वैश्विक व्यवस्था में ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व: शी जिनपिंग का ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ विजन, एआई और व्यापार के लिए पेश कीं 5 बड़ी अंतर्राष्ट्रीय पहलें
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति ने दिया कड़ा संदेश; एकपक्षवाद और “जिसकी लाठी उसकी भैंस” की नीति को खारिज करते हुए नियम-आधारित बहुध्रुवीय विश्व का किया आह्वान।
वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और उभरते देशों) को एकजुट करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक रोडमैप पेश किया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ (विस्तारित ब्रिक्स समूह) के बीच व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने के लिए 5 प्रमुख वैश्विक पहलों का औपचारिक ऐलान किया। इन पहलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ओपन सोर्स ज़ोन, ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) साझेदारी और डिजिटल अर्थव्यवस्था क्लाउड प्लेटफॉर्म का निर्माण मुख्य रूप से शामिल है।
पिछले दो दशकों में ब्रिक्स के हुए ऐतिहासिक विस्तार (जिसमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया शामिल हो चुके हैं) के बाद शी जिनपिंग का यह संबोधन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्व मंच पर पश्चिमी देशों के बढ़ते दबदबे और एकतरफा प्रतिबंधों के जवाब में, चीन ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ को एक मजबूत और व्यावहारिक मंच के रूप में विकसित करना चाहता है। अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि दुनिया में “जिसकी लाठी उसकी भैंस” (Might makes right) का दौर बहुत पहले खत्म हो चुका है और वैश्विक नियम सभी देशों की सहमति से तय होने चाहिए।
1. ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ के लिए शी जिनपिंग की 5 प्रमुख वैश्विक पहलें
अपने संबोधन के दूसरे सत्र में शी जिनपिंग ने 5 विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोग का खाका प्रस्तुत किया:
- 1. ब्रिक्स एआई ओपन सोर्स ज़ोन (AI Open Source Zone): चीन ब्रिक्स देशों के बीच बड़े भाषा मॉडल (LLM) के विकास, एआई प्रशिक्षण और एक खुले एआई पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए नेतृत्व करेगा।
- 2. ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र (BRICS SEZ Partnership): सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए एक बुद्धिमान पोर्टल और नीतिगत समन्वय स्थापित किया जाएगा।
- 3. डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म: डिजिटल अर्थव्यवस्था में कौशल विकास, तकनीकी आदान-प्रदान और औद्योगिक तालमेल के लिए इस क्लाउड प्लेटफॉर्म की शुरुआत की जाएगी।
- 4. स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग व मानक विकास: पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक बनाने और ब्रिक्स देशों में स्मार्ट फैक्ट्रियां स्थापित करने के लिए तकनीकी सहायता दी जाएगी।
- 5. टैलेंट डेवलपमेंट व ब्रिक्स इंजीनियर्स प्रोग्राम: युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण अभियानों और कार्यशालाओं का संचालन किया जाएगा।
2. नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और बहुध्रुवीय विश्व की वकालत
कूटनीतिक स्तर पर शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में निष्पक्षता और संप्रभुता के सम्मान पर बल दिया:
- संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका: शी जिनपिंग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की सर्वोपरिता और बहुपक्षवाद का झंडा बुलंद रखना ग्लोबल साउथ के साझा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
- दोहरे मापदंडों का विरोध: उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, बिना किसी दोहरे मापदंड (Double Standards) या आधिपत्यवादी सोच के।
- आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता: वैश्विक आर्थिक झटकों से बचने के लिए उन्होंने ब्रिक्स देशों से औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) की स्थिरता बनाए रखने और एक एकीकृत बाजार बनाने की अपील की।
3. भारत-चीन संबंध और ब्रिक्स का भविष्य
18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के बीच कूटनीतिक समीकरणों में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए:
- व्यावहारिक सहयोग पर जोर: 2020 के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में रही कड़वाहट के बीच, शिखर सम्मेलन में आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साझा बिंदुओं पर सहमति बनना एक बड़ा रणनीतिक मोड़ है।
- सेवा व्यापार मंच (Service Trade Forum): शी जिनपिंग ने घोषणा की कि व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देने के लिए चीन अगले वर्ष ‘ब्रिक्स सर्विस ट्रेड फोरम’ की मेज़बानी करेगा।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा पेश किया गया यह ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ रोडमैप केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी में एक नए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक है। एआई, डिजिटल तकनीक और व्यापार में निष्पक्षता का आह्वान करके चीन ने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने का प्रयास किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिक्स का यह नया विस्तारित स्वरूप आने वाले समय में वैश्विक शासन (Global Governance) को किस हद तक पुनर्गठित कर पाता है।

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