आतंकवाद पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के दोहरे मापदंड: भारत ने कहा—’पहले सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ करो ठोस कार्रवाई’
पेशावर में टीटीपी और बीएलए को कुचलने का मुनीर का दावा; भारत ने लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के पुनर्गठन पर दुनिया के सामने खोली पोल।
नई दिल्ली / इस्लामाबाद: पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Field Marshal Asim Munir) द्वारा पेशावर कोर मुख्यालय के दौरे के दौरान आतंकवाद को खत्म करने के दिए गए बयान पर भारत ने कड़ा कूटनीतिक रुख अपनाया है। 23 सितंबर 2026 को भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया इस्लामाबाद के खोखले दावों पर तब तक भरोसा नहीं करेगी, जब तक वह सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) के खिलाफ जमीन पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखाता।
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लगातार हमलों से बौखलाई पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर ने पेशावर में सुरक्षा समीक्षा के दौरान आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प जताया। हालांकि, भारतीय सुरक्षा विश्लेषकों और खुफिया एजेंसियों का कहना है कि मुनीर का यह बयान केवल टीटीपी और बीएलए तक सीमित है, जबकि भारत के खिलाफ सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तानी सेना की देखरेख में नया जीवन दिया जा रहा है।
1. ‘दिखावे का आतंकवाद-विरोधी रुख’: भारत ने उजागर की हकीकत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जब तक भारत के खिलाफ अपनी धरती से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त नहीं करता, तब तक उसके दावों की कोई साख नहीं है:
- लश्कर और जैश का पुनर्गठन: भारतीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान भारत में हिंसा फैलाने वाले आतंकी गुटों के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने में लगा हुआ है।
- जम्मू-कश्मीर पर दोहरा रवैया: पाकिस्तान एक तरफ टीटीपी और बलूच लड़ाकों को ‘आतंकवादी’ घोषित करता है, वहीं जम्मू-कश्मीर में निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वाले जिहादी गुटों को ‘स्वतंत्रता संग्राम’ का नाम देकर संरक्षण देता है।
2. सेना में फेरबदल और शक्ति का संकेंद्रण
हाल ही में पारित कानूनों के बाद सेना पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर चुके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पाकिस्तानी सेना की शीर्ष कमान में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया है:
- आईएसआई और मिलिट्री इंटेलिजेंस में वफादार: मिलिट्री इंटेलिजेंस (DG MI) और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के संवेदनशील पदों पर मुनीर के करीबी और वफादार अधिकारियों की नियुक्तियां की गई हैं।
- आंतरिक सुरक्षा संकट: खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को हो रहे भारी नुकसान के बीच इन नियुक्तियों को सेना प्रमुख द्वारा अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर द्वारा आतंकवाद के खिलाफ दिया गया बयान उनकी घरेलू राजनीतिक और सुरक्षा चिंताओं को छिपाने का एक प्रयास मात्र है। जब तक पाकिस्तान भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों और उनकी पनाहगाहों के खिलाफ निर्णायक और सत्यापनीय कदम नहीं उठाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत के लिए उनकी ऐसी घोषणाएं महज कूटनीतिक छलावा ही रहेंगी।

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