Form 6 Voter Registration Changes: नए वोटर फॉर्म पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान, 27 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 (Form 6) में अतिरिक्त घोषणा को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को अपना रुख स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि उसने नए फॉर्म 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही खारिज किया है। इसकी वैधता पर अभी विचार होना बाकी है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

यह विवाद भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने से संबंधित है। इस बदलाव को लेकर आयोग के भीतर भी आपत्तियां उठी थीं। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मई 2026 में बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर फैसला देते समय नया फॉर्म 6 मौजूद नहीं था। इसलिए उस फैसले को नए फॉर्म की मंजूरी या अस्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि वह नए फॉर्म से जुड़े मुद्दे की जांच करेगी। साथ ही, इस मामले को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया गया है।

इस मामले में याचिकाकर्ता ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और फॉर्म में किए गए बदलावों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

Form 6 में क्या बदलाव किया गया था?

फॉर्म 6 का इस्तेमाल पहली बार मतदाता बनने वाले पात्र भारतीय नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसकी ऑनलाइन प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध है।

विवाद फॉर्म के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को लेकर है। इस घोषणा में आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि उसका या उसके परिवार के सदस्यों का नाम पहले हुए विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।

इस अतिरिक्त जानकारी को लेकर सवाल उठे कि क्या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना वैधानिक फॉर्म में इस तरह की शर्त जोड़ी जा सकती है।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म 6 में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत उसके साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग ने अपने पक्ष में मई 2026 के बिहार SIR संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया था। हालांकि, अदालत ने अब साफ किया है कि उस फैसले में नए फॉर्म की वैधता पर निर्णय नहीं दिया गया था।

निर्वाचन आयोग के भीतर भी उठी थीं आपत्तियां

सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस तरह के बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है और इससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के सामने अतिरिक्त बाधाएं खड़ी हो सकती हैं।

इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को अतिरिक्त घोषणा के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाली घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था, जबकि सामान्य अवधि में संबंधित नियमों के अनुसार निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।

30 सितंबर को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन पोर्टल से SIR संबंधी अतिरिक्त घोषणा हटाने की खबर भी सामने आई, जहां पुनरीक्षण पूरा हो चुका था।

नए मतदाता Form 6 के लिए आवेदन कैसे करें?

पहली बार मतदाता बनने के पात्र नागरिक निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

  1. आधिकारिक वेबसाइट: https://voters.eci.gov.in पर जाएं।
  2. फॉर्म 6 चुनें: नए मतदाता के रूप में पंजीकरण का विकल्प खोलें।
  3. जानकारी भरें: मांगी गई व्यक्तिगत जानकारी, पता और आवश्यक दस्तावेजों का विवरण दें।
  4. आवेदन जमा करें: जानकारी की जांच करके फॉर्म जमा करें और आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।
  5. स्थिति जांचें: पोर्टल पर आवेदन की स्थिति देख सकते हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले भारतीय नागरिक, जो संबंधित निर्धारित तारीख तक 18 वर्ष के हो चुके हैं या होने वाले हैं, पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। SIR प्रक्रिया लागू होने वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त घोषणा या अन्य निर्देशों की जरूरत अलग हो सकती है।

27 अक्टूबर की सुनवाई क्यों है अहम?

सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में फॉर्म 6 से जुड़े कानूनी सवालों और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर आगे विचार हो सकता है। अदालत की टिप्पणी से अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अतिरिक्त घोषणा वैध है या अवैध।

फिलहाल नए मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपने क्षेत्र में लागू निर्देशों के अनुसार आवेदन करें और निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम जानकारी प्राप्त करें। अदालत का अंतिम निर्णय आने के बाद ही इस विवादित घोषणा की कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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द्वारा Kanchan

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