Google Voluntary Buyouts: Google कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने पर मिलेगा मोटा पैकेज, 7 देशों में शुरू किया Exit Program; भारत शामिल नहीं
दुनिया की प्र’मुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल Google ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना का विस्तार किया है। कंपनी ने चुनिंदा कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले आर्थिक मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया है। यह योजना कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में जून 2026 से लागू की गई है। इससे पहले अमेरिका और ब्रिटेन में भी कंपनी के कुछ विभागों के कर्मचारियों के लिए ऐसी योजनाएं शुरू की गई थीं। इस तरह अब तक सात देशों में Google के चुनिंदा कर्मचारियों को यह विकल्प मिल चुका है। हालांकि, भारत इस सूची में शामिल नहीं है।
Google Voluntary Buyouts: कर्मचारियों को कितना मिलेगा मुआवजा?
स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के बदले आर्थिक मुआवजा दिया जाता है। स्विट्जरलैंड में लागू योजना के तहत कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए प्रत्येक वर्ष के बदले एक महीने का वेतन देने का प्रस्ताव था।
हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 12 महीने के वेतन तक रखी गई थी। यानी 12 साल या उससे अधिक समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को अधिकतम एक साल के वेतन के बराबर मुआवजा मिल सकता था।
स्विट्जरलैंड में कंपनी ने जून के मध्य में कर्मचारियों को इस योजना की जानकारी दी थी और जुलाई के मध्य तक आवेदन करने वालों को जवाब दे दिया था। योजना स्वीकार करने वाले कर्मचारियों ने अगस्त से कंपनी छोड़ना शुरू कर दिया था।
ध्यान देने वाली बात है कि यह मुआवजे की जानकारी स्विट्जरलैंड की योजना से संबंधित है। अन्य देशों में कर्मचारियों को मिलने वाले पैकेज की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
किन देशों में Google Employee Buyout Program लागू है?
Google की स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना से अब तक सात देशों के चुनिंदा कर्मचारी जुड़े हैं।
| देश | योजना की स्थिति |
|---|---|
| अमेरिका | कुछ विभागों में पहले से लागू |
| ब्रिटेन | कुछ विभागों में पहले से लागू |
| कनाडा | जून 2026 में विस्तार |
| फ्रांस | जून 2026 में विस्तार |
| जर्मनी | जून 2026 में विस्तार |
| जापान | जून 2026 में विस्तार |
| स्विट्जरलैंड | जून 2026 में विस्तार |
| भारत | नई योजना में शामिल नहीं |
कंपनी ने स्पष्ट नहीं किया है कि इन देशों में कुल कितने कर्मचारी इस प्रस्ताव के पात्र हैं या कितने लोगों ने इसे स्वीकार किया है।
क्या Google के सभी कर्मचारियों को छोड़नी होगी नौकरी?
नहीं। यह अनिवार्य छंटनी नहीं, बल्कि स्वैच्छिक निकास योजना है। इसमें पात्र कर्मचारियों को आर्थिक पैकेज के बदले अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जाता है।
इस योजना में सभी विभाग शामिल नहीं हैं। स्विट्जरलैंड में लागू कार्यक्रम में कई विभागों को शामिल किया गया था, लेकिन कंपनी की AI रिसर्च इकाई DeepMind को इससे बाहर रखा गया था। इससे पहले के कुछ कार्यक्रमों में Google Cloud और DeepMind के कर्मचारियों को भी बाहर रखा गया था।
कंपनी के लिए AI और क्लाउड कंप्यूटिंग भविष्य के प्रमुख कारोबार हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में कर्मचारियों की संख्या और निवेश बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
AI में बढ़ते निवेश के कारण Google ने उठाया कदम
Google की मूल कंपनी Alphabet आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। AI के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कंपनी अपने संसाधनों को उन विभागों की ओर स्थानांतरित कर रही है, जिन्हें भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कंपनी के एक प्रवक्ता के अनुसार, 2025 में कुछ अमेरिकी टीमों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना शुरू की गई थी। जून 2026 में इसका विस्तार कुछ अन्य देशों में किया गया।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि Google का कुल कर्मचारी आधार हाल की तिमाहियों में बढ़ा है। इसलिए इस योजना को कंपनी की पूरी दुनिया में कर्मचारियों की संख्या घटाने की घोषणा मानना सही नहीं होगा।
क्या Google में आगे भी छंटनी हो सकती है?
स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना का मतलब यह नहीं है कि कंपनी आगे अनिवार्य छंटनी नहीं करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम एक मामले में स्वैच्छिक निकास प्रस्ताव के बाद संबंधित विभाग में छंटनी भी हुई थी।
फिलहाल Google ने नई योजना के तहत कर्मचारियों की कुल संख्या घटाने का कोई वैश्विक लक्ष्य घोषित नहीं किया है। कंपनी का जोर AI और क्लाउड जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और दूसरे विभागों में संसाधनों का पुनर्गठन करने पर है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि AI के बढ़ते प्रभाव के बीच बड़ी टेक कंपनियां केवल नई तकनीक में निवेश ही नहीं कर रहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों और कारोबारी ढांचे में भी बदलाव कर रही हैं।


[…] […]