Maharashtra Drought 2026: सितंबर अंत तक 100% सूखा घोषित करने की तैयारी, फसलों के नुकसान से किसान बेहाल

20 जिलों के 83 से अधिक तालुकाओं में 40 दिनों से सूखा; राज्य सरकार ने समय से पहले शुरू किया फसल सर्वेक्षण (पंचनामा), बिजली बिल और फीस माफी के निर्देश।

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महाराष्ट्र में मॉनसून की लंबी खींच और लगातार 20 से 40 दिनों तक बारिश न होने के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने संकेत दिए हैं कि मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रियाओं के बाद राज्य सरकार सितंबर 2026 के अंत तक 100% सूखा घोषित कर सकती है। अमरावती, सोलापुर, लातूर, बीड़, बुलढाणा और धाराशिव सहित 20 से अधिक जिलों में खरीफ की मुख्य फसलें पानी के अभाव में पूरी तरह करप गई हैं।

अगस्त के पहले सप्ताह के बाद से राज्य के बड़े भूभाग में बारिश न होने से किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। सूखा प्रबंधन संहिता (Drought Management Code) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के मानदंडों के अनुसार, सूखा घोषित करने के लिए वर्षा, मृदा नमी, भूजल स्तर और उपग्रह आधारित फसल स्थिति जैसे वैज्ञानिक संकेतकों का जमीनी सत्यापन किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि औपचारिक घोषणा से पहले ही प्रशासनिक स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

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1. खरीफ फसलों को भारी नुकसान और राहत के शुरुआती कदम

लंबे शुष्क दौर के कारण सोयाबीन, कपास, गन्ना, मक्का और दालों की फसलों को व्यापक क्षति पहुंची है:

  • आपातकालीन राहत उपाय: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में छात्रों की परीक्षा व शिक्षण फीस माफ करने, बिजली बिलों में राहत देने और टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति के आदेश जारी किए हैं।
  • राज्य स्तर पर मदद: मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार केंद्रीय सहायता का इंतजार किए बिना अपने संसाधनों से किसानों को तत्काल राहत राशि हस्तांतरित करेगी।

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2. स्थानीय जल स्रोतों का पुनरुद्धार और दीर्घकालिक रणनीति

केवल आपातकालीन टैंकरों पर निर्भर रहने के बजाय राज्य भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांवों में स्थानीय जल स्रोतों का पुनरुद्धार करें और टिकाऊ पेयजल आपूर्ति नेटवर्क तैयार करें:

  • जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture): बार-बार बनने वाले सूखे के हालात से निपटने के लिए सूखा-प्रतिरोधी फसलों की बुआई, सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation), फसल विविधीकरण और फसल बीमा दावों का त्वरित निस्तारण अनिवार्य किया जा रहा है।

निष्कर्ष 

महाराष्ट्र में वर्तमान सूखा संकट तत्काल राहत वितरण के साथ-साथ जल संरक्षण की दीर्घकालिक नीतियों को लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। सरकार द्वारा पारदर्शी फसल सर्वेक्षण और एनडीआरएफ मानकों के तहत प्रदान की जाने वाली त्वरित वित्तीय सहायता ही राज्य के लाखों किसानों को इस बड़े सामाजिक-आर्थिक संकट से उबार सकती है।

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By Kanchan

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