विमानों की सुरक्षा दरकिनार कर ली ₹2.5 लाख रिश्वत: CBI का बड़ा एक्शन; DGCA के उप निदेशक और एविऐशन कंपनी के डायरेक्टर गिरफ्तार

गांधी जयंती पर सलेम बेस फ्लाइंग एकेडमी के 7 ट्रेनर विमानों को फर्जी ‘एयरवर्दिनेस प्रमाणपत्र’ देने का आरोप; 2026 में डीजीसीए में घूसखोरी का दूसरा बड़ा मामला।


भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र की शीर्ष नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने चेन्नई में तैनात डीजीसीए के उप निदेशक (एयरवर्दिनेस) सुशील कुमार गर्ग (Sushil Kumar Garg) और सलेम स्थित निजी फ्लाइंग एकेडमी ‘एकवी एयर ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक सचिन केशव भाने (Sachin Keshav Bhane) को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेने और देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई विमानों के उड़ान योग्यता (Airworthiness) प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया में गैर-कानूनी रियायतें देने के बदले की गई।

दिल्ली में सीबीआई का बड़ा एक्शन, 2.5 लाख रिश्वत मामले में DGCA अधिकारी समेत दो गिरफ्तार | delhi cbi arrests dgca official and two other in two and half lakh corruption case

सीबीआई को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि डीजीसीए अधिकारी सुशील कुमार गर्ग ने सलेम एयरपोर्ट से संचालित होने वाली निजी ट्रेनिंग कंपनी के 7 विमानों के निरीक्षण (Audit) के दौरान पाई गई तकनीकी कमियों को छिपाने के बदले रिश्वत मांगी थी। 31 जुलाई 2026 को किए गए ऑडिट के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी के कारण घूस का लेनदेन नहीं हो सका था। इसके बाद गांधी जयंती के अवसर पर ₹2.5 लाख की रिश्वत का लेनदेन तय हुआ, जिसके बाद सीबीआई की दिल्ली और चेन्नई टीमों ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया।

1. हवाई सुरक्षा से खिलवाड़: कैसे काम करता था रिश्वत का खेल?

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर (FIR) के अनुसार मामले की मुख्य परतें:

  • एयरवर्दिनेस प्रमाणपत्र का महत्व: किसी भी व्यावसायिक या ट्रेनिंग विमान के लिए उड़ान भरने से पहले डीजीसीए से एयरवर्दिनेस (उड़ान योग्यता) प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विमान सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरा उतरा है।
  • कमियों को दरकिनार करने का सौदा: आरोपी डीजीसीए अधिकारी ने एकवी एयर ट्रेनिंग के 7 ट्रेनिंग विमानों में सुरक्षा कमियां होने के बावजूद अनुकूल ऑडिट रिपोर्ट (Favourable Audit Report) जारी करने का वादा किया था।

CBI arrests DGCA deputy director in Tamil Nadu over Rs 2.5 lakh bribe - India Today

  • दिल्ली ट्रांसफर और ट्रांजिट रिमांड: सीबीआई दोनों गिरफ्तार आरोपियों को दिल्ली लाकर गहन पूछताछ करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PoCA) के तहत अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है।

2. डीजीसीए रिश्वत कांड 2026: मुख्य विवरण व तथ्य (Factsheet)

मामले का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड:

पहलू (Parameter) विवरण एवं आंकड़े (Details & Facts)
जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
मुख्य आरोपी (सरकारी अधिकारी) सुशील कुमार गर्ग, उप निदेशक (एयरवर्दिनेस), डीजीसीए चेन्नई
सह-आरोपी (कंपनी निदेशक) सचिन केशव भाने, निदेशक, एकवी एयर ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन
निजी कंपनी व लोकेशन M/s Ekvi Air Training Pvt Ltd (सलेम एयरपोर्ट, तमिलनाडु)
रिश्वत की राशि ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये)
आरोप का स्वरूप सुरक्षा कमियों को छिपाकर फर्जी ‘एयरवर्दिनेस प्रमाणपत्र’ जारी करना
वर्ष 2026 की स्थिति डीजीसीए में सीबीआई का 2रा बड़ा रिश्वत केस (अप्रैल 2026 के बाद)

3. एक ही साल में दूसरा बड़ा मामला: एविएशन रेगुलेटर पर उठे सवाल

उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा और जवाबदेही पर गंभीर चिंताएं:

बिना परमिट 8 बार उड़ा दिया प्लेन, अब DGCA ने एयर इंडिया पर ठोक दिया 1 करोड़ का जुर्माना | air india fine 1 crore by dgca on safety lapse and ceo

  1. अप्रैल 2026 में पहला केस: इसी वर्ष अप्रैल 2026 में सीबीआई ने डीजीसीए के उप महानिदेशक (DDG) मुदावथ देवुला के खिलाफ भी इसी तरह के रिश्वतखोरी के मामले में मामला दर्ज किया था।
  2. पायलट ट्रेनिंग सुरक्षा पर खतरा: एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशिक्षण देने वाले विमानों की सुरक्षा से इस तरह समझौता किया जाएगा, तो नए प्रशिक्षु पायलटों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
  3. कठोर ऑडिट की मांग: नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मांग की जा रही है कि हाल के महीनों में जारी किए गए सभी एयरवर्दिनेस प्रमाणपत्रों की एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय तकनीकी समीक्षा कराई जाए।

निष्कर्ष 

डीजीसीए के उप निदेशक की गिरफ्तारी ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा जांच और प्रशासनिक पारदर्शिता की पोल खोल कर रख दी है। सीबीआई की इस त्वरित कार्रवाई से जहां भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा है, वहीं यह आवश्यक हो गया है कि उड़ानों की सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया जाए ताकि लाखों यात्रियों और प्रशिक्षुओं की जान सुरक्षित रह सके।

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द्वारा Kanchan

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