सूडान में भयानक त्रासदी: सोने की खदान धंसने से 67 खनिकों की दर्दनाक मौत, मलबे के नीचे दबे कई मजदूर
पश्चिमी कोर्डोफान के अल-नुहुद क्षेत्र में भारी बारिश के बाद ढहीं खदान की सुरंगें; रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के नियंत्रण वाले इलाके में बिना सुरक्षा मानकों के चल रहा था अवैध उत्खनन।
अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी देश सूडान के पश्चिमी कोर्डोफान (West Kordofan) प्रांत में एक बड़ा और दर्दनाक हादसा सामने आया है। अल-नुहुद शहर के पास स्थित अल-जारा (Al-Zara) सोने की खदान की सुरंगें अचानक ढह जाने से कम से कम 67 खनिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय चिकित्सा समूहों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे के नीचे दबे अन्य खनिकों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान जारी है।
यह भीषण हादसा सूडान में अप्रैल 2023 से जारी गृहयुद्ध और उसके कारण चरमरा चुकी प्रशासनिक व्यवस्था के बीच हुआ है। जिस अल-जारा खदान में यह दुर्घटना हुई, वह क्षेत्र सूडान के शक्तिशाली अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) के नियंत्रण में है। इस क्षेत्र में बिना किसी सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन तकनीकी सहायता और नियमन के हजारों स्थानीय लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए खतरनाक और अवैध सोने के खनन में जुटे हुए हैं।
1. बारिश बनी हादसे का कारण, पारंपरिक औजारों से रेस्क्यू में देरी
स्थानीय सूत्रों और जीवित बचे खनिकों के अनुसार, हादसे के समय खदान में लगभग 100 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण खदान की मिट्टी बेहद ढीली और असुरक्षित हो गई थी। मंगलवार देर रात अचानक खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे नीचे गहराई में काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का कोई अवसर नहीं मिला।
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी खैर अल-सैय्यद जबारा ने बताया कि रात में दुर्घटना होने और दुर्गम इलाका होने के कारण प्रशासनिक सहायता समय पर नहीं पहुँच सकी। इसके चलते साथी खनिकों ने ही हिम्मत दिखाते हुए कुदाल और फावड़े जैसे साधारण औजारों से मलबे को हटाने का काम शुरू किया। बाद में भारी मशीनों के पहुँचने पर मलबे से 67 शवों को बाहर निकाला गया।
2. गृहयुद्ध, अर्थव्यवस्था और अवैध सोने का नेटवर्क
सूडान में पिछले तीन वर्षों से जारी सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच के संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद से सूडान के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 10 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई है। रोजगार के अवसर समाप्त होने के कारण देश के लगभग 20 लाख से अधिक नागरिक अपनी आजीविका के लिए अनौपचारिक और असुरक्षित सोने के खनन (Artisanal Gold Mining) पर निर्भर हैं।
सूडान का कुल सोना उत्पादन मुख्य रूप से इन्हीं अनौपचारिक खदानों से होता है। आरएसएफ के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सोने का व्यापार इस अर्धसैनिक समूह के लिए वित्तीय संसाधनों का मुख्य जरिया बन चुका है, जिसके कारण मजदूरों की जान-माल की सुरक्षा और बुनियादी आपातकालीन सेवाओं की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
3. सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
सुडानी डॉक्टर्स नेटवर्क (Sudanese Doctors Network) और मानवाधिकार संगठनों ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए नियंत्रणकारी अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही की कड़े शब्दों में निंदा की है। चिकित्सा समूह ने चेतावनी दी है कि बिना हेलमेट, ऑक्सीजन और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के सैकड़ों फीट गहराई में मजदूरों को भेजना सीधे तौर पर उनकी जान जोखिम में डालना है।
संगठनों ने मांग की है कि आरएसएफ और स्थानीय प्रशासन सभी असुरक्षित खदानों में उत्खनन पर तुरंत रोक लगाए तथा दुर्घटना स्थल पर फंसे अन्य लोगों को बचाने के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए।
निष्कर्ष
अल-जारा खदान में हुई 67 मौतों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गृहयुद्ध की आग में जल रहे सूडान में केवल गोलियों से ही नहीं, बल्कि भुखमरी और अवैध संसाधनों के शोषण से भी आम नागरिक अपनी जान गंवा रहे हैं। यदि सूडान में अवैध खनन पर नियंत्रण और मजदूरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानक लागू नहीं किए गए, तो इस तरह के दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति रोक पाना असंभव होगा।

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