Walking Speed and Health: चलने की रफ्तार सिर्फ आपकी चाल नहीं बताती, बल्कि शरीर की फिटनेस, मसल्स, बैलेंस और रोजमर्रा की कार्यक्षमता के बारे में भी संकेत दे सकती है। एक्सपर्ट से जानिए किस स्पीड से चलना फायदेमंद है और वॉकिंग को बेहतर कैसे बनाएं।

 

Walking Speed and Health: क्या आपकी चाल भी बताती है सेहत का हाल?हम रोज चलते हैं, लेकिन शायद ही कभी अपनी वॉकिंग स्पीड पर ध्यान देते हैं। जबकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चलने की गति शरीर की ओवरऑल फंक्शनिंग का एक उपयोगी संकेत हो सकती है। वॉक करते समय हार्ट, लंग्स, मसल्स, नर्वस सिस्टम और दिमाग एक साथ काम करते हैं। इसलिए चाल में अचानक बदलाव या लगातार धीमी होती गति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जनवरी 2020 में प्रकाशित एक स्टडी में धीमी वॉकिंग को कॉग्निटिव डिक्लाइन और डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों से जोड़कर देखा गया था। वहीं Apple Hearing Study के डेटा में हियरिंग लॉस और अपेक्षाकृत धीमी वॉकिंग स्पीड के बीच संबंध देखा गया। खासतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह अंतर ज्यादा दिखाई दिया।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में डॉक्टर से समझेंगे कि वॉकिंग स्पीड हमारे स्वास्थ्य के बारे में क्या संकेत देती है, रोज कितनी देर चलना फायदेमंद है और अपनी चाल को बेहतर कैसे बनाया जा सकता है।

एक्सपर्ट: डॉ. अक्षय चुघ, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, मेट्रो हॉस्पिटल्स एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा

वॉकिंग स्पीड को क्यों माना जाता है हेल्थ इंडिकेटर?

डॉ. अक्षय चुघ के मुताबिक, मेडिकल साइंस में वॉकिंग स्पीड को एक क्लिनिकल बायोमार्कर की तरह देखा जाता है। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति की चलने की क्षमता से उसकी फंक्शनल हेल्थ के बारे में कुछ जानकारी मिल सकती है।

चलना एक ऐसी एक्टिविटी है, जिसमें शरीर के कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं। हार्ट और लंग्स शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाते हैं, मसल्स शरीर को आगे बढ़ाती हैं और दिमाग व नर्वस सिस्टम शरीर के बैलेंस और कोऑर्डिनेशन को संभालते हैं।

अगर कोई व्यक्ति आराम से, संतुलित तरीके से और बिना जल्दी थके चल पाता है तो यह उसकी अच्छी फंक्शनल क्षमता का संकेत हो सकता है। इसके उलट चलने की गति में लगातार कमी, जल्दी थकान या बैलेंस बिगड़ना किसी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।

Walking Speed को ‘6th Vital Sign’ क्यों कहा जाता है?

ब्लड प्रेशर, पल्स, सांस की दर और शरीर का तापमान जैसे संकेतों की तरह वॉकिंग स्पीड भी व्यक्ति की फंक्शनल स्थिति के बारे में जानकारी दे सकती है। इसी वजह से कई मेडिकल सेटिंग्स में इसे ‘6th Vital Sign’ कहा जाता है।

वॉकिंग स्पीड से यह समझने में मदद मिल सकती है कि कोई व्यक्ति रोजमर्रा के काम कितनी आसानी से कर पा रहा है। जैसे बिना सहारे चलना, सीढ़ियां चढ़ना, नहाना और कपड़े पहनना आदि।

अगर शरीर में कमजोरी, दर्द, सांस फूलना या बैलेंस की समस्या हो तो उसका असर चलने के तरीके पर दिखाई दे सकता है। हालांकि सिर्फ धीमी चाल के आधार पर किसी बीमारी का निदान नहीं किया जा सकता।

कितनी होनी चाहिए सामान्य Walking Speed?

वॉकिंग स्पीड उम्र, जेंडर, फिटनेस और स्वास्थ्य जैसी कई चीजों पर निर्भर करती है। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ चलने की औसत गति में कुछ कमी देखी जाती है।

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग उम्र में औसत स्पीड लगभग इस तरह बताई गई है:

  • 30 साल से कम: करीब 3 मील प्रति घंटा
  • 30-49 साल: करीब 2.8 मील प्रति घंटा
  • 50-59 साल: करीब 2.75 मील प्रति घंटा
  • 60 साल से अधिक: करीब 2.7 मील प्रति घंटा
  • 65 साल के बाद: करीब 2.1 मील प्रति घंटा

ध्यान रखें कि ये औसत आंकड़े हैं। हर व्यक्ति की सामान्य चाल अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पुरानी सामान्य गति की तुलना में अचानक बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

तेज, सामान्य और धीमी चाल क्या बताती है?

1. तेज चाल

तेज और संतुलित चाल आमतौर पर अच्छी फिटनेस, मसल्स की क्षमता और बेहतर स्टैमिना से जुड़ी हो सकती है।

2. सामान्य चाल

मध्यम गति से बिना ज्यादा थके चल पाना सामान्य फंक्शनल फिटनेस का संकेत हो सकता है।

3. धीमी चाल

धीमी चाल कमजोरी, कम स्टैमिना, दर्द, थकान या मसल्स की कम क्षमता से जुड़ी हो सकती है। इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

4. अचानक चाल धीमी होना

अगर पहले की तुलना में चलने की स्पीड अचानक कम हो जाए, बैलेंस बिगड़ने लगे या चलने में ज्यादा परेशानी हो तो इसके कारणों की जांच जरूरी हो सकती है।

5. बहुत धीमी चाल

लगातार बहुत धीमी चाल, खासकर उम्र बढ़ने के साथ कमजोरी या फंक्शनल क्षमता में कमी का संकेत हो सकती है। इसे दूसरे लक्षणों के साथ देखकर ही समझना चाहिए।

Hearing Loss और Walking Speed का क्या कनेक्शन है?

