न धूम्रपान, न कोलेस्ट्रॉल, फिर भी दिल का दौरा: 30-40 की उम्र में फिट महिलाओं को शिकार बना रही ‘SCAD’ बीमारी; कार्डियोलॉजिस्ट्स ने जारी की चेतावनी
धमनी में ब्लॉकेज से नहीं, बल्कि अंदरूनी दीवार फटने से रुकता है खून का बहाव; 50 से कम उम्र की महिलाओं में एक-तिहाई हार्ट अटैक का कारण बनी ‘स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डाइसेक्शन’।
अब तक यह माना जाता था कि महिलाओं में एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन की मौजूदगी उन्हें रजोनिवृत्ति (Menopause) से पहले दिल के दौरों से सुरक्षित रखती है। लेकिन हाल के वर्षों में 30 और 40 वर्ष की आयु वर्ग की पूरी तरह स्वस्थ, फिट और एथलीट महिलाओं में बिना किसी पारंपरिक रिस्क फैक्टर (जैसे डायबिटीज, हाई बीपी, धूम्रपान या कोलेस्ट्रॉल) के अचानक हार्ट अटैक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। हृदयरोग विशेषज्ञों (Cardiologists) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने चेतावनी जारी करते हुए ‘स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डाइसेक्शन’ (SCAD) नामक बीमारी को उजागर किया है। यह एक दुर्लभ और कम पहचान में आने वाली स्थिति है, जो युवा और मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में अचानक दिल के दौरे का प्रमुख कारण बन रही है।
SCAD में दिल का दौरा सामान्य हार्ट अटैक से बिल्कुल अलग होता है। पारंपरिक हार्ट अटैक में वर्षों से जमा कोलेस्ट्रॉल या थक्का (Plaque) धमनी को बंद कर देता है, जबकि SCAD में हृदय को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी की अंदरूनी दीवार में अचानक एक चीरा (Tear) या खरोंच आ जाती है। इस चीरे के अंदर खून भर जाने से एक हेमेटोमा (थक्का) बन जाता है, जो धमनी को बाहर से दबा देता है और दिल तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, SCAD के कुल मामलों में से 80 से 90 प्रतिशत मरीज महिलाएं होती हैं, और 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में होने वाले कुल हार्ट अटैक में से एक-तिहाई (30-35%) मामले SCAD के ही पाए जाते हैं।
1. सामान्य हार्ट अटैक और SCAD में क्या है अंतर?
मेडिकल साइंस के अनुसार दोनों स्थितियों के कारण और लक्षण एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं:
| तुलना का पहलू (Parameter) | पारंपरिक हार्ट अटैक (Classic Heart Attack) | SCAD (स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डाइसेक्शन) |
|---|---|---|
| मूल कारण (Cause) | एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनी में फैट/कोलेस्ट्रॉल जमा होना) | कोरोनरी धमनी की अंदरूनी परत का स्वतः फट जाना |
| प्रभावित वर्ग (Target Group) | आमतौर पर वृद्ध पुरुष व महिलाएं, धूम्रपान करने वाले या बीपी/शुगर के मरीज | 30–50 वर्ष की स्वस्थ, फिट महिलाएं और एथलीट्स |
| हार्मोनल संबंध (Hormonal Link) | मुख्य रूप से जीवनशैली और उम्र से जुड़ा | गर्भवती, हाल ही में मां बनी (Postpartum) महिलाओं में अधिक |
| उपचार का तरीका (Treatment) | स्टेंट (Stenting) या बाईपास सर्जरी प्राथमिकता | अक्सर दवाइयों से स्वतः ठीक होना (Conservative Management) |
2. क्यों होती है युवा महिलाएं SCAD का शिकार?
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, SCAD के सटीक कारणों पर शोध जारी है, लेकिन कुछ प्रमुख कारक चिह्नित किए गए हैं:
- गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवधि (Postpartum Period): SCAD के लगभग 5 से 10 प्रतिशत मामले बच्चे के जन्म के पहले हफ्ते (Postpartum Week) में देखे जाते हैं, जो शरीर में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन के अचानक बदलाव और रक्त वाहिकाओं के ढीले पड़ने से जुड़े हैं।
- कनेक्टिव टिश्यू विकार (Connective Tissue Disorders): फाइब्रोमस्कुलर डिसप्लेसिया (FMD) या वैस्कुलाइटिस जैसी बीमारियों से पीड़ित महिलाओं में धमनियों की दीवारें कमजोर होती हैं।
- अत्यधिक शारीरिक या मानसिक तनाव: अचानक किया गया बहुत भारी व्यायाम (Strenuous Exercise) या अत्यधिक भावनात्मक तनाव भी धमनी पर दबाव डालकर चीरा लगा सकता है।
3. पहचान में देरी और आपातकालीन बचाव के उपाय
SCAD का समय पर सही निदान न होना ही सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है:
- आपातकालीन कक्षों में भ्रम: मरीज का वजन सामान्य होने, धूम्रपान न करने और युवा दिखने के कारण इमरजेंसी रूम (ER) में डॉक्टर अक्सर सीने के दर्द को एसिडिटी या एंग्जायटी मान लेते हैं।
- प्रमुख लक्षण (Warning Signs): सीने में तेज दबाव या जकड़न, दर्द का बाएं हाथ, कंधे, गर्दन या पीठ तक जाना, अचानक सांस फूलना, ठंडा पसीना आना और चक्कर आना।
- एंजियोग्राफी (Angiography) से सही पहचान: कोरोनरी एंजियोग्राम और इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) के जरिए ही SCAD की सटीक पहचान की जा सकती है।
निष्कर्ष
‘स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डाइसेक्शन’ (SCAD) यह साबित करता है कि दिल की बीमारियां केवल अस्वस्थ जीवनशैली या बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। 30 और 40 की उम्र की महिलाएं, जो खुद को पूरी तरह फिट मानती हैं, यदि वे सीने में भारीपन या असामान्य दर्द का अनुभव करें तो इसे कतई नजरअंदाज न करें। चिकित्सा जगत में भी SCAD को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि आपातकालीन स्थिति में युवा महिलाओं को तुरंत सही एंजियोग्राफी परीक्षण और उपचार मिल सके।


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