तिहाड़ जेल: तिहाड़ जेल में 5 साल में मिले 350 मोबाइल फोन, टॉयलेट से लेकर गमलों तक छिपाए जा रहे थे फोन
देश की सबसे चर्चित जेलों में शामिल तिहाड़ जेल एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। दिल्ली के इस बड़े जेल परिसर में कैदियों तक प्रतिबंधित मोबाइल फोन पहुंचने का मामला सामने आया है। अक्टूबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर 3 में वर्ष 2020 से 2025 के बीच 350 मोबाइल फोन बरामद किए गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर फोन बेहद छोटे आकार के थे, जिन्हें जेल के भीतर अलग-अलग जगहों पर छिपाया गया था।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर सामने आए इन आंकड़ों ने जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित सामान की तस्करी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तिहाड़ जेल: पांच साल में 350 मोबाइल फोन बरामद
तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर 3 से 2020 से 2025 के बीच मोबाइल फोन और उनसे जुड़े उपकरणों की 285 बरामदगी दर्ज की गई। इन घटनाओं में कुल 350 मोबाइल फोन मिले।
बरामद किए गए मोबाइल फोन में से 202 फोन चीन की कंपनी केचिओदा (Kechaoda) के छोटे आकार वाले मॉडल थे। इनकी हिस्सेदारी कुल बरामदगी में लगभग 58 प्रतिशत रही। वहीं, 88 फोन सैमसंग डुओस के थे, जो कुल बरामदगी का लगभग 25 प्रतिशत है।
इसके अलावा ओप्पो, रेडमी, वीवो, रियलमी और दूसरे कम कीमत वाले मोबाइल फोन भी मिले। जांच के दौरान 17 ऐसे फोन भी बरामद हुए, जिनके आईएमईआई (IMEI) नंबर मिटा दिए गए थे, ताकि उनकी पहचान करना मुश्किल हो सके।
टॉयलेट की टंकी, पानी के पाइप और गमलों में छिपाए गए मोबाइल
तिहाड़ जेल में मोबाइल फोन छिपाने के तरीके भी काफी चौंकाने वाले रहे। रिपोर्ट में बताया गया कि तलाशी के दौरान फोन टॉयलेट की टंकियों, पानी के पाइप, दीवारों के खाली हिस्सों और गमलों के नीचे से मिले।
कुछ मोबाइल फोन आरओ वॉटर प्यूरीफायर के अंदर भी छिपाए गए थे। एक मामले में फोन कैदी की पीठ पर बांधा हुआ मिला। इसके अलावा प्लास्टिक के डिब्बों और टिफिन में भी मोबाइल छिपाने के मामले सामने आए।
जेल प्रशासन के सामने केवल मोबाइल फोन की बरामदगी ही चुनौती नहीं है, बल्कि उनके इस्तेमाल के लिए जरूरी उपकरणों को रोकना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसी अवधि के दौरान 19 हाथ से बनाए गए मोबाइल चार्जर भी बरामद किए गए। जून 2023 की एक तलाशी में सात फोन के साथ सात ऐसे ही चार्जर मिले थे।
तिहाड़ जेल: सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए?
जेल परिसर के भीतर प्रतिबंधित मोबाइल फोन के इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रशासन ने कई उपाय किए हैं। इनमें मोबाइल सिग्नल रोकने वाले जैमर, सीसीटीवी कैमरे और बैरकों तथा शौचालयों में अचानक तलाशी अभियान शामिल हैं।
इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, कैदियों की तलाशी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर जांच की जाती है। रिपोर्ट में तमिलनाडु विशेष पुलिस के जवानों द्वारा तलाशी अभियान में सहयोग किए जाने का भी उल्लेख है।
हालांकि, बरामदगी के आंकड़े बताते हैं कि सुरक्षा के इन उपायों के बावजूद जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचने के रास्तों को पूरी तरह बंद करना चुनौती बना हुआ है।
तिहाड़ जेल में क्षमता से अधिक कैदी, आंकड़ों में सामने आई बड़ी चुनौती
तिहाड़ जेल की सुरक्षा के साथ-साथ दिल्ली की जेलों में कैदियों की संख्या भी एक गंभीर मुद्दा है। दिल्ली जेल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 30 जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के सभी 16 जेलों की निर्धारित क्षमता 10,026 कैदियों की है, जबकि वहां कुल 20,961 कैदी बंद थे।
इन आंकड़ों में 18,517 विचाराधीन कैदी शामिल थे। यानी कुल कैदियों में लगभग 88 प्रतिशत ऐसे लोग थे, जिनके मुकदमों का अंतिम फैसला नहीं हुआ था।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आंकड़े केवल तिहाड़ जेल के नहीं, बल्कि तिहाड़, रोहिणी और मंडोली सहित दिल्ली के सभी 16 जेलों के संयुक्त आंकड़े हैं।
दिल्ली जेल प्रशासन के अनुसार, तिहाड़ परिसर में नौ केंद्रीय जेल हैं। बढ़ती कैदी संख्या के दबाव को कम करने के लिए मंडोली जेल परिसर विकसित किया गया था। इसके अलावा नरेला और बापरोला में नई जेल बनाने का प्रस्ताव भी विभाग की वेबसाइट पर दर्ज है।
तिहाड़ जेल: देश की सबसे चर्चित जेलों में क्यों है शामिल?
तिहाड़ जेल की शुरुआत वर्ष 1958 में हुई थी। दिल्ली सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उस समय इसकी स्वीकृत क्षमता 1,273 कैदियों की थी। समय के साथ जेल परिसर का विस्तार किया गया और यहां अलग-अलग श्रेणियों के कैदियों को रखने के लिए कई केंद्रीय जेलें स्थापित की गईं।
आज तिहाड़ केवल एक कारागार नहीं, बल्कि भारतीय जेल व्यवस्था, सुरक्षा, कैदियों के अधिकार और सुधार कार्यक्रमों से जुड़ी बहस का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
हालिया मोबाइल फोन बरामदगी की रिपोर्ट ने एक बार फिर दिखाया है कि जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ-साथ प्रभावी प्रशासन और कैदियों के सुधार पर भी ध्यान देना जरूरी है।
