दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 24 घंटे निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश

दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। 5 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लगातार निगरानी कैसे की जाती है और क्या इसके लिए चौबीसों घंटे काम करने वाले निगरानी केंद्र या नियंत्रण कक्ष मौजूद हैं। अदालत ने अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध को पहले ही रोकने वाली पुलिस व्यवस्था पर जोर दिया।

दिल्ली में महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- अपराध होने के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम जरूरी | Ujjwal Duniya

यह मामला ‘इन री: रीसेंट रेप इंसिडेंट्स इन दिल्ली एनसीआर’ नाम से सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान वाले मामले से जुड़ा है। अदालत ने 28 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ सामने आई कई कथित यौन हिंसा की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की थी।

24 घंटे निगरानी पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है। यदि कैमरों से मिलने वाली जानकारी पर लगातार नजर नहीं रखी जाती और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर पुलिस तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देती, तो ऐसी निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

अदालत ने 24 घंटे निगरानी केंद्र, सीसीटीवी की प्रभावी निगरानी और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और पुलिस वाहनों की तैनाती की समीक्षा करने को कहा गया।

स्कूल-कॉलेज और छात्राओं के आसपास सुरक्षा पर विशेष ध्यान

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सुप्रीम कोर्ट ने उन इलाकों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना है जहां बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा आते-जाते हैं। इनमें स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, पार्क, सड़कें, बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थान शामिल हैं।

अदालत का सवाल केवल यह नहीं है कि इन स्थानों पर पुलिस मौजूद है या नहीं, बल्कि यह भी है कि पुलिस को पहले से कैसे पता चलेगा कि कौन-सा इलाका अधिक जोखिम वाला है। इसी कारण अदालत ने संवेदनशील स्थानों की पहचान, उनके जोखिम का आकलन और वहां नियमित निगरानी तथा गश्त की व्यवस्था पर जोर दिया है।

अपराध के बाद नहीं, अपराध से पहले कार्रवाई जरूरी

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रोकथाम आधारित पुलिस व्यवस्था है। इसका अर्थ है कि पुलिस का काम केवल शिकायत मिलने या अपराध होने के बाद आरोपी की तलाश करना नहीं होना चाहिए। पुलिस को अपराध की संभावना वाले स्थानों, समय और परिस्थितियों की पहचान कर पहले से कार्रवाई करनी चाहिए।

28 सितंबर के आदेश में अदालत ने दिल्ली-एनसीआर के संवेदनशील स्थानों का सर्वेक्षण, प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी की जांच तथा ऐसे स्थानों पर गश्त मजबूत करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि खराब या बंद पड़े कैमरों और रोशनी की व्यवस्था को जल्द ठीक किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों से संवाद भी पुलिस की जिम्मेदारी

अदालत ने पुलिस को समाज से बेहतर संपर्क स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। स्थानीय लोगों, छात्राओं, शैक्षणिक संस्थानों और आवासीय क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारी किसी इलाके की वास्तविक सुरक्षा स्थिति समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

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इसका उद्देश्य सामुदायिक पुलिस व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पुलिस और स्थानीय समुदाय मिलकर जोखिम वाले स्थानों की पहचान करते हैं और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान करते हैं। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पुलिस को जमीन पर मौजूद लोगों की शिकायतों और चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।

त्योहारों और छुट्टियों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि त्योहारों, छुट्टियों और ऐसे समय में जब सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही बढ़ती है, पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। भीड़, देर रात तक होने वाली गतिविधियां और सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ता दबाव सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।

ऐसे समय में संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त गश्त, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था अपराध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

निगरानी के साथ निजता की सुरक्षा भी जरूरी

हालांकि सीसीटीवी और डिजिटल निगरानी सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत कर सकती है, लेकिन इनका इस्तेमाल कानून और उचित सुरक्षा उपायों के तहत होना चाहिए। निगरानी का उद्देश्य अपराध रोकना होना चाहिए, न कि नागरिकों की निजी जिंदगी में अनावश्यक हस्तक्षेप करना।

इसलिए निगरानी व्यवस्था में स्पष्ट जिम्मेदारी, सीमित और वैध उपयोग, रिकॉर्ड की सुरक्षा तथा दुरुपयोग रोकने के उपाय जरूरी हैं। सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन बनाए रखना भी पुलिस व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

अब चुनौती आदेश लागू करने की है

सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा कार्यवाही का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि अदालत केवल योजनाओं और कागजों पर मौजूद व्यवस्थाओं की जानकारी नहीं चाहती, बल्कि यह जानना चाहती है कि वे जमीन पर वास्तव में कितनी प्रभावी हैं।

24 घंटे निगरानी केंद्र, काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे, बेहतर रोशनी, नियमित गश्त, संवेदनशील स्थानों की पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया तभी प्रभावी होंगे जब इनकी लगातार निगरानी और जवाबदेही तय हो।

दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट है: पुलिस व्यवस्था का लक्ष्य केवल अपराध के बाद आरोपी तक पहुंचना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां तैयार करना भी होना चाहिए जिनमें अपराध करने वाले को कानून का डर हो और आम नागरिक को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस हो।

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By Kanchan

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