INS Brahmaputra Court Martial: नौसेना के दो अधिकारियों का कोर्ट मार्शल शुरू, 2024 में युद्धपोत पलटने और एक जवान की मौत का मामला

भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS Brahmaputra से जुड़े 2024 के हादसे के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। नौसेना ने जहाज के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू कर दी है। जुलाई 2024 में मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान जहाज में आग लग गई थी। इसके बाद युद्धपोत एक तरफ झुककर लगभग पलट गया था। इस हादसे में एक नौसैनिक की मौत हो गई थी। करीब दो साल बाद शुरू हुई इस सैन्य न्यायिक प्रक्रिया में अधिकारियों की जिम्मेदारी और कथित लापरवाही की जांच की जाएगी।

Two Navy officers face court martial over 2024 INS Brahmaputra mishap - The Hindu

INS Brahmaputra Court Martial: किन दो अधिकारियों पर लगे आरोप?

इस मामले में नौसेना के दो अधिकारियों को कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ रहा है। इनमें जहाज के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर, जो कैप्टन रैंक के अधिकारी हैं, और उस दिन ड्यूटी पर तैनात ऑफिसर ऑफ द डे (लेफ्टिनेंट कमांडर) शामिल हैं।

सैन्य अदालत की कार्यवाही 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में शुरू हुई थी।

दोनों अधिकारियों पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, कमांडिंग ऑफिसर पर भारतीय नौसेना के युद्धपोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त आरोप भी है।

नौसेना की भाषा में ‘Hazarding a Naval Ship’ का अर्थ किसी युद्धपोत को जोखिम में डालने वाली कार्रवाई या लापरवाही से है। दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों को चेतावनी, वरिष्ठता में कमी या अधिकतम दो साल तक की कैद जैसी सजा हो सकती है। हालांकि, अभी अदालत का फैसला नहीं आया है।

INS Brahmaputra Accident 2024: आखिर कैसे हुआ था हादसा?

यह दुर्घटना 21 जुलाई 2024 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में हुई थी। उस समय INS Brahmaputra की मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा था।

शाम के समय जहाज पर अचानक आग लग गई। आग बुझाने के लिए जहाज के कर्मचारियों और डॉकयार्ड के अग्निशमन दल ने प्रयास किए। 22 जुलाई की सुबह तक आग पर काबू पा लिया गया था।

आईएनएस ब्रह्मपुत्र हादसा: नौसेना के दो अधिकारियों का होगा कोर्ट मार्शल

लेकिन इसके बाद दोपहर में युद्धपोत का संतुलन बिगड़ गया और वह बाईं तरफ यानी पोर्ट साइड की ओर तेजी से झुकने लगा। तमाम कोशिशों के बावजूद जहाज को सीधा नहीं किया जा सका और वह एक तरफ टिक गया।

आग बुझाने के लिए जहाज में बड़ी मात्रा में पानी डाला गया था। इससे जहाज का संतुलन प्रभावित होने की बात सामने आई। हालांकि, हादसे के सभी कारणों और जिम्मेदारियों का निर्धारण सैन्य अदालत की जांच का विषय है।

हादसे में एक नौसैनिक की हुई थी मौत

इस दुर्घटना के दौरान कई नौसैनिक सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। कुछ कर्मचारियों ने जहाज से बाहर निकलने के लिए पानी में छलांग लगाई थी।

इस दौरान लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह लापता हो गए थे। नौसेना ने उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया, जिसके बाद 24 जुलाई 2024 को उनका शव बरामद हुआ।

इस घटना ने युद्धपोतों की मरम्मत के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकासी और अधिकारियों की निगरानी संबंधी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए थे।

क्या है INS Brahmaputra युद्धपोत की खासियत?

INS Brahmaputra भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इसे कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने बनाया था।

इस युद्धपोत को अप्रैल 2000 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इसका वजन लगभग 3,850 टन है और इसकी लंबाई करीब 125 मीटर है। इसमें लगभग 370 नौसैनिक तैनात रह सकते हैं, जिनमें करीब 40 अधिकारी शामिल हैं।

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यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा, निगरानी और विभिन्न सैन्य अभियानों के लिए तैयार किया गया था।

हादसे के बाद नौसेना ने क्या कदम उठाए?

INS Brahmaputra दुर्घटना के बाद तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने युद्धपोतों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए रियर एडमिरल की अध्यक्षता में एक विशेष कार्यबल गठित किया था।

इस कार्यबल ने नौसेना के जहाजों की सुरक्षा, रखरखाव और मानक संचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा की। इसके बाद सुरक्षा संबंधी सिफारिशें सभी नौसैनिक कमानों और प्रतिष्ठानों को भेजी गईं और उन्हें लागू किया गया।

दूसरी ओर, INS Brahmaputra को दोबारा सीधा करने और उसकी मरम्मत में कई महीने लगे। नवंबर 2024 में जहाज को फिर से सीधा किया गया था। अब इसकी मरम्मत पूरी होने के बाद समुद्री परीक्षण किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इसके 2027 में दोबारा समुद्र में परिचालन के योग्य होने की उम्मीद है।

अब कोर्ट मार्शल में क्या होगा?

सैन्य अदालत अब यह जांच करेगी कि जुलाई 2024 के हादसे में दोनों अधिकारियों की क्या भूमिका थी और क्या उनके स्तर पर कोई ऐसी लापरवाही हुई, जिससे युद्धपोत को नुकसान पहुंचा।

इस मामले में अभी किसी अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया गया है। कोर्ट मार्शल की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

यह कार्रवाई भारतीय नौसेना में युद्धपोतों की सुरक्षा, मरम्मत और परिचालन संबंधी जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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द्वारा Kanchan

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