परिवार नियोजन में लैंगिक समानता की ओर कदम: WHO ने जारी किए पुरुषों के नए रिवर्सिबल ‘गर्भनिरोधक मानक’; भारत में महिलाओं पर टिका है नसबंदी का 98% बोझ

विश्व स्वास्थ्य संगठन का ‘टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल’ तैयार; अगले 5 से 10 वर्षों में बाजार में आ सकती हैं पुरुषों की पिल्स व जेल; NFHS-6 के आंकड़ों ने उजागर की भारत में गहरी असमानता।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इतिहास में पहली बार पुरुषों के लिए नए जमाने के रिवर्सिबल (पुनः प्रजनन क्षमता लौटाने वाले) गर्भनिरोधकों के विकास के लिए वैश्विक मानक (Target Product Profiles – TPPs) जारी कर दिए हैं। डब्लूएचओ का यह रोडमैप शोधकर्ताओं और फार्मा कंपनियों के लिए एक गाइडबुक की तरह काम करेगा, जिसके तहत पुरुषों के लिए दैनिक पिल्स (Pills), जेल (Gels), लंबे समय तक असरदार इंजेक्शन्स और इम्प्लांट्स विकसित किए जा रहे हैं। यह वैश्विक पहल भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, जहां राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में प्रजनन दर (Fertility Rate) कम होने के बावजूद परिवार नियोजन का लगभग पूरा बोझ आज भी केवल महिलाओं पर ही है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले लगभग 48% गर्भधारण अनियोजित होते हैं। पुरुषों के पास वर्तमान में केवल दो ही मुख्य विकल्प—कंडोम या स्थायी पुरुष नसबंदी (Vasectomy)—मौजूद हैं। डब्लूएचओ के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुरुषों को नए और आसान विकल्प देना केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि लैंगिक समानता (Gender Equality) का मुद्दा है। भारत में जहां महिला नसबंदी का आंकड़ा 36.5 प्रतिशत है, वहीं पुरुष नसबंदी घटकर महज 0.5 प्रतिशत रह गई है। ऐसे में पुरुषों के लिए नए रिवर्सिबल विकल्पों का आना भारत में परिवार नियोजन की जिम्मेदारी को पति और पत्नी दोनों के बीच समान रूप से बांटने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

1. WHO का नया ‘ब्लूप्रिंट’: क्या होंगे नए पुरुष गर्भनिरोधक और उनके मानक?

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मानकों के तहत नए पुरुष गर्भनिरोधकों से निम्नलिखित उम्मीदें की गई हैं:

  • तीन प्रमुख वैज्ञानिक तरीके: शुक्राणु उत्पादन को रोकना (Suppressing Sperm Production), शुक्राणु की गतिशीलता को निष्क्रिय करना (Inhibiting Sperm Function) और शुक्राणु के मार्ग को अवरुद्ध करना।
  • 90% से अधिक प्रभावकारिता: डब्लूएचओ के अनुसार, किसी भी नए उत्पाद को 12 हफ्तों के भीतर शुक्राणुओं की संख्या को 1 मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम करना होगा और 12 महीने में प्रेग्नेंसी रेट 7% से कम रखना होगा।
  • 6 महीने में रिवर्सिबिलिटी: दवा या जेल बंद करने के 6 महीने के भीतर शुक्राणुओं की संख्या और पुरुष की प्रजनन क्षमता स्वाभाविक रूप से सामान्य (Normal Reference Range) हो जानी चाहिए।
  • उपलब्धता की समय-सीमा: डब्लूएचओ का अनुमान है कि जारी क्लिनिकल ट्रायल्स के सफल रहने पर अगले 5 से 10 वर्षों (वर्ष 2031 तक) में ये उत्पाद मेडिकल स्टोर्स पर उपलब्ध हो सकते हैं।

2. भारत का ‘NFHS-6’ डेटा: परिवार नियोजन में क्यों है भारी लैंगिक असंतुलन?

भारत ने भले ही अपनी कुल प्रजनन दर (TFR) को प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) से नीचे ला दिया हो, लेकिन परिवार नियोजन के तरीकों में भारी विषमता है:

  • महिला नसबंदी बनाम पुरुष नसबंदी: एनएफएचएस-6 (2023-24) के अनुसार, 36.5% विवाहित महिलाएं नसबंदी (Female Sterilisation) चुनती हैं, जबकि केवल 0.5% पुरुषों ने नसबंदी (Male Sterilisation) कराई है (जो एनएफएचएस-1 के 3.4% से भी नीचे गिर चुका है)।
  • आधुनिक तरीकों में गिरावट और पारंपरिक तरीकों में बढ़ोतरी: पिल्स, आईयूडी और कंडोम जैसे आधुनिक तरीकों के उपयोग में मामूली गिरावट आई है, जबकि साइड-इफेक्ट्स के डर और जागरूकता की कमी के कारण पारंपरिक तरीकों (Rhythm & Withdrawal) का उपयोग बढ़ा है।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक भ्रांतियां: भारत में पितृसत्तात्मक सोच और यह भ्रांति कि पुरुष नसबंदी से शारीरिक कमजोरी आती है, पुरुषों को परिवार नियोजन की जिम्मेदारी लेने से रोकती है।

3. भारतीय स्वदेशी तकनीक ‘RISUG’: दुनिया के लिए एक उम्मीद

पुरुषों के गैर-हार्मोनल गर्भनिरोधक के मामले में भारत पहले से ही दुनिया का नेतृत्व कर रहा है:

  1. ICMR का ‘रिसग’ (RISUG) इंजेक्शन: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा विकसित RISUG (Reversible Inhibition of Sperm Under Guidance) एक गैर-हार्मोनल पॉलिमर जेल इंजेक्शन है, जो नसबंदी का एक सुरक्षित और नॉन-सर्जिकल विकल्प है।
  2. 99% सफलता और पूर्ण रिवर्सिबिलिटी: अंतिम चरण (Phase 3) के क्लिनिकल परीक्षणों में इस इंजेक्शन ने 99.02% गर्भनिरोधक प्रभावकारिता दर्ज की है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक अन्य सुरक्षित सॉल्वेंट इंजेक्शन के जरिए इसे कभी भी निष्क्रिय कर पुरुष की प्रजनन क्षमता वापस लाई जा सकती है।
  3. अंतरराष्ट्रीय परीक्षणों में अन्य विकल्प: भारत के RISUG के अलावा अमेरिका में ‘ADAM’ hydrogel और ‘NES/T’ नामक हार्मोनल जेल के भी इंसानी परीक्षण तेजी से चल रहे हैं।

निष्कर्ष 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पुरुष गर्भनिरोधकों के लिए जारी वैश्विक मानक केवल एक चिकित्सीय प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का शंखनाद हैं। भारत जैसे देश में, जहां परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक के दुष्परिणामों का पूरा दर्द केवल महिलाओं को सहना पड़ता है, पुरुषों के लिए नए रिवर्सिबल विकल्पों (जैसे पिल्स, जेल और RISUG) का आगमन एक वरदान साबित हो सकता है। जब पुरुष और महिला दोनों के पास सुरक्षित और सुलभ विकल्प होंगे, तभी परिवार नियोजन में सही अर्थों में लैंगिक समानता स्थापित हो सकेगी।

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द्वारा Kanchan

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