दिल्ली प्रदर्शन में महिला CRPF कर्मी से कथित मारपीट, ‘अत्यधिक धैर्य’ के लिए बल प्रमुख ने की सराहना

दिल्ली में 16 अक्टूबर को हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक महिला कर्मी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक महिला को सुरक्षा कर्मी के साथ बहस करने और कथित तौर पर थप्पड़ मारने के बाद देखा गया। इस घटना के बाद सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने महिला कर्मी के संयम, धैर्य और सहनशीलता की सराहना की है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने कथित हमले के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर संबंधित महिला की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की है।

यह घटना ऐसे समय हुई, जब दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन हो रहे हैं।

महिला सीआरपीएफ कर्मी के धैर्य की सराहना

सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने 18 अक्टूबर को अपने निजी एक्स खाते पर घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बल के नेतृत्व ने संबंधित महिला कर्मी की प्रशंसा की है। उनके अनुसार, ड्यूटी के दौरान कथित हमले का सामना करने के बावजूद महिला कर्मी ने अत्यधिक धैर्य, दृढ़ता और सहनशीलता दिखाई।

जीपी सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि महिला कर्मी जूडो की प्रशिक्षित खिलाड़ी हैं और सीआरपीएफ की जूडो टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि बल देश में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मामले में संबंधित पुलिस द्वारा कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सीआरपीएफ प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित घटना 16 अक्टूबर की शाम दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित पालिका बाजार के पास हुई। यह इलाका राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के नजदीक है। उस समय कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ओर से ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित किया गया था।

सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित लगभग नौ सेकंड के वीडियो में एक महिला सुरक्षा कर्मी के सामने आकर उससे बहस करती दिखाई देती है। इसके बाद वह महिला कर्मी को कथित तौर पर थप्पड़ मारती नजर आती है। वीडियो में अन्य पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सीटी बजाते हुए भी देखा जा सकता है।

हालांकि, किसी छोटे वीडियो से घटना की पूरी पृष्ठभूमि और सभी परिस्थितियों का पता नहीं चलता। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने महिला सीआरपीएफ कर्मी पर कथित हमले के मामले में एक अज्ञात प्रदर्शनकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस संबंधित महिला की पहचान करने में जुटी है, ताकि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा सके।

इस मामले के अलावा, प्रदर्शन से संबंधित अन्य प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं। पुलिस के अनुसार, ये मामले निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोपों से जुड़े हैं।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में दर्ज प्राथमिकी और कथित हमले की जांच को अलग-अलग समझना जरूरी है।

क्यों हो रहे हैं दिल्ली में प्रदर्शन?

कॉकरोच जनता पार्टी और उससे जुड़े कुछ समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं।

16 अक्टूबर के मार्च का उद्देश्य तिरंगा लेकर विरोध दर्ज कराना था। इसके लिए कनॉट प्लेस के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिस ने क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू होने और निर्धारित प्रदर्शन स्थल से जुड़ी पाबंदियों का हवाला देते हुए लोगों को वहां एकत्र नहीं होने की सलाह दी थी।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव के मामले में किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, हटाए गए नामों में मृत, दूसरे स्थान पर जा चुके और सत्यापन में नहीं मिल सके मतदाता भी शामिल थे। आयोग ने यह भी कहा है कि गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में मतदाता दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल महिला सीआरपीएफ कर्मी पर कथित हमले की जांच दिल्ली पुलिस के जिम्मे है। संबंधित महिला की पहचान, घटना के पूरे संदर्भ और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।

इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के साथ व्यवहार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सवाल को फिर सामने ला दिया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की सुरक्षा, दोनों सार्वजनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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By Kanchan

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