RBI की संभावित intervention और कमजोर डॉलर ने रुपये को कुछ राहत दी; शुक्रवार को भारतीय मुद्रा 15 पैसे मजबूत होकर 95.81 प्रति डॉलर पर बंद हुई।

Rupee Today की बात करें तो भारतीय मुद्रा को शुक्रवार के कारोबार में थोड़ी राहत मिली। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर ₹95.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले रुपया ₹95.96 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बाजार में इस मजबूती के पीछे Reserve Bank of India यानी RBI की संभावित intervention, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर में कमजोरी जैसे factors बताए गए हैं।

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हालांकि रुपये पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil अभी भी ऊंचे स्तर पर है और US bond yields में मजबूती बनी हुई है। ऐसे माहौल में भारतीय मुद्रा के लिए आगे भी global market movements महत्वपूर्ण रहेंगे।

1. RBI की intervention से रुपये को मिला सहारा

शुक्रवार के कारोबार में RBI की forex market intervention को रुपये की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना गया। Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंक की लगातार intervention ने रुपये पर पड़ने वाले दबाव को सीमित करने में मदद की है।

RBI forex market में डॉलर की खरीद-बिक्री के जरिए अत्यधिक volatility को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। इसका उद्देश्य किसी निश्चित exchange rate को बनाए रखना जरूरी नहीं होता, बल्कि बाजार में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को सीमित करना भी हो सकता है।

हाल के दिनों में RBI ने liquidity management के लिए dollar-rupee swaps का भी इस्तेमाल किया है। Business Standard के अनुसार केंद्रीय बैंक ने पिछले दो सप्ताह में कम से कम $10 billion के sell-buy dollar-rupee swaps किए हैं।

2. Crude Oil और Dollar Movement भी अहम

रुपये की दिशा पर crude oil prices का सीधा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा crude oil import करता है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने पर import bill बढ़ सकता है और डॉलर की demand पर दबाव आ सकता है।

शुक्रवार को crude oil में कुछ नरमी देखने को मिली। Moneycontrol के अनुसार Brent crude करीब $105 प्रति barrel के आसपास कारोबार कर रहा था, लेकिन overnight movement में इसमें गिरावट आई थी।

इसके अलावा US dollar की global movement भी रुपये को प्रभावित करती है। अगर डॉलर मजबूत होता है तो emerging market currencies पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं डॉलर में नरमी आने पर रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।

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3. Bond Yield भी चार महीने के ऊंचे स्तर पर

रुपये के साथ भारतीय bond market में भी महत्वपूर्ण movement देखने को मिला। शुक्रवार को benchmark 10-year government bond yield 7.14% तक पहुंच गई, जिसे पिछले करीब चार महीनों का ऊंचा स्तर बताया गया है।

Bond yields में बढ़ोतरी कई factors से जुड़ी हो सकती है। इनमें inflation expectations, government borrowing, global bond yields और monetary policy expectations शामिल हैं।

इस समय global markets में US Treasury yields भी ऊंचे स्तर पर हैं। इससे emerging markets में capital flows और borrowing costs पर असर पड़ सकता है।

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4. रुपये की कमजोरी का आम लोगों पर असर

रुपये की exchange rate सिर्फ stock market या currency traders के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। इसका असर आम लोगों के खर्च पर भी पड़ सकता है।

अगर रुपया लंबे समय तक कमजोर रहता है तो imported products, crude oil, electronics, foreign education और overseas travel जैसी चीजों की लागत बढ़ सकती है। वहीं exporters के लिए कमजोर रुपया कुछ परिस्थितियों में फायदेमंद हो सकता है क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में मिलने वाली रकम को रुपये में बदलने पर ज्यादा राशि मिल सकती है।

हालांकि वास्तविक असर sector, contract और import-export structure पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष

Rupee Today में शुक्रवार की 15 पैसे की मजबूती ने भारतीय मुद्रा को कुछ राहत दी है। RBI intervention, crude oil movement और डॉलर की global स्थिति फिलहाल रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख factors में हैं। हालांकि ₹95–96 प्रति डॉलर के आसपास की exchange rate को देखते हुए currency market में volatility बनी हुई है।

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