टाटा संस में घमासान: चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का एक्सटेंशन, टाटा ट्रस्ट्स ने बताया ‘अवैध’, शेयरों में उथल-पुथल
टाटा समूह की सबसे बड़ी होल्डिंग कंपनी टाटा संस में इन दिनों नेतृत्व को लेकर बड़ा घमासान मचा हुआ है। एक तरफ कंपनी के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को चेयरमैन पद पर पांच साल का नया कार्यकाल दे दिया है, तो दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को ‘अवैध’ करार देते हुए सीधी चुनौती दे दी है। इस पूरे घटनाक्रम का असर सीधे शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां टाटा समूह के शेयरों में पहले तेज उछाल और फिर उतनी ही तेज गिरावट देखने को मिली।
पहले था इस्तीफे का ऐलान
गौरतलब है कि एन. चंद्रशेखरन 21 फरवरी 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं, और फरवरी 2022 में उन्हें दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त किया गया था, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने वाला था। 12 अगस्त 2026 को चंद्रशेखरन ने खुद ऐलान किया था कि वे अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए दावेदारी नहीं करेंगे। इस ऐलान के बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक चयन समिति बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।
अचानक पलटा फैसला
लेकिन 17 सितंबर 2026 को मुंबई में हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक में यह पूरा परिदृश्य अचानक बदल गया। सूत्रों के मुताबिक बोर्ड ने चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने का फैसला किया, साथ ही टाटा संस की लिस्टिंग यानी उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस निर्देश के अनुपालन में लिया गया, जिसमें टाटा संस को अपना गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) लाइसेंस सरेंडर करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था — जिसका मतलब है कि कंपनी को अब सार्वजनिक लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना अनिवार्य हो गया है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार इस फैसले के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा बोर्ड में अल्पमत में रह गए और उन्हें वोटिंग में पछाड़ दिया गया।
शेयरों में पहले आई तेज उछाल
बोर्ड के फैसले की खबर सामने आते ही 17 सितंबर को टाटा समूह के शेयरों में भारी उछाल देखने को मिला। टाटा केमिकल्स का शेयर इंट्राडे में 14 प्रतिशत तक उछलकर 831 रुपये पर पहुंच गया, और अंत में यह 5.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 774 रुपये पर बंद हुआ। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन 5.63 प्रतिशत बढ़कर 719.25 रुपये पर, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 4.52 प्रतिशत बढ़कर 314.65 रुपये पर, और टाटा स्टील 2.82 प्रतिशत बढ़कर 188 रुपये पर बंद हुआ। दरअसल टाटा केमिकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, दोनों कंपनियों की टाटा संस में सीधी हिस्सेदारी है (क्रमशः 2.53 प्रतिशत और 0.08 प्रतिशत), इसलिए टाटा संस की संभावित लिस्टिंग की खबर का इन शेयरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा।
टाटा ट्रस्ट्स ने बताया ‘अवैध’
लेकिन यह तेजी ज्यादा दिन नहीं टिक पाई। टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने अपने बयान में दोहराया कि चंद्रशेखरन का दोबारा नियुक्ति न लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था और यह फैसला “अंतिम रूप ले चुका है।” ट्रस्ट्स ने बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को सीधे तौर पर “अवैध” करार दिया। नोएल टाटा ने बोर्ड को दिए अपने बयान में कहा कि चंद्रशेखरन का 12 अगस्त का संदेश उनका “अपना फैसला” था, जो “स्वतंत्र रूप से लिया गया और स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया” था। उन्होंने यह भी कहा कि इस पत्र को टाटा ट्रस्ट्स के साथ पहले कोई विचार-विमर्श किए बिना ही सार्वजनिक कर दिया गया था।
इसके बाद 18 सितंबर को टाटा समूह के शेयरों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली। टाटा केमिकल्स का शेयर NSE पर 7.9 प्रतिशत गिरकर 718.70 रुपये पर आ गया, जबकि टाटा इन्वेस्टमेंट 4.35 प्रतिशत गिरकर 688 रुपये पर और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 3.02 प्रतिशत गिरकर 305 रुपये पर आ गया।
AGM का मामला भी अभी अनसुलझा
इस पूरे विवाद के बीच टाटा संस की 108वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) का मामला भी अभी अनसुलझा है। 18 अगस्त को प्रस्तावित यह बैठक जरूरी कोरम पूरा न होने के चलते स्थगित करनी पड़ी थी। कंपनी रजिस्ट्रार ने टाटा संस को इस बैठक को आयोजित करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक की मोहलत दी है, जबकि मूल समयसीमा 30 सितंबर थी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल टाटा संस के सामने तीन बड़े अनसुलझे मुद्दे एक साथ खड़े हैं — चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करना, RBI के निर्देश के मुताबिक कंपनी की सार्वजनिक लिस्टिंग को आगे बढ़ाना, और लंबित वार्षिक आम बैठक को पूरा करना। टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से इस फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किए जाने की भी खबरें हैं। भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में गिने जाने वाले टाटा समूह के लिए यह गवर्नेंस विवाद आने वाले हफ्तों में और तूल पकड़ सकता है, और निवेशकों की नजरें अब इस मामले के अगले घटनाक्रम पर टिकी रहेंगी।

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