भारतीय वायु सेना का वैश्विक सामरिक शक्ति प्रदर्शन: जोधपुर में ‘तरंग शक्ति-26’ का आगाज, अमेरिकी F-35 और स्वदेशी ‘तेजस’ दिखाएंगे आसमान में पराक्रम

लगभग 40 देशों की वायु सेनाएं लेंगी हिस्सा; 160 ‘स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन’ के लिए ₹811 करोड़ का करार और तेजस एमके-1ए की बेड़े में जल्द होगी शामिलगी।

भारत की हवाई सीमाओं के प्रहरी भारतीय वायु सेना (IAF) ने अपनी सामरिक क्षमताओं, वैश्विक साझेदारियों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक नया ऐतिहासिक अध्याय लिख दिया है। सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह से राजस्थान के जोधपुर वायु सेना स्टेशन पर भारत के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय वायु रक्षा युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ (Exercise Tarang Shakti 26) के दूसरे संस्करण का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस मेगा एयर शो में दुनिया भर के लगभग 40 देशों के उन्नत लड़ाकू विमान और रक्षा विशेषज्ञ एक साथ थल और नभ में अपनी युद्ध कौशल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

‘तरंग शक्ति-2026’ का सबसे बड़ा आकर्षण पहली बार भारतीय आकाश में अमेरिकी F-35 स्टील्थ (अदृश्य) लड़ाकू विमानों का भारतीय वायु सेना के अग्रिम पंक्ति के राफेल (Rafale), सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस (Tejas) के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास करना है। इस युद्धाभ्यास के साथ ही, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता को अचूक बनाने के लिए ₹811 करोड़ की लागत से 160 स्वदेशी ‘स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन’ (SAT-SAAW) की आपूर्ति के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

1. ‘तरंग शक्ति-26’: अमेरिकी F-35 और भारतीय राफेल का एरियल कॉम्बैट

जोधपुर के आसमान में शुरू हो रहा यह युद्धाभ्यास भारतीय रक्षा इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा:

  • F-35 स्टील्थ विमानों का पदार्पण: अमेरिका अपनी वायु सेना के छह अत्याधुनिक F-35 5th-जनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट्स को इस अभ्यास में शामिल कर रहा है। भारतीय इतिहास में यह पहला अवसर है जब अमेरिकी F-35 विमान भारतीय धरती पर किसी बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास का हिस्सा बन रहे हैं।
  • वैश्विक अंतर-संचालनीयता (Interoperability): 40 मित्र देशों के बीच आयोजित इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न वायु सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, जटिल हवाई अभियानों की रणनीति और आधुनिक तकनीकों का आदान-प्रदान करना है।
  • जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अनुभव: हाल ही में संपन्न हुए ‘वीर गार्जियन-2026’ (जापान) और ‘पिच ब्लैक’ (ऑस्ट्रेलिया) के सफल अभियानों के बाद तरंग शक्ति भारतीय वायु सेना के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

2. दुश्मन के एयरफील्ड होंगे तबाह: ₹811 करोड़ का SAAW बम सौदा

भारतीय वायु सेना के स्ट्राइक बेड़े की घातक क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार ने स्वदेशी रक्षा सौदे को मंजूरी दी है:

  • 160 स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित और बीडीएल द्वारा निर्मित 160 स्वदेशी प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बमों की आपूर्ति के लिए अनुबंध पर दस्तखत किए गए।
  • 100 किमी दूर से अचूक निशाना: यह स्मार्ट बम उपग्रह मार्गदर्शन प्रणाली (INS-GPS) से संचालित होता है। बिना इंजन के पंखों (Foldable Wings) के सहारे 100 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के रनवे, रडार, बंकरों और एयरफील्ड को सटीक रूप से ध्वस्त करने में सक्षम है।
  • जैगुआर और सुखोई में होगी तैनाती: इन बमों को वायु सेना के जैगुआर (Jaguar) और सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों में तैनात किया जाएगा, जिससे भारतीय पायलटों को सीमा पार किए बिना दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने की स्टैंड-ऑफ क्षमता मिलेगी।

3. ‘तेजस एमके-1ए’ की जल्द एंट्री और ड्रोन तकनीक में क्रांति

भारतीय वायु सेना के बेड़े के आधुनिकीकरण और ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं:

  • तेजस एमके-1ए (Tejas Mk-1A) की शामिलगी: वायु सेना उप-प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पुष्टि की है कि अंतिम रडार परीक्षणों के पूरा होते ही अगले 1 से 2 महीनों के भीतर पहला उन्नत ‘तेजस एमके-1ए’ फाइटर जेट वायु सेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया जाएगा।
  • ‘ड्रोनथॉन-2026’ और यूएएस रोडमैप: पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज (जैसलमेर) में वायु सेना ने भारत के पहले ‘ड्रोनथॉन-2026’ का आयोजन किया। इसके साथ ही ‘आईएएफ यूएएस रोडमैप’ (IAF UAS Roadmap) जारी किया गया, जो भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स और उद्योगों को भविष्य की मानव रहित हवाई प्रणालियों और स्वॉर्म ड्रोन तकनीकों के निर्माण के लिए स्पष्ट दिशा प्रदान करता है।

निष्कर्ष 

‘तरंग शक्ति-2026’ का आयोजन, स्वदेशी स्मार्ट हथियारों का समावेशन और उन्नत तेजस लड़ाकू विमानों की जल्द एंट्री यह साबित करती है कि भारतीय वायु सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य की बहु-आयामी रक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह आधुनिक और आत्मनिर्भर बन रही है। वैश्विक मंचों पर भारत की यह कूटनीतिक और सैन्य शक्ति दुनिया के सामने एक मजबूत और शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में भारत का मस्तक ऊंचा करती है।

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द्वारा Kanchan

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