चेहरे से बायोमीट्रिक पहचान (Facial Biometric): फर्जीवाड़े को रोकने और प्रक्रिया को तेज करने के लिए चेहरे के बायोमीट्रिक मिलान से ही एंट्री परमिट जारी होंगे।
- बीकेस दफ्तर जाने से मुक्ति: अब आवेदकों को भौतिक सत्यापन के लिए बीकेस (BCAS) कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
2. 5 साल की सिक्योरिटी क्लीयरेंस और समयबद्ध ढांचागत मंजूरी
व्यापारिक सुगमता और त्वरित सुरक्षा जांच के लिए किए गए मुख्य सुधार:
| सुधार का क्षेत्र (Reform Domain) | पुरानी व्यवस्था (Legacy System) | नई डिजिटल व्यवस्था 2026 (New System) |
|---|---|---|
| सुरक्षा क्लीयरेंस (Security Clearance) | अलग-अलग श्रेणियों व कॉन्ट्रैक्ट के लिए बार-बार नवीनीकरण | 9 श्रेणियों के लिए 5 साल की एकीकृत (Unified) मंजूरी |
| एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर वेटिंग | बहु-स्तरीय पूछताछ और देरी | एकल-चरण (Single-Stage) में सभी आपत्तियों का निस्तारण व समयबद्ध समय-सीमा |
| एनओसी प्रक्रिया (NOC Automation) | एनओसीएएस (NOCAS) में लंबी प्रक्रिया | भवन ऊंचाई एनओसी का 15 दिनों में ऑटोमेटेड व पारदर्शी निस्तारण |
3. नागरिक उड्डयन मंत्री का निर्देश: 15 दिनों में एनओसी प्रक्रिया होगी ऑटोमेटेड
नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं:
- इमारतों की ऊंचाई के लिए स्पष्टता: दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे महानगरों में विकासकर्ताओं और आम जनता को शुरुआती चरण में ही अनुमेय भवन ऊंचाई की जानकारी दी जाएगी ताकि एनओसी के लिए अनावश्यक चक्कर न काटने पड़ें।
- भौतिक सत्यापन में कमी: एयरोनॉटिकल स्टडीज और साइट वेरिफिकेशन की कागजी जरूरतों को कम करके शहरी स्थानीय निकायों (ULB) के स्तर पर ऑटोमेटेड एनओसी देने की व्यवस्था की जा रही है।
निष्कर्ष
नागर विमानन मंत्रालय और बीकेस द्वारा शुरू किए गए ये सुरक्षा सुधार भारत के उड्डयन इतिहास में एक बड़े डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक हैं। सुरक्षा मानकों से कोई समझौता किए बिना वर्कफ्लो को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने से न केवल एयरलाइंस और हवाई अड्डा कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत का विमानन क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक मजबूत होकर उभरेगा।


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