कर्ज के बोझ ने बनाया जाली नोट का सौदागर: इंस्टा रील और टेलीग्राम से ली नोट छापने की ‘ऑनलाइन ट्रेनिंग’; मेले में खपाए नकली नोट, ऐसे खुला राज
राजकोट SOG और क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन; सब्जी विक्रेता के घर से कंप्यूटर, प्रिंटर व ₹65,500 के उपकरण जब्त; कोर्ट ने भेजा 3 दिन के पुलिस रिमांड पर।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग और जल्दी अमीर बनने के शॉर्टकट का एक बेहद चौंकाने वाला मामला गुजरात के राजकोट शहर से सामने आया है। बढ़ते कर्ज और कम आय से परेशान एक सब्जी विक्रेता ने इंस्टाग्राम रील (Instagram Reel) देखकर और टेलीग्राम (Telegram) ऐप पर साइबर ठगों से जाली नोट छापने की ट्रेनिंग लेकर अपने ही घर में फर्जी नोटों की प्रिंटिंग प्रेस खोल डाली। 30 सितंबर 2026 को राजकोट सिटी क्राइम ब्रांच और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने मानदा डुंगर (मांडा डुंगर) इलाके में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर आरोपी सब्जी विक्रेता किशन सोलंकी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से 200 से अधिक जाली नोट और प्रिंटिंग सेटअप जब्त किया है।
आरोपी किशन सोलंकी राजकोट के श्याम किरण पार्क क्षेत्र में सब्जी बेचने का काम करता था। सब्जी बिक्री से होने वाली सीमित आय और ऊपर से चढ़े कर्ज के कारण उसने अपराध का रास्ता चुना। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने सबसे पहले इंस्टाग्राम रील पर जाली नोट छापने से जुड़ा एक संकेत देखा, जिसके बाद टेलीग्राम पर एक अनाम ‘ट्रेनर’ से संपर्क किया। हैरत की बात यह है कि आरोपी ने नोट छापने की ट्रेनिंग की फीस भी अपने गुरु को जाली नोटों से ही चुकाई। आरोपी ने हाल ही में आयोजित जन्माष्टमी मेले में ₹100 के करीब 40 जाली नोट चला दिए थे। कोर्ट ने आरोपी को 3 दिन की पुलिस कस्टडी (Remand) में भेज दिया है।
1. इंस्टाग्राम रील से टेलीग्राम का सफर: कैसे बनी घर में ‘प्रिंटिंग प्रेस’?
पुलिस जांच में जाली नोट छापने के इस हाई-टेक देशी मॉडस ऑपरेंडी (Modus Operandi) का भंडाफोड़ हुआ:
- रील्स का झांसा: आरोपी ने इंस्टाग्राम पर एक रील देखी जिसमें जाली नोट बनाने और कम समय में पैसा कमाने का दावा किया गया था।
- टेलीग्राम पर सीक्रेट ट्रेनिंग: रील के बायो में दिए लिंक के जरिए वह टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा, जहाँ उसे बॉन्ड पेपर, कलर कॉम्बिनेशन, वाटरमार्क और प्रिंटर सेटिंग्स की बारीकियां सिखाई गईं।
- नकली नोट से दी ‘गुरुदक्षिणा’: टेलीग्राम वाले ट्रेनर ने अपनी फीस के रूप में असली पैसे मांगने के बजाय आरोपी द्वारा छापे गए ₹100-₹100 के पहले लॉट के जाली नोट कूरियर/ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए।
2. बरामदगी और जब्ती: क्या-क्या मिला पुलिस छापेमारी में?
राजकोट SOG और क्राइम ब्रांच द्वारा की गई जब्ती का विवरण:
| वस्तु / उपकरण (Items / Equipment) | मात्रा व विवरण (Quantity & Details) |
|---|---|
| ₹100 के जाली नोट | 216 नकली नोट (उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड पेपर पर मुद्रित) |
| ₹500 के जाली नोट | 3 नकली नोट (परीक्षण के तौर पर छापे गए) |
| हार्डवेयर व प्रिंटर सेटअप | 1 कलर प्रिंटर, सीपीयू (CPU), मॉनिटर व लैमिनेटर मशीन |
| कुल जब्ती का मूल्य | लगभग ₹65,500 मूल्य के उपकरण व नोट |
| पुलिस कार्रवाई | भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जाली मुद्रा धाराओं में FIR व 3 दिन का रिमांड |
3. ₹100 के नोटों को ही क्यों चुना? मेलों में खपाने की रणनीति
आरोपी ने पकड़े जाने से बचने के लिए बेहद चालाकी भरा तरीका अपनाया था:
- छोटे नोटों पर कम शक: आमतौर पर ₹500 या ₹2000 के नोटों को लोग जांचकर लेते हैं, लेकिन ₹100 के नोट को सब्जी मंडी, किराना दुकान या भीड़भाड़ वाले मेलों में कोई ध्यान से नहीं देखता।
- जनमाष्टमी मेले में इस्तेमाल: आरोपी ने राजकोट के प्रसिद्ध जन्माष्टमी मेले के दौरान छोटे-मोटे सामान, खान-पान और खिलौने खरीदने के लिए ₹100 के लगभग 40 जाली नोटों का आसानी से उपयोग कर लिया।
- एक चूक से पकड़ा गया: मेले में एक दुकानदार को नोट के कागज और रंग पर संदेह हुआ, जिसके बाद सूचना स्थानीय बीट पुलिस तक पहुंची और SOG ने सर्विलांस के जरिए आरोपी को चिन्हित कर लिया।
4. आगे की जांच: टेलीग्राम वाले गिरोह की तलाश
राजकोट पुलिस अब इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय जाली नोट गिरोहों से जोड़कर देख रही है:
- टेलीग्राम हैंडलर की पहचान: क्राइम ब्रांच की साइबर सेल उस टेलीग्राम चैनल और यूपीआई/कूरियर एड्रेस की पड़ताल कर रही है जहाँ से आरोपी को निर्देश मिल रहे थे।
- मार्केट में फैले नोटों की रिकवरी: पुलिस उन दुकानों और व्यापारिक स्थलों की पहचान कर रही है जहाँ आरोपी ने जाली नोट चलाए थे ताकि फर्जी मुद्रा को बाजार से बाहर किया जा सके।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी: पुलिस ने लोगों से अपील की है कि टेलीग्राम या इंस्टाग्राम पर मिलने वाले ‘क्विक मनी’ या ‘फेक करेंसी’ के विज्ञापनों के झांसे में न आएं, यह गंभीर गैर-जमानती अपराध है।
निष्कर्ष
राजकोट का यह मामला इस बात का कड़वा उदाहरण है कि कैसे सोशल मीडिया पर बिना जांच-परख के उपलब्ध कंटेंट और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रहे हैं। कर्ज से मुक्ति पाने का शॉर्टकट आरोपी सब्जी विक्रेता को सीधे जेल की सलाखों के पीछे ले गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से एक बड़ा जाली नोट नेटवर्क बाजार में फैलने से पहले ही तबाह हो गया।

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