Tata Harrier EV में बार-बार आ रही तकनीकी खराबी पर हैदराबाद उपभोक्ता आयोग का सख्त फैसला। डीलर को गाड़ी वापस लेकर रिफंड और मुआवजा देने का आदेश। जानिए पूरी रिपोर्ट।
Tata Harrier EV मामले में उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश: बार-बार गाड़ी बंद होने पर डीलर को रिफंड और मुआवजा देने का निर्देश
यह बात 1 अगस्त 2025 की सुबह थी, जब पवन बगरेचा ने अपनी फर्म के नाम से 27.98 लाख रुपये मूल्य की ब्रांड न्यू टाटा हैरियर ईवी (Tata Harrier EV Empowered+ 75 APC) की चाबी थामी थी, तब उनके मन में पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक इलेक्ट्रिक कार चलाने का भारी उत्साह था। लेकिन यह खुशी महज कुछ ही दिनों की मेहमान साबित हुई। डिलीवरी के कुछ ही हफ्तों के भीतर यह प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार सड़क के बीचों-बीच अचानक बंद होने लगी। कभी चाबी (स्मार्ट-की) से संपर्क टूट जाता, तो कभी सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम पूरी तरह जाम हो जाता।
एक महीने में चार बार चलती गाड़ी का अचानक बंद हो जाना न केवल मानसिक तनाव का कारण बना, बल्कि व्यस्त सड़कों पर दुर्घटना का गंभीर खतरा भी बन गया। डीलर के चक्कर काटने पर हर बार इसे ‘सॉफ्टवेयर की मामूली खराबी’ बताकर पैच अपडेट दे दिया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अंततः थक-हारकर उपभोक्ता ने न्याय की गुहार लगाने के लिए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया और अब 2026 में ये मामला कुछ ख़त्म हुआ।
हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला
हैदराबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (अध्यक्ष बी. उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी, सदस्य सी. लक्ष्मी प्रसन्ना और बी. राजी रेड्डी की पीठ) ने इस मामले (केस संख्या C.C. 197/2025) की सुनवाई करते हुए ग्राहक के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
आयोग ने माना कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद ग्राहक को बार-बार वर्कशॉप के चक्कर काटने के लिए मजबूर करना और एक दोषपूर्ण वाहन बेचना ‘सेवा में गंभीर कमी’ (Deficiency in Service) के अंतर्गत आता है।
आयोग द्वारा दिए गए मुख्य निर्देश:
- वाहन वापस लेकर मूल्य वापसी: डीलर (टाटा सेलेक्ट मोटर्स) को निर्देशित किया गया है कि वह खरीदार से गाड़ी वापस ले और 10 प्रतिशत घिसावट (डेप्रिसिएशन) काटकर शेष संपूर्ण राशि (लगभग 24.63 लाख रुपये) वापस करे।
- मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा: ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
- कानूनी खर्च: मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 15,000 रुपये की राशि देने का निर्देश दिया गया।
- 45 दिनों की कड़ी समय सीमा: आयोग ने डीलर को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है। यदि 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो आदेश की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा।
ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए कड़ा संदेश
यह मामला केवल किसी एक इलेक्ट्रिक कार तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग ने भी एक डीजल टाटा हैरियर में बार-बार स्टीयरिंग और टाइमिंग बेल्ट की खराबी आने पर वाहन को बदलने या 21.40 लाख रुपये रिफंड करने का आदेश दिया था।
उपभोक्ता अदालतों के ये कड़े रुख ऑटोमोबाइल कंपनियों और उनके अधिकृत डीलरों के लिए एक स्पष्ट संदेश हैं कि ‘वारंटी में बार-बार मरम्मत कराने’ के नाम पर ग्राहकों को दोषयुक्त वाहन चलाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
खराबी वाले वाहन से बचने और ग्राहक अधिकारों को पहचानने के 4 प्रमुख तरीके
यदि आपने भी कोई नई कार या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा है और उसमें बार-बार तकनीकी या यांत्रिक खराबी आ रही है, तो अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए इन 4 महत्वपूर्ण तरीकों को अपनाएं:
1. जॉब कार्ड और सर्विस रिकॉर्ड सुरक्षित रखें जब भी आप गाड़ी में किसी भी खराबी को लेकर वर्कशॉप या सर्विस सेंटर जाएं, तो वहां से अधिकृत जॉब कार्ड (Job Card) और सर्विस हिस्ट्री की रसीद अवश्य लें। जॉब कार्ड पर अपनी शिकायत का स्पष्ट उल्लेख करवाएं। यह इस बात का सबसे मजबूत दस्तावेजी प्रमाण होता है कि समस्या बार-बार आ रही थी।
2. मौखिक बातों के बजाय लिखित पत्राचार (ईमेल) करें,डीलर या कंपनी के अधिकारियों से केवल फोन पर बात न करें। हमेशा आधिकारिक ईमेल पर अपनी समस्या का विवरण भेजें। यदि सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद भी खराबी दूर नहीं होती है, तो ईमेल के जरिए ही वाहन बदलने या रिफंड की मांग दर्ज कराएं।
3. स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ (ऑटोमोबाइल इंजीनियर) की रिपोर्ट अदालत में यह साबित करने के लिए कि गाड़ी में निर्माण संबंधी दोष (Manufacturing Defect) है, किसी स्वतंत्र ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ या यांत्रिक इंजीनियर की निरीक्षण रिपोर्ट बहुत मददगार साबित होती है।
4. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और उपभोक्ता आयोग का सहारा लें। यदि कंपनी या डीलर आपकी वैध शिकायतों को अनदेखा करता है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं या ई-दाखिल (e-Daakhil) पोर्टल के माध्यम से स्वयं जिला उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज करा सकते हैं।
निष्कर्ष:
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते दौर में ग्राहकों का भरोसा तभी मजबूत रहेगा जब वाहन निर्माता और डीलर बिक्री के बाद मिलने वाली सेवाओं में पूर्ण पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखें। हैदराबाद उपभोक्ता आयोग का यह फैसला देश भर के लाखों वाहन खरीदारों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो यह साबित करता है कि ग्राहक की सुरक्षा और उसके पैसों का सम्मान कानून की नजर में सर्वोपरि है।


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