ट्रंप के तनाव के बीच मैक्रों और कार्नी ने बढ़ाई फ्रांस-कनाडा की नजदीकियां, अटलांटिक के द्वीप पर हुई ऐतिहासिक मुलाकात

अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच कनाडा ने यूरोप के साथ अपने रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी रविवार, 20 सितंबर 2026 को सेंट पियर-एट-मिकलों में मिले, जो न्यूफाउंडलैंड के तट से करीब 20-25 किलोमीटर दूर स्थित एक फ्रांसीसी विदेशी क्षेत्र है। यह किसी भी कनाडाई प्रधानमंत्री की इस द्वीपसमूह की पहली आधिकारिक यात्रा है।

कहां हुई यह मुलाकात और क्यों है खास

सेंट पियर-एट-मिकलों करीब 5,800 से 6,000 लोगों की आबादी वाला एक छोटा-सा फ्रांसीसी स्वशासित क्षेत्र है, जो भौगोलिक रूप से कनाडा के बेहद करीब है, लेकिन राजनीतिक रूप से फ्रांस का हिस्सा है। इस द्वीप को खासतौर पर इसलिए भी चुना गया, क्योंकि कुछ हफ्ते पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें इस द्वीपसमूह को अमेरिकी झंडे से ढका हुआ दिखाया गया था। ऐसे माहौल में मैक्रों और कार्नी की यह मुलाकात एक स्पष्ट संदेश देने वाली मानी जा रही है। मैक्रों ने द्वीप पर पहुंचने पर कहा कि यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, और बातचीत से दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों और रक्षा साझेदारी को मजबूती मिलेगी।

किन क्षेत्रों में हुआ सहयोग का ऐलान

दोनों नेताओं ने एयरोस्पेस, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और क्वांटम, सैटेलाइट व सुपरकंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों में सहयोग गहरा करने पर चर्चा की। कार्नी ने पत्रकारों को बताया कि दोनों देश अपनी अंतरिक्ष एजेंसियों और रक्षा मंत्रालयों को साझा बुनियादी ढांचा विकसित करने और साझा करने का जिम्मा सौंपेंगे, जिसमें अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली और ग्राउंड-आधारित रिसेप्शन सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों के वाणिज्य मंडल भी आपस में करीब आ रहे हैं, और आने वाले हफ्तों में फ्रेंच व कनाडाई चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार दोनों नेताओं ने कनाडा और यूरोपीय संघ (EU) के बीच भविष्य के गठबंधन से जुड़ी संभावनाओं पर भी चर्चा की, जो साझा मूल्यों पर आधारित और पूरक रणनीतिक क्षमताओं पर टिका होगा, ताकि दोनों पक्षों की संप्रभुता और समृद्धि मजबूत हो सके। साथ ही दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय संयुक्त सहयोग आयोग को आर्थिक एकीकरण व व्यापार विविधीकरण, ऊर्जा संक्रमण, जलवायु अनुकूलन और सीमा पार सुरक्षा जैसे चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अपना काम बढ़ाने की जिम्मेदारी भी सौंपी।

ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बढ़ी कनाडा की बेचैनी

यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ, आर्थिक रियायतों की मांग और कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने जैसी बार-बार आती टिप्पणियों ने ओटावा को अपने पड़ोसी देश पर निर्भरता घटाने और यूरोप के साथ गहरे आर्थिक, सुरक्षा व राजनीतिक रिश्ते बनाने के लिए प्रेरित किया है। कुछ दिन पहले ही कार्नी ने यह संकेत भी दिया था कि कनाडा यूरोपीय संघ का पहला सहयोगी सदस्य (एसोसिएट मेंबर) बनने की संभावना को अपना सकता है, उनका कहना था कि यूरोप के साथ करीबी रिश्ते यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी एक देश कनाडा के बाजारों को नियंत्रित न कर सके या उसकी संप्रभुता को कमजोर न कर सके।

1941 के इतिहास से भी जुड़ी है यह मुलाकात

इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने एक स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जो दिसंबर 1941 में फ्री फ्रांस के स्वयंसेवकों की याद में बनाया गया था। उसी महीने फ्री फ्रेंच फोर्सेज ने इस द्वीपसमूह को नाज़ी जर्मनी का साथ देने वाले विची शासन के नियंत्रण से शांतिपूर्ण तरीके से मुक्त कराया था। दोनों नेताओं ने इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए योगदान दिया।

फ्रांस के लिए ऊर्जा सुरक्षा भी है मकसद

राष्ट्रपति मैक्रों ने यह भी कहा कि रविवार की बातचीत फ्रांस के लिए तेल और गैस आपूर्ति सुरक्षित करने के व्यापक प्रयासों का भी हिस्सा है, खासतौर पर ऐसे समय में जब ईरान के साथ चल रहा युद्ध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा डाल रहा है। इससे यह साफ होता है कि यह मुलाकात सिर्फ प्रतीकात्मक कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक जरूरतें भी काम कर रही हैं।

आगे क्या होगा

कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक कार्नी की यह यूरोप यात्रा तीन दिन की है, जिसमें वे स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद को भी संबोधित करने वाले हैं और यूरोपीय संघ के स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा इसी यात्रा के दौरान उनकी पहली बार ब्रिटेन के अपने समकक्ष नेता से भी मुलाकात होने वाली है। यह पूरी यात्रा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कनाडा अब अपनी विदेश नीति में यूरोप को कहीं ज्यादा केंद्रीय भूमिका देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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द्वारा Kanchan

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