इंडोनेशिया के शेयर बाजार में 1998 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट: MSCI ने ‘इमर्जिंग मार्केट’ दर्जा हटाने का प्रस्ताव रखा
दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया के शेयर बाजार में शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 को भारी गिरावट आई। जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स एक दिन में करीब 11 प्रतिशत टूट गया, जो जनवरी 1998 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट है। वजह बनी वैश्विक इंडेक्स प्रदाता कंपनी MSCI की घोषणा, जिसमें इंडोनेशिया को ‘इमर्जिंग मार्केट’ की श्रेणी से हटाकर ‘स्टैंडअलोन मार्केट’ में डालने का प्रस्ताव रखा गया।
MSCI ने क्या कहा?
MSCI ने कहा कि इंडोनेशिया का इमर्जिंग मार्केट बने रहना अब उचित नहीं है। कंपनी ने बाजार की गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता जताई। रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें कंपनियों के शेयरधारकों की अपारदर्शी संरचना, संदिग्ध समन्वित ट्रेडिंग और कमजोर नियमन शामिल हैं। MSCI का कहना है कि इंडोनेशियाई अधिकारियों ने सुधारों की घोषणा तो की है, लेकिन पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।
कंपनी ने इस प्रस्ताव पर परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। उसने साफ किया कि बाजार प्रशासन में ठोस और स्पष्ट सुधार के प्रमाण न मिलने पर वह प्रस्ताव को आगे बढ़ाएगी। अंतिम फैसला जून 2027 के अंत तक घोषित किया जाएगा। यह कदम निर्धारित समीक्षा से करीब एक महीने पहले आया, इसलिए निवेशक और जकार्ता के अधिकारी दोनों हैरान रह गए।
बाजार में कैसा रहा हाल?
सुबह कारोबार खुलते ही सूचकांक करीब 8 प्रतिशत गिरा, जिसके बाद 30 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। कारोबार दोबारा शुरू होने पर गिरावट और बढ़ी और सूचकांक 11 प्रतिशत से ज्यादा नीचे बंद हुआ।
इस साल अब तक सूचकांक करीब 39 से 40 प्रतिशत टूट चुका है। इसे इस समय दुनिया का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर बाजार बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार विदेशी निवेशक 2026 में अब तक लगभग 4.7 अरब डॉलर के इंडोनेशियाई शेयर बेच चुके हैं।
रुपिया पर भी दबाव
मुद्रा बाजार में भी हलचल दिखी। इंडोनेशियाई रुपिया फिसलकर करीब 18,070 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो जुलाई के अंत के बाद का सबसे कमजोर स्तर है। रिपोर्ट्स में इसका ऐतिहासिक निचला स्तर करीब 18,200 के आसपास बताया गया है। कुछ दिनों के कारोबार में रुपिया थोड़ा संभला भी। इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक ने बाजार में मौजूद रहकर रुपिया की स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
संभावित आउटफ्लो का अनुमान
‘स्टैंडअलोन’ दर्जे का मतलब है कि इंडोनेशियाई शेयर उन वैश्विक इंडेक्स से बाहर हो जाएंगे, जिन्हें ट्रैक करने वाले फंड अरबों डॉलर संभालते हैं। ऐसे फंडों को इंडोनेशियाई शेयर बेचने पड़ेंगे।
- UBS का अनुमान है कि इससे करीब 4 अरब डॉलर का निष्क्रिय (पैसिव) आउटफ्लो हो सकता है, जबकि सक्रिय निवेशकों की बिकवाली से 15 अरब डॉलर तक और निकल सकते हैं।
- एक अन्य ब्रोकरेज फर्म का अनुमान पैसिव आउटफ्लो के लिए करीब 3 अरब डॉलर का है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडोनेशिया इस श्रेणी में डाला जाने वाला सबसे बड़ा बाजार होगा।
सरकार और एक्सचेंज की प्रतिक्रिया
इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज ने कहा कि वह MSCI की स्वतंत्रता का सम्मान करता है, पर प्रस्ताव के आधार पर स्पष्टीकरण मांगेगा। एक्सचेंज के मुताबिक देश ने महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। वित्तीय सेवा प्राधिकरण ने भी कहा है कि वह आकलन की समीक्षा कर रहा है और बाजार में कानून प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे क्या?
अब असली परीक्षा जून 2027 तक की है। इस दौरान इंडोनेशिया को शेयर स्वामित्व की पारदर्शिता, फ्री-फ्लोट की जरूरत और संदिग्ध ट्रेडिंग पर कार्रवाई जैसे मोर्चों पर ठोस सुधार दिखाने होंगे। तब तक विदेशी निवेशकों का भरोसा और बाजार की अस्थिरता पर नजर बनी रहेगी। परामर्श प्रक्रिया की प्रगति और सरकार के कदमों की जानकारी आने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा।

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