महालया 2026: आज है महालया, आकाशवाणी पर गूंजेगी बीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज; जानें तारीख, महत्व और शुभकामनाएं

शरद ऋतु की सुबह, शिउली के फूलों की खुशबू और रेडियो पर गूंजती चंडीपाठ की आवाज। बंगाल में दुर्गा पूजा के आगमन का एहसास कुछ ऐसा ही होता है। 10 अक्टूबर 2026 को महालया मनाया जा रहा है। यह दिन पितृपक्ष के समापन और देवीपक्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसी सुबह लाखों लोग आकाशवाणी पर बीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज में प्रसिद्ध कार्यक्रम महिषासुरमर्दिनी सुनते हैं और मां दुर्गा के आगमन का स्वागत करते हैं।

दुर्गा पूजा 2026: मिलिए बीरेंद्र कृष्ण भद्रा से, वो शख्स जिनकी आवाज हर महालया पर बंगाल को जगा देती है | आध्यात्मिकता समाचार - न्यूज़18

महालया केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति, पारिवारिक परंपरा और दुर्गा पूजा से जुड़ी भावनाओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

महालया 2026 कब है?

इस वर्ष महालया शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह आश्विन मास की अमावस्या से जुड़ा दिन है। इस अवसर पर पितृपक्ष का समापन होता है और देवीपक्ष की शुरुआत मानी जाती है।

महालया के दिन कई परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी स्मृति में तर्पण तथा अन्य पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। दूसरी ओर, बंगाल में इसी दिन से दुर्गा पूजा की प्रतीक्षा अपने सबसे भावनात्मक दौर में पहुंच जाती है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि महालया देवी के आगमन का सांस्कृतिक संकेत है, जबकि दुर्गा पूजा के मुख्य अनुष्ठान षष्ठी से शुरू होते हैं।

महिषासुरमर्दिनी और बीरेंद्र कृष्ण भद्र का क्या है संबंध?

महालया की चर्चा बीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज के बिना अधूरी मानी जाती है। उनकी गंभीर, प्रभावशाली और लयबद्ध आवाज में प्रस्तुत महिषासुरमर्दिनी कार्यक्रम दशकों से बंगाल के घरों में सुना जाता रहा है।

महालय घटना और बीरेंद्र कृष्ण भद्र

इस कार्यक्रम में चंडीपाठ, संस्कृत मंत्र, भक्तिगीत और देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन शामिल है। इसके निर्माण में बीरेंद्र कृष्ण भद्र के पाठ के साथ बाणी कुमार की रचना और पंकज कुमार मल्लिक के संगीत का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बीरेंद्र कृष्ण भद्र का जन्म 10 अक्टूबर 1905 को कोलकाता में हुआ था। संयोग से महालया के दिन ही उनकी जयंती भी पड़ती है। उनका निधन 3 नवंबर 1991 को हुआ, लेकिन उनकी आवाज आज भी हर साल महालया की सुबह लाखों लोगों तक पहुंचती है।

आकाशवाणी पर महिषासुरमर्दिनी कितने बजे सुनें?

महालया की सुबह महिषासुरमर्दिनी सुनने की परंपरा आम तौर पर सुबह 4 बजे से जुड़ी है। वर्ष 2026 के विशेष प्रसारण का कार्यक्रम सुबह 3:50 बजे से 5:45 बजे तक निर्धारित बताया गया है। अलग-अलग आकाशवाणी केंद्रों और चैनलों पर प्रसारण की उपलब्धता में अंतर हो सकता है।

इस कार्यक्रम को आकाशवाणी के संबंधित रेडियो चैनलों और प्रसार भारती के आधिकारिक डिजिटल माध्यमों पर सुना जा सकता है। ऑनलाइन सुनने वाले श्रोता News On AIR ऐप और आधिकारिक रेडियो स्ट्रीम की जानकारी देख सकते हैं।

कई परिवार आज भी महालया की सुबह जल्दी उठकर रेडियो के आसपास इकट्ठा होते हैं। नई पीढ़ी के लिए भी यह परंपरा बंगाल की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का एक तरीका बन गई है।

महालया का धार्मिक महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महालया वह समय है जब देवी दुर्गा के धरती पर आगमन की प्रतीक्षा शुरू होती है। इसे पितृपक्ष की समाप्ति और देवीपक्ष के आरंभ से जोड़ा जाता है।

इस दिन पूर्वजों के सम्मान में तर्पण करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ पूर्वजों को याद करना परिवार की परंपराओं को जीवित रखता है।

🗓कल प्रातः 4 बजे सुनिए , 💠 महालय के अवसर पर प्रातःकालीन विशेष कार्यक्रम, 🙏"महिषासुर मर्दिनी" 🙏, 📻हिंदी / संस्कृत - इंद्रप्रस्थ चैनल, एफ एम गोल्ड, बांग्ला - एफ एम रेनबो और, 'Akashvani AIR' YouTube चैनल ...

बंगाल के कई क्षेत्रों में महालया के अवसर पर दुर्गा प्रतिमाओं की आंखें बनाने की परंपरा भी है, जिसे चक्षुदान कहा जाता है। यह देवी की प्रतिमा को अंतिम रूप देने से जुड़ी महत्वपूर्ण रस्म है।

दुर्गा पूजा 2026 कब से शुरू होगी?

महालया के बाद दुर्गा पूजा के मुख्य आयोजन शुरू होते हैं। पश्चिम बंगाल के आधिकारिक पूजा कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 10 अक्टूबर: महालया
  • 17 अक्टूबर: महाषष्ठी
  • 18 अक्टूबर: महासप्तमी
  • 19 अक्टूबर: महाअष्टमी
  • 20 अक्टूबर: महानवमी
  • 21 अक्टूबर: विजयादशमी

इन दिनों पश्चिम बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में पंडाल सजाए जाते हैं, देवी दुर्गा की पूजा होती है और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

शुभो महालया 2026: अपनों को भेजें ये शुभकामनाएं

 महालया के अवसर पर परिवार, मित्रों और प्रियजनों को शुभकामनाएं भेजने की भी परंपरा है। यहां कुछ संदेश दिए गए हैं जिन्हें आप WhatsApp या सोशल मीडिया पर साझा कर सकते हैं।

1. शुभ महालया! मां दुर्गा की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे।

2. शुभो महालया 2026! देवीपक्ष की नई शुरुआत आपके जीवन में आशा, साहस और खुशियों का उजाला लेकर आए।

3. मां दुर्गा का आशीर्वाद आपके परिवार को शक्ति और सकारात्मकता प्रदान करे। आपको और आपके प्रियजनों को महालया की हार्दिक शुभकामनाएं।

4. महिषासुरमर्दिनी की पावन धुन के साथ आपके जीवन में नई ऊर्जा और नई उम्मीदों का आगमन हो। शुभ महालया!

5. शुभो महालया! मां दुर्गा आपके सभी अच्छे संकल्पों को शक्ति दें और आपके घर में प्रेम, शांति और मंगल बनाए रखें।

निष्कर्ष

महालया 2026 बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का एक भावनात्मक अवसर है। 10 अक्टूबर की सुबह बीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज में महिषासुरमर्दिनी सुनना, पूर्वजों को याद करना और मां दुर्गा के आगमन का स्वागत करना इस दिन की खास पहचान है। अब महालया के साथ दुर्गा पूजा की रौनक शुरू होने जा रही है और 17 अक्टूबर से मुख्य पूजा उत्सव का दौर आरंभ होगा।

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By Kanchan

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