ट्रम्प का EPA विनियमन के खेल से खुद को अलग कर रहा है | ग्रिस्ट

EPA Power Plant पर अमेरिका में बड़ा फैसला! EPA ने EPA Power Plant से जुड़ी ग्रीनहाउस गैस सीमाएं खत्म कीं—बाइडेन युग की नीति में बड़ा बदलाव।

अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने कोयला और प्राकृतिक गैस से चलने वाले बिजली संयंत्रों पर लगी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन सीमाओं को खत्म करने का बड़ा ऐलान किया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की जलवायु नीतियों को पलटने की दिशा में अब तक के सबसे बड़े फैसलों में गिना जा रहा है, और इसे अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी नियामक-विमुक्ति (डीरेगुलेशन) कार्रवाई बताया जा रहा है।

क्या हुआ है

14 सितंबर 2026 को EPA प्रशासक ली ज़ेल्डिन ने जीवाश्म ईंधन से चलने वाले बिजली संयंत्रों के लिए तय कार्बन प्रदूषण मानकों को आंशिक रूप से निरस्त करने वाले अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही एजेंसी ने एक अतिरिक्त प्रस्ताव भी पेश किया है, जिसमें जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली संयंत्रों से जुड़े ग्रीनहाउस गैस निष्कर्षों को पूरी तरह वापस लेने और क्लीन एयर एक्ट की धारा 111 के तहत बने सभी नियमों को खत्म करने का प्रस्ताव है। ज़ेल्डिन ने ह्यूस्टन में, जहां अमेरिका G20 एनर्जी समिट की मेज़बानी कर रहा है, यह ऐलान करते हुए कहा कि EPA बिजली संयंत्रों के लिए बचे हुए सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन मानकों को भी रद्द करने का प्रस्ताव रख रहा है — “सभी को।”

किन नियमों पर पड़ेगा असर

यह फैसला 2024 में बाइडेन प्रशासन के दौरान लागू किए गए उस सख्त नियम को पलटता है, जिसके तहत कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपने धुएं से निकलने वाले उत्सर्जन को पकड़ने वाली तकनीक (कार्बन कैप्चर) अपनानी थी, या फिर उन्हें बंद करना पड़ता। यह नियम 2030 के दशक से लागू होना था। इसके अलावा यह फैसला 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान नए बिजली संयंत्रों के लिए तय किए गए मानकों को भी निरस्त करता है। गौरतलब है कि बिजली संयंत्र अमेरिका में जलवायु को गर्म करने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत हैं, जो परिवहन क्षेत्र के बाद आते हैं।

EPA का तर्क क्या है?

EPA का कहना है कि बाइडेन-युग के इस नियम को हटाने से उद्योग जगत को 300 अरब डॉलर से ज्यादा की लागत बचेगी, और इससे अमेरिकी ऊर्जा क्षमता को “मुक्त” करने में मदद मिलेगी। एजेंसी के सहायक प्रशासक आरोन ज़ाबो के अनुसार यह बदलाव बिजली कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं के लिए लागत और बचत के आधार पर सबसे बेहतर फैसला लेने की आज़ादी देगा, न कि उन्हें पुराने या कम कुशल संयंत्र बंद करने के लिए मजबूर किया जाएगा। कोयला उद्योग की प्रतिनिधि संस्था अमेरिकाज़ पावर की सीईओ मिशेल ब्लडवर्थ ने कहा कि यह फैसला ग्रिड की विश्वसनीयता की रक्षा करेगा और डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा उन्नत विनिर्माण से बढ़ती बिजली मांग के इस दौर में उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों से बचाएगा।EPA Proposes Removal of Carbon Dioxide Limits on Power Plants - Eos

ईपीए ने बिजली संयंत्रों से संबंधित जलवायु नियमों को रद्द कर दिया है, जिससे बाइडेन युग में लागू उत्सर्जन सीमा पर संदेह पैदा हो गया है ...

पर्यावरण संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी नागरिकों की सेहत को नुकसान पहुँचेगा और पर्यावरण बिगड़ेगा। सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी की क्लाइमेट लॉ इंस्टीट्यूट की वकील मैगी कोल्टर ने कहा कि देश के एक चौथाई जलवायु प्रदूषण के अस्तित्व को नकारना पूरी तरह लापरवाही भरा कदम है, और इससे भीषण गर्मी की लहरों, तेज तूफानों और विनाशकारी जंगल की आग जैसी घटनाओं से और ज्यादा जानें जाएंगी। कोलंबिया विश्वविद्यालय के कानून प्रोफेसर और सैबिन सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज लॉ के निदेशक माइकल गेरार्ड ने कहा कि यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब दुनिया को ग्रह को गर्म करने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करने की जरूरत है, न कि इसे और बढ़ने देने की। उनके अनुसार 2026 अब तक दर्ज इतिहास का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है।

यह अकेला कदम नहीं है

गौरतलब है कि 2025 में ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से EPA ने पर्यावरण निगरानी से जुड़े कई नियमों में लगातार ढील दी है। इसी साल फरवरी में एजेंसी ने 2009 के उस वैज्ञानिक निष्कर्ष को भी वापस ले लिया था, जिसमें कहा गया था कि कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसें सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए खतरा हैं — यही निष्कर्ष वाहनों, बिजली संयंत्रों और अन्य औद्योगिक वायु प्रदूषण स्रोतों के नियमन का आधार बनता था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे “अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी नियामक-विमुक्ति कार्रवाई” बताया था।

आगे कानूनी लड़ाई की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई नीति को लेकर कानूनी लड़ाई वर्षों तक चल सकती है, और हो सकता है कि यह मौजूदा प्रशासन के कार्यकाल के दौरान पूरी तरह सुलझ भी न पाए। बाइडेन प्रशासन के दौरान EPA के सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामलों की देखरेख कर चुकीं वकील मेगन ग्रीनफील्ड के अनुसार अपील अदालतों में ऐसे मामले अक्सर धीमी गति से आगे बढ़ते हैं, और यह कहना अभी मुश्किल है कि यह मामला मौजूदा प्रशासन के कार्यकाल खत्म होने से पहले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच भी पाएगा या नहीं। “EPA Power Plant के नियम बदले, तो सवाल सिर्फ बिजली का नहीं—पर्यावरण के भविष्य का भी है।”

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By Kanchan

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