HDFC बैंक शेयर प्राइस: 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा स्टॉक, जानें गिरावट की वजह
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक का शेयर इस समय भारी दबाव में है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक स्टॉक करीब 30 प्रतिशत तक टूट चुका है और हाल ही में इसने 52 हफ्ते का नया निचला स्तर भी छू लिया। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या बैंक के सामने कोई गहरी चुनौती खड़ी है।
आज का शेयर भाव
15 सितंबर 2026 को कारोबार के दौरान एचडीएफसी बैंक का शेयर एनएसई पर 722.40 रुपये और बीएसई पर 723.85 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। पिछले बंद भाव 708.20 रुपये से यह थोड़ा ऊपर खुला। बीते एक साल में स्टॉक करीब 28 से 29 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि पिछले छह महीनों में इसमें करीब 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। स्टॉक ने 1,020.50 रुपये का 52 हफ्ते का ऊंचा स्तर और 681.90 रुपये का निचला स्तर बनाया है, यानी मौजूदा भाव अपने साल भर के उच्चतम स्तर से करीब 30 प्रतिशत नीचे है। इस गिरावट के चलते बैंक का बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 10 लाख 91 हजार करोड़ रुपये के आसपास आ गया है।
गिरावट की बड़ी वजहें
एचडीएफसी बैंक के शेयर में इस साल आई भारी गिरावट के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी वजह बैंक के नेतृत्व से जुड़ी अनिश्चितता मानी जा रही है। बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ शशिधर जगदीशन ने ऐलान किया है कि वे अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद, यानी 26 अक्टूबर 2026 से दोबारा नियुक्ति के लिए दावेदारी नहीं करेंगे। इससे पहले बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती भी नैतिक मतभेदों का हवाला देते हुए मार्च 2026 में इस्तीफा दे चुके हैं। नेतृत्व से जुड़े इन दोनों घटनाक्रमों ने निवेशकों के बीच बैंक की भविष्य की रणनीति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
इसके अलावा अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दाखिल एक क्लास-एक्शन मुकदमे ने भी गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को हवा दी है। साथ ही बैंक अभी भी एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए विलय के बाद के असर से जूझ रहा है, जिसमें निवेशक कर्ज वृद्धि, मुनाफे के मार्जिन और तुलन-पत्र के सामान्य होने की गति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
बाजार की व्यापक परिस्थितियां भी इस गिरावट में योगदान दे रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना, कमजोर रुपया, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता जैसे कारकों ने पूरे बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बना दिया है, जिसका असर बैंकिंग शेयरों पर खासतौर पर देखने को मिला है।
तिमाही नतीजे और मुनाफे की तस्वीर
वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर देखें तो जून 2026 को समाप्त तिमाही में एचडीएफसी बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 19,060 करोड़ रुपये रहा, जो विश्लेषकों के अनुमान के करीब-करीब बराबर रहा। हालांकि बैंक के कर्ज में 15.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के बावजूद शुद्ध ब्याज आय में सिर्फ 6.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जिससे शुद्ध ब्याज मार्जिन घटकर 3.26 प्रतिशत रह गया। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़ा कर्ज पोर्टफोलियो होने के बावजूद बैंक की आय उस अनुपात में नहीं बढ़ पाई। बैंक का रिटर्न ऑन एसेट्स 1.85 प्रतिशत और रिटर्न ऑन इक्विटी 13.8 प्रतिशत रहा, जो सम्मानजनक तो है लेकिन विलय से पहले के उस स्तर से कम है जिसके दम पर बाजार बैंक के शेयर को प्रीमियम वैल्यूएशन देता था।
आगे क्या उम्मीद करें?
बैंक के बोर्ड ने कहा है कि नए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी, हालांकि फिलहाल यह साफ नहीं है कि आने वाले समय में बैंक की कमान किसके हाथों में होगी। विश्लेषकों का मानना है कि 30 सितंबर 2026 को खत्म होने वाली तिमाही के नतीजे यह बताएंगे कि क्या 3.26 प्रतिशत का मार्जिन ही गिरावट का सबसे निचला स्तर था या आगे और दबाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल के लिए निवेशकों की सलाह यही है कि वे नेतृत्व परिवर्तन, गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रमों और आगामी तिमाही नतीजों पर करीबी नजर बनाए रखें।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह न समझा जाए। शेयर बाजार में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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