‘ज्ञान के सागर’ ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती: विधवा पुनर्विवाह और नारी शिक्षा के जिस दीपक को उन्होंने जलाया, वह आज भी दिखा रहा है राह

19वीं सदी के सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष की गाथा; 1856 में विधवा पुनर्विवाह कानून बनवाने और बांग्ला लिपि ‘वर्ण परिचय’ के रचयिता को देश की भावभीनी श्रद्धांजलि।

भारत के महान समाज सुधारक, महान शिक्षाविद् और बंगाल पुनर्जागरण (Bengal Renaissance) के मुख्य स्तंभ ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 206वीं जयंती के अवसर पर आज 26 सितंबर 2026 को पूरा राष्ट्र उन्हें कृतज्ञतापूर्वक नमन कर रहा है। देश के प्रमुख नेताओं, विचारकों और सामाजिक संगठनों ने 19वीं सदी में भारतीय समाज से बाल विवाह, बहुविवाह और महिलाओं के उत्पीड़न जैसी कुरीतियों को उखाड़ फेंकने में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। 26 सितंबर 1820 को अविभाजित बंगाल के मेदिनीपुर (अब पश्चिम मेदिनीपुर) जिले के बीरसिंह गांव में जन्मे ईश्वर चंद्र बंद्योपाध्याय को उनकी अद्वितीय विद्वत्ता के लिए संस्कृत कॉलेज द्वारा ‘विद्यासागर’ (ज्ञान का सागर) की उपाधि से विभूषित किया गया था।

एक ऐसे दौर में जब महिलाओं को शिक्षा का अधिकार नहीं था और बाल विधवाओं का जीवन नरक समान माना जाता था, ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अकेले दम पर शास्त्रों के साक्ष्यों के आधार पर रूढ़िवादिता को चुनौती दी। उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम था कि ब्रिटिश भारत सरकार ने 26 जुलाई 1856 को ‘हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम’ (Hindu Widows’ Remarriage Act, 1856) पारित किया। सामाजिक सुधारों के अलावा, वे आधुनिक बांग्ला गद्य (Bengali Prose) के जनक माने जाते हैं, जिन्होंने ‘वर्ण परिचय’ (Borno Porichoy) के माध्यम से बांग्ला भाषा की वर्णमाला को सरल और सुलभ बनाया।

1. नारी सशक्तिकरण और विधवा पुनर्विवाह कानून (1856) के ऐतिहासिक अग्रदूत

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का संपूर्ण जीवन महिलाओं के अधिकारों और मानवीय गरिमा की पुनर्स्थापना को समर्पित रहा:

  • शास्त्रों के माध्यम से कुरीतियों पर प्रहार: उन्होंने हिंदू धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन करके यह साबित किया कि वेदों और शास्त्रों में विधवा पुनर्विवाह पर कोई रोक नहीं है।
  • 1856 का ऐतिहासिक कानून: रूढ़िवादी वर्ग के भारी विरोध और जानलेवा धमकियों के बावजूद उन्होंने एक याचिका तैयार की और लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दिलवाई। उन्होंने स्वयं अपने इकलौते बेटे नारायण चंद्र का विवाह एक विधवा से कराकर समाज के सामने मिसाल पेश की।
  • बाल विवाह और बहुविवाह का विरोध: उन्होंने कम उम्र में बच्चियों के विवाह और उच्च वर्गीय ब्राह्मणों में प्रचलित बहुविवाह (Kulin Polygamy) की प्रथा के खिलाफ लगातार जन-जागरण अभियान चलाया।

2. बालिका शिक्षा की क्रांति और ‘बेथ्यून स्कूल’ की स्थापना

विद्यासागर का मानना था कि जब तक महिलाएं शिक्षित नहीं होंगी, तब तक कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता:

  • 35 से अधिक बालिका विद्यालयों की नींव: उन्होंने बंगाल के ग्रामीण इलाकों में घूम-घूमकर लड़कियों के लिए 35 से अधिक स्कूल खोले, जिनका खर्च वे स्वयं अपनी पुस्तकों की रॉयल्टी से उठाते थे।
  • बेथ्यून कॉलेज (Bethune School) में योगदान: 1849 में जॉन एलियट ड्रिंकवाटर बेथ्यून के साथ मिलकर उन्होंने एशिया के पहले बालिका विद्यालय ‘बेथ्यून स्कूल’ की स्थापना में मुख्य सचिव के रूप में अग्रणी भूमिका निभाई।

3. शिक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण और सामाजिक समानता

एक शिक्षक और संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य के रूप में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में युगांतरकारी बदलाव किए:

  • संस्कृत कॉलेज के दरवाजे सभी के लिए खोले: विद्यासागर से पहले संस्कृत कॉलेज में केवल ब्राह्मण और वैद्य जाति के छात्रों को ही पढ़ने की अनुमति थी। उन्होंने इस जातिगत बाधा को तोड़ते हुए गैर-ब्राह्मण और निम्न वर्ग के छात्रों के लिए भी कॉलेज के दरवाजे खोल दिए।
  • पाश्चात्य ज्ञान और अंग्रेजी का समावेश: उन्होंने संस्कृत अध्ययन के साथ-साथ अंग्रेजी, गणित और पश्चिमी दर्शन को पाठ्यक्रम में अनिवार्य बनाया ताकि छात्र आधुनिक ज्ञान से जुड़ सकें।
  • ‘वर्ण परिचय’ और बांग्ला साहित्य: 1855 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘वर्ण परिचय’ ने बांग्ला भाषा की वर्णमाला को आधुनिक स्वरूप दिया, जिसे आज भी बांग्ला प्राथमिक शिक्षा की नींव माना जाता है।

निष्कर्ष 

ईश्वर चंद्र विद्यासागर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का एक विचार थे। उन्होंने निस्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन और संपत्ति गरीबों, बेसहारा महिलाओं और अनाथों की सेवा में समर्पित कर दी, जिसके कारण उन्हें प्यार से ‘दयार सागर’ (करुणा का सागर) भी कहा जाता था। आज के आधुनिक भारत में, जहां हम लैंगिक समानता और समावेशी शिक्षा की बात करते हैं, विद्यासागर के विचार और उनका निष्काम कर्मयोगी जीवन हमारे लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत है।

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द्वारा Kanchan

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