बिज़नेस क्लाइमेट सर्वे 2026: 41 देशों में भारत बना सबसे पसंदीदा कारोबारी ठिकाना
स्वीडिश चैंबर ऑफ कॉमर्स के बिज़नेस क्लाइमेट सर्वे 2026 में भारत ने 41 वैश्विक बाजारों में पहला स्थान हासिल किया है। जानें भारत की इस उपलब्धि के पीछे के आंकड़े, FDI का बड़ा उछाल और सुधारों की पूरी कहानी।
वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। स्वीडिश चैंबर ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (SCCI) द्वारा जारी बिज़नेस क्लाइमेट सर्वे 2026 में भारत ने दुनिया के 41 प्रमुख बाजारों के बीच कारोबारी माहौल के मामले में पहला स्थान हासिल किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 18 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे भारत की स्थिरता, विकास संभावनाओं और कारोबार सुगमता में लगातार हो रहे सुधार का नतीजा बताया।
सर्वे में क्या खास रहा
यह सर्वे स्वीडिश कंपनियों के अनुभवों और उनकी राय पर आधारित है, जिसमें उन्होंने अलग-अलग देशों में आर्थिक प्रदर्शन, कारोबारी नजरिया और परिचालन स्थितियों की तुलना की। इस बार का 2026 संस्करण अब तक का सबसे बड़ा है, जिसमें रिकॉर्ड 41 बाजारों को शामिल किया गया। भारत में सक्रिय 213 स्वीडिश कंपनियों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में सामने आया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र सबसे ज्यादा आशावादी क्षेत्र बनकर उभरा, जिसमें भारत और वियतनाम को सबसे बेहतर रेटिंग मिली। इसके उलट, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में कंपनियों का रुझान कहीं ज्यादा सतर्क दिखा — सऊदी अरब में सकारात्मक नजरिया रखने वाली कंपनियों का प्रतिशत 2025 के 90 प्रतिशत से घटकर 2026 में सीधे 44 प्रतिशत पर आ गया।
बिज़नेस स्वीडन के मुताबिक भारत में सक्रिय स्वीडिश कंपनियां लगातार मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और ऊंची विकास संभावनाएं दर्ज कर रही हैं, और इनमें से ज्यादातर कंपनियां आने वाले साल में अपना निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि वृद्धि के अनुमान के मामले में भारत, फिलीपींस और पोलैंड सबसे आगे रहे, जबकि लाभप्रदता के मामले में 64 प्रतिशत स्वीडिश कंपनियों ने सर्वेक्षित बाजारों में मुनाफा कमाने की बात कही।
एक ध्यान देने वाली बात — सर्वे का समय भी अहम
रिपोर्ट में एक जरूरी तथ्य भी शामिल किया गया है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। इस सर्वे के करीब 75 प्रतिशत जवाब 28 फरवरी 2026 से पहले जुटाए गए थे, यानी पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष से पहले, जबकि बाकी 25 प्रतिशत जवाब उसके बाद के हैं। रिपोर्ट खुद यह मानती है कि इस वजह से युद्ध से जुड़े असर का पूरा असर इस सर्वे में शायद ही झलका हो, इसलिए नतीजों को थोड़ी सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।
पीयूष गोयल का बयान
पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि को लेकर कहा कि भारत अब दुनिया का सबसे पसंदीदा कारोबारी ठिकाना बन चुका है, और वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत का कारोबारी माहौल स्थिरता, विकास और कारोबार सुगमता के लिए एक “स्वर्णिम मानक” तय कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत लगातार चार वर्षों से वैश्विक शीर्ष तीन में अपनी जगह बनाए हुए है, जो इस साल पहले स्थान तक पहुंच गया।
आंकड़ों से समझें भारत की असली तस्वीर
गोयल का यह दावा सिर्फ एक अकेले सर्वे पर आधारित नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में सामने आए आर्थिक आंकड़े भी इस उपलब्धि को मजबूती देते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत को कुल 58.85 अरब डॉलर की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इक्विटी प्राप्त हुई, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 18 प्रतिशत ज्यादा है, जबकि कुल FDI प्रवाह के आधार पर यह आंकड़ा 90 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जो एक तरह से एक नया कीर्तिमान है। साल 2000 से अब तक भारत में कुल संचयी FDI 1.16 खरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है।
इसके पीछे एक बड़ी वजह पिछले कुछ वर्षों में हुए नियामकीय सुधार भी हैं। सरकार के “रेगुलेटरी कंप्लायंस बर्डन” घटाने वाले कार्यक्रम के तहत 670 से ज्यादा कानूनों में मौजूद 42 हजार से अधिक अनुपालन शर्तों को खत्म किया जा चुका है, वहीं जन विश्वास एक्ट के जरिए दर्जनों कानूनों के तहत कई प्रावधानों को अपराधमुक्त कर सिविल जुर्माने में बदला गया है। इसी का नतीजा है कि विश्व बैंक के पुराने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत 2014 के 142वें स्थान से 2020 तक 63वें स्थान पर पहुंच चुका था, और उसके बाद से भी सुधारों की यह रफ्तार लगातार जारी है।
निवेशकों के लिए भारत क्यों बना पहली पसंद
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की इस बढ़त के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं — बड़ी और युवा उपभोक्ता आबादी, तेजी से बढ़ता घरेलू बाजार, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों की बड़ी निवेश प्रतिबद्धताएं, और यूरोप के साथ हुए EFTA जैसे नए व्यापार समझौते। सेवा क्षेत्र, खासकर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), आईटी सेवाएं और डिजिटल इंजीनियरिंग, अब भी विदेशी निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे बना हुआ है।

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