TTI Foreign Funding Case में CBI ने The Timothy Initiative (TTI), USA और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, संस्था को मिली करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल FCRA के नियमों के कथित उल्लंघन में किया गया।

 

TTI Foreign Funding Case: CBI ने TTI संस्था पर ₹92.55 करोड़ की विदेशी फंडिंग के कथित दुरुपयोग को लेकर FIR दर्ज की है। दिल्ली स्थित CBI की आर्थिक अपराध शाखा (EO-II) ने The Timothy Initiative (TTI), USA और उससे जुड़े कई लोगों के खिलाफ विदेशी फंडिंग से जुड़े कथित नियम उल्लंघन, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिटाने के आरोपों में केस दर्ज किया है। FIR 27 अगस्त 2026 को दर्ज की गई। मामले की जांच इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार गुप्त को सौंपी गई है।

₹92.55 करोड़ की विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल पर सवाल

CBI की FIR के मुताबिक, Jonathan S Rajan, Micah Mark, Ajit Verghese Mathal, Varghese Chacko, Bablu Kurmi, Supreme Joy और The Timothy Initiative, USA पर आपराधिक साजिश के तहत विदेशी फंड के इस्तेमाल का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि अमेरिका के Truist Bank से जारी विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत के अलग-अलग ATM से रकम निकाली गई।

जांच के अनुसार, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब ₹92.55 करोड़ यानी लगभग 99,95,240 अमेरिकी डॉलर की राशि FCRA के प्रावधानों के कथित उल्लंघन में इस्तेमाल की गई। इसके अलावा जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच करीब ₹44 करोड़ विदेशी डेबिट कार्ड के माध्यम से कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम और अन्य राज्यों में निकाले जाने की बात जांच में सामने आई है।

1000 से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड बांटने का आरोप

मामले की जांच में सामने आई ED की रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने CBI जांच की सिफारिश की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर Micah Mark के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए। इन कार्डों पर कथित तौर पर ‘Santosh Kumar’ नाम दर्ज था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इन कार्डों को वास्तविक उपयोगकर्ताओं की पहचान छिपाने और KYC प्रक्रिया से बचने के लिए इस नाम से जारी कराया गया। जांच रिपोर्ट में भारत में 1000 से ज्यादा ऐसे विदेशी डेबिट कार्ड वितरित किए जाने का भी दावा किया गया है।

TTI की गतिविधियों में रकम इस्तेमाल होने का दावा

ED की रिपोर्ट के अनुसार, Jonathan Rajan को भारत में TTI के ऑपरेशंस से जुड़ा प्रमुख व्यक्ति बताया गया है, जबकि Ajit Verghese Mathai पर वित्तीय संचालन से जुड़े होने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, विदेशी डेबिट कार्ड से ATM के जरिए निकाली गई रकम का इस्तेमाल भारत में TTI की गतिविधियों के लिए किया जाता था।

रिपोर्ट में प्रशिक्षण, धार्मिक प्रचार और अन्य गतिविधियों में इस रकम के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। ED के अनुसार, TTI ने भारत में ₹95 करोड़ से अधिक का खर्च किया। एजेंसियां अब इस फंड के स्रोत, इस्तेमाल और संबंधित लोगों के बीच वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं।

लैपटॉप और डिजिटल डेटा डिलीट करने का भी आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, 18 अप्रैल 2026 को Micah Mark के ठिकाने पर तलाशी के दौरान Bill.com, QuickBooks और एक HP लैपटॉप में वित्तीय और अकाउंटिंग से संबंधित डेटा मौजूद था। रिपोर्ट के अनुसार, उसी दिन भारत से जुड़ी Bill.com जानकारी का एक्सेस प्रतिबंधित हो गया और लैपटॉप का डेटा पूरी तरह वाइप कर दिया गया।

इसके अगले दिन QuickBooks पर भारत से संबंधित डेटा का एक्सेस भी प्रतिबंधित किए जाने की बात सामने आई। ED ने इन घटनाओं को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या उन्हें जांच के लिए अनुपलब्ध बनाने की कोशिश के तौर पर देखा है। इसी आधार पर BNS की धारा 238 के तहत भी कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

गृह मंत्रालय ने CBI को क्यों सौंपी जांच?

ED की जांच रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय के FCRA विंग ने मामले की आगे की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की। मंत्रालय के पत्र में FCRA की धारा 43 और केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत CBI से जांच कराने की बात कही गई है।

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान अगर Income Tax Act, Prevention of Money Laundering Act (PMLA) या किसी अन्य कानून के उल्लंघन से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित सक्षम एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए मामला भेजा जा सकता है। फिलहाल CBI की जांच का फोकस विदेशी फंडिंग के स्रोत, उसके इस्तेमाल, डेबिट कार्ड के जरिए निकाली गई रकम और कथित डिजिटल साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोपों पर है।

निष्कर्ष

TTI Foreign Funding Case में CBI ने The Timothy Initiative, USA और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एजेंसियों का आरोप है कि विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए करोड़ों रुपये भारत में निकाले गए और उनका इस्तेमाल FCRA के नियमों के कथित उल्लंघन में हुआ। जांच में 1000 से अधिक कार्ड बांटे जाने और डिजिटल डेटा मिटाए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। अब CBI इन सभी आरोपों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।

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