विश्व ओज़ोन दिवस 2026: आज मनाया जा रहा है ‘ठंडे ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई’ थीम पर खास दिन

आज पूरी दुनिया में विश्व ओज़ोन दिवस मनाया जा रहा है। हर साल 16 सितंबर को मनाया जाने वाला यह दिन धरती की रक्षा करने वाली ओज़ोन परत के महत्व को याद दिलाता है और उन अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का जश्न मनाता है, जिन्होंने इस अदृश्य लेकिन जीवनरक्षक परत को बचाने में अहम भूमिका निभाई है। इस साल का आयोजन खास इसलिए भी है क्योंकि यह जलवायु और ऊर्जा से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते की 10वीं वर्षगांठ के साथ मेल खा रहा है।

16 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है यह दिन

विश्व ओज़ोन दिवस, जिसे आधिकारिक तौर पर “ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस” कहा जाता है, उस दिन को याद करने के लिए मनाया जाता है जब 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए थे। यह प्रोटोकॉल ओज़ोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों, जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) और हैलोन, के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए बनाया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसंबर 1994 को 16 सितंबर की तारीख को इस दिवस के तौर पर घोषित किया, और तभी से हर साल यह दिन दुनियाभर में मनाया जाता है। इसका पहला आयोजन 1995 में हुआ था।

इस साल की थीम

विश्व ओज़ोन दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है — “ठंडे ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के कीगाली संशोधन के तहत टिकाऊ शीतलन के 10 साल का जश्न” (Global Action for a Cooler Planet – Celebrating 10 Years of Sustainable Cooling under the Kigali Amendment to the Montreal Protocol)। यह थीम कीगाली संशोधन की 10वीं वर्षगांठ को चिह्नित करती है, जिसे 2016 में अपनाया गया था और जिसका उद्देश्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) जैसी शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम करना था। ये गैसें मुख्य रूप से एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे शीतलन उपकरणों में इस्तेमाल होती हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने इस मौके पर एक संदेश जारी करते हुए कहा है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है और भीषण गर्मी आम होती जा रही है, वैसे-वैसे कुशल और टिकाऊ शीतलन तक पहुंच लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।

ओज़ोन परत इतनी अहम क्यों है?

ओज़ोन परत पृथ्वी के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फीयर) में मौजूद गैस की एक पतली परत है, जो सूर्य से आने वाली ज्यादातर हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को सोख लेती है। अनुमान है कि यह परत करीब 98 प्रतिशत तक हानिकारक UV किरणों को धरती तक पहुंचने से रोकती है। अगर यह परत न होती, तो मनुष्यों, जानवरों और पेड़-पौधों को त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता और पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को दुनिया के अब तक के सबसे सफल पर्यावरणीय समझौतों में गिना जाता है, और इसे पूर्ण रूप से स्वीकृति मिलने वाला (यूनिवर्सल रैटिफिकेशन) पहला अंतरराष्ट्रीय संधि होने का गौरव भी हासिल है। इस समझौते की बदौलत ओज़ोन परत धीरे-धीरे लेकिन लगातार बेहतर होती जा रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मध्य अक्षांशों (मिड-लैटीट्यूड्स) के ऊपर की ओज़ोन परत करीब 2045 तक पूरी तरह ठीक हो जाएगी, जबकि अंटार्कटिका के ऊपर बना ओज़ोन छिद्र करीब 2066 तक भरने की उम्मीद है।

पिछले वर्षों की थीम पर एक नजर

हर साल संयुक्त राष्ट्र इस दिवस के लिए एक अलग थीम तय करता है, ताकि ओज़ोन संरक्षण के अलग-अलग पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। पिछले साल यानी 2025 में इस दिवस की थीम “विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक” (From Science to Global Action) रखी गई थी, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि कैसे वैज्ञानिक निष्कर्षों को नीतिगत उपायों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में बदला जाता है। इस साल की थीम शीतलन तकनीकों और जलवायु के बीच के गहरे संबंध पर केंद्रित है, जो दर्शाता है कि ओज़ोन संरक्षण अब सिर्फ एक अलग-थलग मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक जलवायु कार्रवाई का हिस्सा बन चुका है।

आज कैसे मनाया जा रहा है यह दिन?

दुनियाभर में स्कूलों, संस्थानों और सामुदायिक संगठनों में आज जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर प्रतियोगिताएं, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और पर्यावरण संरक्षण एजेंसियां भी इस मौके पर शैक्षणिक अभियान चला रही हैं, ताकि आम लोगों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। यह दिन इस बात का भी प्रमाण है कि अगर दुनिया के सभी देश मिलकर संकल्प लें, तो पर्यावरण से जुड़ी बड़ी से बड़ी चुनौती का भी समाधान निकाला जा सकता है।

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द्वारा Kanchan

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