हमारे कान सिर्फ आवाज सुनने में ही मदद नहीं करते, बल्कि शरीर के बैलेंस सिस्टम में भी उनकी भूमिका होती है। सुनने की क्षमता कम होने पर कुछ लोगों में बैलेंस और शरीर के कोऑर्डिनेशन पर भी असर पड़ सकता है।

Apple Hearing Study में 57 हजार से अधिक iPhone यूजर्स के डेटा का विश्लेषण किया गया था। इसमें हियरिंग लॉस वाले लोगों में वॉकिंग स्पीड अपेक्षाकृत कम देखी गई।

एक संभावित वजह यह बताई गई कि हियरिंग लॉस की स्थिति में दिमाग को आवाजों को समझने और प्रोसेस करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। इससे चलते समय ध्यान और कोऑर्डिनेशन प्रभावित हो सकता है। हालांकि हियरिंग लॉस और धीमी चाल के बीच संबंध को किसी एक कारण-परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

रोज कितनी देर और कितनी स्पीड से चलें?

डॉ. अक्षय चुघ के मुताबिक, रोज करीब 30 मिनट वॉक करना फायदेमंद हो सकता है। अगर लगातार 30 मिनट चलना मुश्किल है तो इसे 10-10 मिनट के तीन हिस्सों में भी किया जा सकता है।

हेल्दी रहने के लिए करीब 4-5 किलोमीटर प्रति घंटे की मॉडरेट स्पीड रखी जा सकती है। आसान भाषा में कहें तो चाल इतनी तेज हो कि आप बातचीत कर सकें, लेकिन गाना गाने में परेशानी महसूस हो।

फिटनेस बढ़ाने के लिए सप्ताह में करीब 5 दिन ब्रिस्क वॉक को शामिल किया जा सकता है। लेकिन शुरुआत हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करें और धीरे-धीरे समय व स्पीड बढ़ाएं।

Walking Speed बढ़ाने के लिए क्या करें?

सिर्फ ज्यादा देर तक चलना ही पर्याप्त नहीं है। वॉकिंग स्पीड बेहतर करने के लिए मसल्स की ताकत, बैलेंस और कार्डियो फिटनेस पर भी काम करना जरूरी है।

Strength Training: थाई, कैल्फ और कोर मसल्स की एक्सरसाइज पैरों और शरीर को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।

Balance Exercise: बैलेंस एक्सरसाइज शरीर की स्थिरता सुधारने और गिरने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

Cardio Workout: ब्रिस्क वॉक, साइकिलिंग और जॉगिंग जैसी एक्टिविटीज कार्डियो फिटनेस बढ़ाने में मदद करती हैं।

Interval Walking: कुछ मिनट तेज और कुछ मिनट सामान्य गति से चलने से स्टैमिना और स्पीड पर काम किया जा सकता है।

Stretching: नियमित स्ट्रेचिंग मसल्स की फ्लेक्सिबिलिटी और मूवमेंट को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

कब धीमी चाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

अगर आपकी वॉकिंग स्पीड बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक कम हो गई है और इसके साथ लगातार थकान, सांस फूलना, चक्कर, सीने में दर्द, कमजोरी, बैलेंस बिगड़ना या चलने में दर्द जैसी समस्या भी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

खासकर बुजुर्गों में चलने की क्षमता में अचानक बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वॉकिंग स्पीड सिर्फ एक हेल्थ इंडिकेटर है, किसी बीमारी की पक्की जांच नहीं।

रोज वॉक करने के 6 फायदे

नियमित वॉकिंग को रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटी का आसान तरीका माना जाता है। इसके संभावित फायदे हैं:

  1. हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करती है
  2. स्टैमिना और कार्डियो फिटनेस बेहतर करने में मदद करती है
  3. मसल्स को एक्टिव रखने में मदद करती है
  4. बैलेंस और मोबिलिटी पर सकारात्मक असर डाल सकती है
  5. शरीर को एक्टिव रखने और वजन मैनेजमेंट में मदद कर सकती है
  6. रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटी का आसान और कम खर्च वाला तरीका है
क्या सिर्फ वॉकिंग से पूरी फिटनेस मिल सकती है?

वॉकिंग बेहद उपयोगी फिजिकल एक्टिविटी है, लेकिन ओवरऑल फिटनेस के लिए सिर्फ वॉकिंग पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। मसल्स और हड्डियों की मजबूती के लिए सप्ताह में 2-3 दिन स्ट्रेंथ एक्सरसाइज को शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा अपनी क्षमता के अनुसार साइकिलिंग, स्विमिंग या अन्य कार्डियो एक्टिविटी भी की जा सकती है। बढ़ती उम्र में बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज पर भी ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

निष्कर्ष

आपकी Walking Speed शरीर की फंक्शनल हेल्थ का एक उपयोगी संकेत हो सकती है। तेज और संतुलित चाल अच्छी फिटनेस से जुड़ी हो सकती है, जबकि बिना वजह चाल का लगातार धीमा होना कमजोरी, बैलेंस या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के साथ देखा जा सकता है। रोज करीब 30 मिनट वॉक से शुरुआत की जा सकती है और धीरे-धीरे स्पीड व समय बढ़ाया जा सकता है। हालांकि अचानक वॉकिंग स्पीड कम होने या दूसरे परेशान करने वाले लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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