मध्यप्रदेश के व्यापारियों ने ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI merchant payments पर प्रस्तावित 0.4% MDR के विरोध में ‘No UPI Day’ मनाया।

MP No UPI Day के जरिए मध्यप्रदेश में व्यापारियों का विरोध 23 सितंबर को कई शहरों में देखने को मिला और 24 सितंबर को भी यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहा। व्यापारियों ने ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI merchant transactions पर प्रस्तावित 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) का विरोध किया। कई जगह दुकानदारों ने QR codes को काले कपड़े से ढका और ग्राहकों से cash payment करने की अपील की।

  

यह विरोध केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के अनुसार इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, नीमच और मंदसौर सहित मध्यप्रदेश के कई शहरों में व्यापारिक संगठनों ने इसमें भाग लिया। हालांकि सभी व्यापारियों ने समान तरीके से विरोध नहीं किया। भोपाल में कुछ कारोबारियों ने UPI स्वीकार करना जारी रखा, जिससे प्रदर्शन को लेकर mixed response भी सामने आया।

UPI पर किस बदलाव का विरोध?

व्यापारियों का विरोध ₹2,000 से अधिक के कुछ person-to-merchant UPI transactions पर प्रस्तावित 0.4% MDR से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार यह बदलाव 15 अक्टूबर से लागू होने का प्रस्ताव है।

व्यापारी संगठनों का कहना है कि MDR लागू होने से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत उनके लिए बढ़ सकती है। इसी कारण उन्होंने सरकार से प्रस्तावित charge को वापस लेने की मांग की है। व्यापारियों ने इसे लेकर अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन और memorandum की तैयारी भी की है।

Jabalpur और MP के कई शहरों में विरोध

मध्यप्रदेश में विरोध का असर कई प्रमुख शहरों में दिखाई दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जबलपुर में भी व्यापारिक संगठनों ने No UPI Day के समर्थन में गतिविधियां कीं। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में भी QR codes को ढककर विरोध दर्ज कराया गया।

इंदौर में विरोध विशेष रूप से दिखाई दिया। वहां व्यापारियों ने दुकानों के QR codes पर काला कपड़ा लगाया और कुछ स्थानों पर ग्राहकों से cash payment करने के लिए कहा। रिपोर्ट के मुताबिक शहर में करीब 125 व्यापारिक associations के शामिल होने का दावा किया गया।

भोपाल में स्थिति अलग रही। कुछ व्यापारियों ने QR codes ढके, जबकि कई दुकानदारों ने UPI payments स्वीकार करना जारी रखा। व्यापारियों के एक वर्ग का कहना था कि ग्राहकों के पास cash कम होने की वजह से पूरी तरह UPI बंद करने पर बिक्री प्रभावित हो सकती है।

सरकार और व्यापारियों के बीच मुद्दा क्या है?

इस विवाद का मुख्य मुद्दा merchant-side transaction cost है। व्यापारिक संगठन चाहते हैं कि UPI payments पर प्रस्तावित MDR को लेकर सरकार दोबारा विचार करे।

वहीं उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित बदलाव में ग्राहकों से अतिरिक्त payment charge लेने की बात नहीं है। विवाद मुख्य रूप से merchant transactions पर लागू होने वाले charge को लेकर है।

यानी सामान्य ग्राहक के लिए सवाल यह है कि UPI से payment करते समय उसे सीधे कोई अतिरिक्त fee देनी होगी या नहीं। वहीं व्यापारियों की चिंता यह है कि payment स्वीकार करने की लागत उनके business margins को प्रभावित कर सकती है।

Political Issue क्यों बना No UPI Day?

UPI भारत की digital payments व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसलिए merchant charges में किसी बदलाव को लेकर व्यापारियों का संगठित विरोध केवल business issue नहीं रह जाता, बल्कि यह government policy और traders’ associations के बीच संवाद का विषय भी बनता है।

मध्यप्रदेश में व्यापारिक संगठनों की सक्रियता के कारण यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा में आया है। व्यापारी संगठन केंद्र सरकार से प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं और आगे भी विरोध की चेतावनी दे रहे हैं।

कुछ व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को भी बड़े स्तर पर ‘No UPI Day’ आयोजित करने की योजना बताई है, जबकि प्रस्तावित MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की बात कही गई है।

आगे क्या होगा?

आने वाले दिनों में सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती है। अगर प्रस्तावित MDR में बदलाव होता है या सरकार की ओर से व्यापारियों की चिंताओं को लेकर कोई नई व्यवस्था सामने आती है, तो विरोध की स्थिति बदल सकती है।

व्यापारियों के लिए मुख्य मुद्दा transaction cost है, जबकि policy level पर digital payments ecosystem की sustainability और payment infrastructure की लागत भी चर्चा का हिस्सा है।

निष्कर्ष: MP No UPI Day ने UPI merchant charges को लेकर व्यापारियों की चिंता को सार्वजनिक बहस में ला दिया है। जबलपुर, भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में विरोध देखने को मिला, हालांकि भोपाल में इसका response mixed रहा। अब नजर सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच होने वाली बातचीत तथा 15 अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था पर है।

द्वारा Priyanshi Chaturvedi

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