‘भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं’: ओआईसी के कश्मीर बयान पर विदेश मंत्रालय का करारा जवाब, कहा—’पाकिस्तान को आतंकवाद रोकने की सलाह दे OIC’
81वें यूएन महासभा सम्मेलन में ओआईसी संपर्क समूह के संयुक्त वक्तव्य पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया; जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न व अविभाज्य अंग बताया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (81st UNGA Session) के दौरान इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के ‘जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह’ (Contact Group on Jammu & Kashmir) द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य (Joint Communique) पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया है। 23 सितंबर 2026 को विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक सख्त बयान जारी कर कहा कि 57 मुस्लिम देशों के इस संगठन को भारत के विशुद्ध रूप से आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार (No Locus Standi) नहीं है।
न्यू यॉर्क में आयोजित OIC संपर्क समूह की बैठक में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने भाग लिया था, जहां उन्होंने कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया। इस समूह में पाकिस्तान के अलावा तुर्की, सऊदी अरब, अज़रबैजान और नाइजर शामिल हैं। भारत सरकार ने पाकिस्तान के इस एजेंडे को ‘झूठा और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार’ (Fabricated Propaganda) करार देते हुए ओआईसी को नसीहत दी कि वह पाकिस्तान को अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) पर लगाम कसने की सलाह दे, न कि उसे भारत-विरोधी प्रचार का मंच प्रदान करे।
1. ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग’: विदेश मंत्रालय का स्पष्ट संदेश
विदेश मंत्रालय ने ओआईसी द्वारा जारी बयान के जवाब में भारत का रुख पूरी तरह से स्पष्ट किया:
- अविभाज्य क्षेत्र: विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग (Integral and Inalienable Part) हैं और रहेंगे।
- प्रोपेगैंडा से नहीं बदलेगी सच्चाई: भारत ने कहा कि राजनीतिक रूप से प्रेरित झूठे बयानों को बार-बार दोहराने से यह भौगोलिक और संवैधानिक सच्चाई नहीं बदल सकती।
- ओआईसी की साख पर सवाल: भारत ने चेतावनी दी कि एक देश के प्रायोजित एजेंडे को बिना सोचे-समझे समर्थन देने से ओआईसी की खुद की अंतरराष्ट्रीय साख और विश्वसनीयता (Credibility) पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
2. पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरने की नसीहत
भारत ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में ओआईसी को सीधे तौर पर सलाह दी कि वह अपने मंच का दुरुपयोग रोके:
- आतंकवाद पर आत्ममंथन की जरूरत: भारत ने कहा कि ओआईसी को पाकिस्तान की मदद करने के बजाय उसे आत्ममंथन करने और अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में फल-फूल रहे आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने के लिए कहना चाहिए।
- वैश्विक कूटनीति में भारत का रुख: भारत ने बार-बार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह साबित किया है कि अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिसे पाकिस्तान पचा नहीं पा रहा है।
निष्कर्ष
81वें यूएन महासभा सम्मेलन के दौरान भारत का यह सख्त रुख यह दर्शाता है कि अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के मुद्दे पर भारत किसी भी वैश्विक संगठन के अनावश्यक हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। ओआईसी को यह समझना होगा कि पाकिस्तान के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनने के बजाय उसे क्षेत्र में शांति और आतंकवाद के खात्मे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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