17 सितंबर से शुरू हो रहा है ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान — इस बार क्या है खास?
कल यानी 17 सितंबर से देश एक बार फिर सफाई के महाअभियान में जुटने वाला है। ‘स्वच्छता ही सेवा’ यानी SHS अभियान अपनी वार्षिक शुरुआत करने जा रहा है, और इस बार सरकार ने इसे सिर्फ झाड़ू उठाने तक सीमित न रखते हुए एक बड़े सामाजिक आंदोलन की शक्ल देने की तैयारी की है। आइए जानते हैं कि आखिर इस साल का अभियान पिछले वर्षों से किस तरह अलग होगा।
कब से कब तक चलेगा यह अभियान?
राष्ट्रीय स्तर पर यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा — यानी पूरा एक महीना। हालांकि हर राज्य अपने हिसाब से इसकी अवधि तय कर रहा है। जैसे पंजाब और ओडिशा ने इसे 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक, यानी पखवाड़े भर के लिए चलाने का फैसला किया है, और 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के साथ इसका समापन करने की योजना बनाई है।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने हाल ही में सभी राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों और मिशन निदेशकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि हर कोई 17 सितंबर से अपने घर से ही इस अभियान की शुरुआत करे।
इस साल की थीम क्या कहती है?
“स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत” — यही है इस साल का केंद्रीय नारा। इसके पीछे मकसद साफ है: सफाई अब सिर्फ सरकारी कर्मचारियों या नगर निगम का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी बनाई जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि यह थीम “पूरे समाज और पूरी सरकार” वाली सोच को दर्शाती है, जिसमें विकसित भारत के सपने को स्वच्छता के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
किन पांच मोर्चों पर होगा फोकस?
इस बार अभियान को पांच प्रमुख स्तंभों के इर्द-गिर्द बुना गया है:
पहला, क्लीननेस टारगेट यूनिट्स (CTU) और कचरे से भरे संवेदनशील स्थानों को तय समय-सीमा में बदलना। ये वे जगहें हैं जहां भीड़भाड़ ज्यादा होती है और गंदगी की समस्या सबसे गंभीर रहती है।
दूसरा, छात्रों और युवाओं को ‘स्वच्छता ज्ञान यात्रा’ और ‘स्वच्छता संवाद’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए जोड़ना, ताकि आने वाली पीढ़ी में स्वच्छता की आदत शुरू से ही डाली जा सके।
तीसरा, ‘सफाईमित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर’ — इनके तहत सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच होगी और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। यह पहलू खासतौर पर सफाई कर्मियों की गरिमा और उनके अधिकारों पर केंद्रित है।
चौथा, जन भागीदारी बढ़ाने के लिए जीरो-वेस्ट यानी बिना कचरा पैदा किए खेल गतिविधियां और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव आयोजित करना।
पांचवां और आखिरी, ‘स्वच्छता से समृद्धि’ — यानी कचरे से कला और कचरे से धन जैसी सर्कुलर इकॉनमी की पहलों को बढ़ावा देना, जिसमें कचरे को ही किसी नई उपयोगी चीज़ में बदला जाता है।
राज्यों की अपनी-अपनी तैयारी
ओडिशा ने इस मौके पर एक करोड़ दीये जलाने की योजना बनाई है, जिसमें हर घर की भागीदारी होगी। राज्य में ग्रामीण इलाकों में जलाशयों से जुड़े विकास कार्य पंचायती राज विभाग संभालेगा, जबकि शहरी क्षेत्रों की जिम्मेदारी आवास एवं शहरी विकास विभाग की होगी। इसके अलावा 1 अक्टूबर को पूरे राज्य में “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” नाम से श्रमदान अभियान भी चलाया जाएगा।
वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि उनका राज्य इस अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर ठोस नतीजों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सफाई को महज एक अभियान की तरह नहीं, बल्कि एक स्थायी सामाजिक आंदोलन की तरह अपनाएं।
आखिर यह अभियान इतना जरूरी क्यों है?
अगर आप सोच रहे हैं कि हर साल एक जैसा अभियान चलाने का क्या फायदा, तो जवाब सीधा है — स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि रोज़ की आदत है। यह अभियान उसी आदत को साल-दर-साल ताज़ा रखने और नागरिकों को याद दिलाने का जरिया है कि साफ भारत का सपना अकेले सरकार पूरा नहीं कर सकती। इसमें हर घर, हर मोहल्ले और हर नागरिक की भूमिका है। जब मंत्रालय कहता है कि अभियान “अपने घर से शुरू करें,” तो असल में यही संदेश दिया जा रहा है कि बदलाव की शुरुआत बड़े मंचों से नहीं, बल्कि अपने दरवाजे से होती है।

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