28 सितंबर विशेष: भगत सिंह की 119वीं जयंती, लता मंगेशकर का जन्मदिन और विश्व रेबीज़ दिवस
आज सोमवार, 28 सितंबर 2026 की तारीख भारतीय इतिहास और संस्कृति में कई वजहों से खास है। एक तरफ यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती है, जिनकी क्रांतिकारी विरासत आज भी युवाओं को प्रेरित करती है। दूसरी तरफ यह स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जन्म का दिन भी है, जिनकी आवाज़ ने दशकों तक भारतीय संगीत को समृद्ध किया। इन दोनों के साथ आज विश्व रेबीज़ दिवस भी मनाया जा रहा है।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को तत्कालीन अविभाजित पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था। यह इलाका अब पाकिस्तान के फैसलाबाद क्षेत्र में आता है। वे एक सिख परिवार से थे, और बहुत कम उम्र में ही उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में कदम रख दिया था। महज 23 साल की उम्र में, 23 मार्च 1931 को उन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इसी वजह से उन्हें भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सबसे साहसी और प्रेरक चेहरों में गिना जाता है। हर साल इस दिन देशभर में, खासतौर पर पंजाब में, श्रद्धांजलि सभाओं और कार्यक्रमों का आयोजन होता है। पिछले वर्षों में खटकड़ कलां गांव में राज्य स्तरीय समारोह भी आयोजित होते रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें याद करने पहुंचते हैं।
लता मंगेशकर: सुरों की साम्राज्ञी
28 सितंबर की तारीख का संगीत से भी गहरा रिश्ता है। भारत रत्न लता मंगेशकर का जन्म इसी दिन 1929 में इंदौर में मशहूर संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। इस हिसाब से आज उनकी 97वीं जयंती है। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही गायन में महारत हासिल कर ली थी और कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए। पिछली पीढ़ी ने उनकी शोख और रूमानी आवाज़ का आनंद लिया, जबकि मौजूदा पीढ़ी उनकी गहरे समंदर जैसी ठहरी हुई, परिपक्व गायकी सुनते हुए बड़ी हुई है। 6 फरवरी 2022 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हैं। दिलचस्प बात यह है कि मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के लिए यह दिन और भी खास हो जाता है, क्योंकि यहीं से उनका सफर शुरू हुआ था।
पेनिसिलिन की खोज का दिन
चिकित्सा जगत के लिहाज से भी 28 सितंबर एक अहम तारीख है। इसी दिन 1928 में ब्रिटिश वैज्ञानिक एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन की खोज की थी, जिसे दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा माना जाता है। इस खोज ने आगे चलकर करोड़ों जानें बचाईं और आधुनिक चिकित्सा की दिशा ही बदल दी।
विश्व रेबीज़ दिवस
हर साल 28 सितंबर को विश्व रेबीज़ दिवस भी मनाया जाता है। इसका मकसद कुत्तों के काटने और उससे फैलने वाली जानलेवा बीमारी रेबीज़ के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह बीमारी लगभग शत-प्रतिशत मामलों में घातक होती है, लेकिन समय पर टीकाकरण और सही इलाज से इससे पूरी तरह बचा जा सकता है। इसलिए जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना और बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी माना जाता है।
इतिहास की और भी घटनाएं
इतिहास में 28 सितंबर की तारीख कई अन्य घटनाओं के लिए भी दर्ज है। 1781 में इसी दिन अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यॉर्कटाउन की घेराबंदी शुरू हुई थी, जो आगे चलकर युद्ध के निर्णायक मोड़ों में से एक साबित हुई। इस तरह एक ही तारीख में क्रांति, कला, विज्ञान और जनस्वास्थ्य, चारों की कहानियां जुड़ी हुई हैं।
आज का दिन क्यों याद रखने लायक है
भगत सिंह का साहस, लता मंगेशकर की साधना और फ्लेमिंग की खोज, तीनों अलग-अलग क्षेत्रों की मिसालें हैं, लेकिन इनमें एक बात समान है: समर्पण। यही वजह है कि 28 सितंबर सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा लेने का एक मौका भी है, जब हम देश के इन नायकों और उनके योगदान को याद करते हैं।

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