PM मोदी के जन्मदिन के लिए ये है BJP का प्लान, पैरालंपिक एथलीट्स को भी किया जाएगा सम्मानित - PM Narendra Modi Birthday On 17 September BJP To Organise Seva Pakhwada NTC - AajTak

17 सितंबर विशेष: पीएम मोदी का जन्मदिन, विश्वकर्मा जयंती और हैदराबाद मुक्ति दिवस — एक साथ तीन बड़े मौके

कैलेंडर में शायद ही कोई और तारीख इतनी भरी-पूरी होगी जितनी 17 सितंबर। इस एक दिन में देश एक साथ तीन बड़े मौके मनाता है — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन, भगवान विश्वकर्मा की जयंती, और हैदराबाद के भारत में विलय की वर्षगांठ। इसके अलावा यह दिन विश्व रोगी सुरक्षा दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। आइए एक-एक करके समझते हैं कि आखिर 17 सितंबर इतना खास क्यों है।

पीएम मोदी का 76वां जन्मदिन

17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक साधारण परिवार में जन्मे मोदी आज़ाद भारत में जन्म लेने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। जून 2024 में उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसके साथ वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बन गए। उनके जन्मदिन के मौके पर देशभर में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तरफ से बधाई संदेश भेजे जा रहे हैं। कई राज्यों में इस मौके पर विशेष सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं — जैसे लखनऊ में “सेवा संकल्प अभियान” की शुरुआत हुई, जहां सिविल अस्पताल में फल बांटे गए। झारखंड के कोडरमा में भाजपा जिला इकाई की तरफ से करीब 6,000 वर्गफीट क्षेत्र में दीयों से पीएम मोदी की भव्य आकृति बनाई जा रही है।

भगवान विश्वकर्मा की जयंती

आज ही के दिन भगवान विश्वकर्मा की जयंती भी मनाई जा रही है, जिन्हें हिंदू परंपरा में सृष्टि का पहला शिल्पकार और देवताओं का इंजीनियर माना जाता है। पंचांग के अनुसार 17 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, और इसी दिन सूर्य कन्या राशि में गोचर भी कर रहा है, जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। यह दिन खासतौर पर कारखानों, फैक्ट्रियों, मशीनों और औजारों की पूजा के लिए जाना जाता है। देशभर में कारीगर, इंजीनियर, मैकेनिक और औद्योगिक इकाइयां अपने उपकरणों की पूजा कर बेहतर काम और समृद्धि की कामना करते हैं। पश्चिम बंगाल में तो कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद हल्दिया बंदरगाह की जमीन पर भी विश्वकर्मा पूजा का रास्ता साफ हो गया है, जो इस साल खास चर्चा में रहा।

विचार 17 सितंबर और एक नए भारत का निर्माण - 17 September Vishwakarma Jayanti Hyderabad Liberation and Narendra Modi Birthday

हैदराबाद का भारत में विलय

17 सितंबर 1948 का दिन भारतीय इतिहास में एक अहम मोड़ माना जाता है। इसी दिन हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ में औपचारिक रूप से मिलाया गया था। आज़ादी के बाद हैदराबाद के तत्कालीन निज़ाम ने भारत में विलय से इनकार कर दिया था, जिसके बाद भारत सरकार को “ऑपरेशन पोलो” नाम से सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। इस कार्रवाई के बाद हैदराबाद रियासत भारत का हिस्सा बनी। इस दिन को कई जगह हैदराबाद मुक्ति दिवस या हैदराबाद विलय दिवस के तौर पर याद किया जाता है, और तेलंगाना व कर्नाटक-महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में इसे खास महत्व दिया जाता है।

और भी हैं ऐतिहासिक घटनाएं

17 सितंबर की तारीख इतिहास के पन्नों में कई और वजहों से भी दर्ज है। इसी दिन साल 2022 में मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों की वापसी हुई थी, जो भारत में दशकों बाद चीतों की वापसी का ऐतिहासिक क्षण था। इसके अलावा 1867 में मशहूर कार्टूनिस्ट गगनेंद्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था, जो प्रसिद्ध साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर के भतीजे थे। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पार्टी की स्थापना से जुड़ी एक अहम घटना भी इसी तारीख से जुड़ी बताई जाती है।

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 17 सितंबर को विश्व रोगी सुरक्षा दिवस (World Patient Safety Day) के रूप में भी मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा स्थापित यह दिवस स्वास्थ्य सेवा में मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने और चिकित्सा त्रुटियों को कम करने के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से मनाया जाता है। दुनियाभर के अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान इस दिन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं, ताकि मरीजों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े मानकों को बेहतर बनाया जा सके।

एक तारीख, कई कहानियां

17 सितंबर की खासियत यही है कि इसमें राजनीति, अध्यात्म, इतिहास और स्वास्थ्य — सभी की झलक एक साथ मिलती है। एक तरफ जहां यह दिन देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिन के तौर पर उत्सव का माहौल लेकर आता है, वहीं दूसरी तरफ यह भगवान विश्वकर्मा की पूजा के जरिए श्रम और शिल्पकारी को सम्मान देने का भी मौका है। साथ ही हैदराबाद के विलय की याद हमें भारत के एकीकरण की जटिल लेकिन गौरवशाली कहानी से जोड़ती है। यही विविधता इस तारीख को कैलेंडर के सबसे यादगार दिनों में से एक बनाती है।

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द्वारा Kanchan

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